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रानी बाग मामले में चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित
Updated Fri, 15 Sep 2017 02:05 AM IST
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रानी बाग की जांच को चार सदस्यीय कमेटी
ललितपुर।
शहर की बेशकीमती आठ एकड़ नजूल की जमीन को नियम कानून को ताक पर रखते हुए भूमिधरी के रूप में स्थानांतरित करने के मामले में डीएम मानवेंद्र सिंह ने निष्पक्ष जांच कराए जाने का निर्णय लेते हुए जिलास्तरीय अधिकारियों की चार सदस्यीय टीम गठित की है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
बता दें कि करीब सात दशक पूर्व उक्त रानीबाग की आठ एकड़ जमीन को जिमन-10 यानी नजूल की भूमि घोषित किया था, जबकि उक्त जमीन जेरेबंद नगर पालिका के सुपुर्द की थी। लेकिन इसके बावजूद भी वर्ष 1961 में टीकमगढ़ के राजा द्वारा उक्त जमीन का विक्रय कर दिया गया, जो कि नजूल भूमि घोषित होने के बाद नहीं किया जा सकता है और यह अवैधानिक है। इस पर राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने पर 31 भूक्बाधारियों के विरुद्घ कब्जा मुक्त कराने के लिए नियम प्राधिकारी/परगनाधिकारी न्यायालय में परिवाद भी दाखिल किया गया। इसमें अग्रवाल कंपनी व अन्य तीस लोगों को संबंधित न्यायालय द्वारा नोटिस भेजकर पक्ष रखने के लिए 11 जुलाई 1989 की तिथि तय हुई। इसके साथ ही नगर पालिका द्वारा उक्त सभी भूकब्जाधारियों के विरुद्घ सिविल अपील का आर्डर 25 नबंवर वर्ष 2008 को पारित कर जिला न्यायालय को अपील का उचित निस्तारण मैरिट के आधार पर करने के आदेश जारी किए गए थे। इस पर जिला न्यायाधीश ने यह मामला नियत प्राधिकारी को स्थानांतरित कर दिया, जिसके बाद 10 अप्रैल 2015 को नगर पालिका के स्वामित्व को खत्म करते हुए रानी बाग की उक्त आठ एकड़ जमीन को नजूल न मानते हुए उसे राजा की संपत्ति घोषित कर दी गई और इस एसडीएम सदर ने 34 एलआरएक्ट के तहत रानीबाग को मोहनलाल आदि के पक्ष में अवैध कब्जेदार/जिमन-20 घोषित कर दिया गया। उक्त मामले में एक व्यक्ति की शिकायत पर ग्रहमंत्रालय ने संज्ञान लिया और भारत सरकार के अंडर सेक्रेटरी ने उत्तर प्रदेश सरकार के चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखकर रानीबाग के उक्त मामले में सीबीआई जांच करने के विषय में उचित कार्रवाई करने की संस्तुति की थी। इसके बाद बाद कुछ लोगों द्वारा रानीबाग की बेशकीमती आठ एकड़ नजूल की जमीन को नियम कानून को ताक पर रखकर भूमिधरी घोषित करने की शिकायत प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रपति, ग्रहमंत्रालय, मुख्यमंत्री एवं जिला स्तर पर जिलाधिकारी से की थी और जमीन स्थानांतरण में करोड़ों रुपए की राजस्व हानि होने की बात भी कही गई थी। शिकायत मिलने और समाचार पत्रों की सुर्खियां बनी यह रानीबाग की जमीन के प्रकरण में जिला प्रशासन भी सचेत हो गया और जिलाधिकारी ने उक्त जमीन प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने के लिए चार सदस्यी जिला स्तरीय जांच कमेटी गठित की है। जिसमें एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह, एसडीएम सदर महेश प्रसाद दीक्षित, अपर उप परगनाधिकारी देवेंद्र पाल सिंह एवं तहसीडलदार स्त्रत्त्सदर हेमंत चौधरी शामिल हैं। जिलाधिकारी द्वारा जांच कमेटी गठित होने के बाद अब उक्त रानीबाग प्रकरण से जुड़े परोक्ष एवं अपरोक्ष रुप से जुड़े कई ारोबारिययों एवं कई सफेदपोश नेताओं में हड़कंप मचा हुआ है और यह प्रकरण शहर में चर्चाओं का विषय बना हुआ है।
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सीबीआई की सुगबुगाहट ने तोड़ी नींद
नगर के मध्य स्थित रानीबाग प्रकरण में जिला प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते उक्त जमीन निजी हाथों में जाने के बाद उसे खुर्द बुर्द की भी पूरी तैयारी कर ली गई और वर्तमान में उक्त जमीन पर बाउंड्रीबाल का निर्माण कार्य भी तेजी के साथ चल रहा है। लेकिन कुछ दिनों पूर्व कुछ लोगों द्वारा इसकी तसदीक करते हुए मामला संदेह प्रतीत होने पर इसकी शिकायत राष्ट्र व प्रदेश स्तर पर शिकायत की। यहां तक कि उक्त मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति भी करने का मामला सामने आया, तो यहां जिला प्रशासन भी सचेत हो गया और डेढ़ वर्ष से कुंभकरणीय नींद सो रहे जिला प्रशासन ने सीबीआई की सुगबुगाहट के बाद जिला स्तरीय अधिकारियों की चार सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी।
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चौदह लोगों के खिलाफ शमन जारी
शहर के रानीबाग की आठ एकड़ नजूल की जमीन को स्वत्वाधिकार घोषित करने के प्रकरण में मुहल्ला तालाबपुरा निवासी ग्याप्रसाद के रिब्यू प्रार्थना पत्र यानि पुनरावलोकन याचिका जिलाधिकारी की न्यायालय में दायर की। इस पर जिलाधिकारी न्यायालय ने उक्त रिब्यू प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए उक्त प्रकरण में नगर पालिका अध्यक्ष, नगर पालिका अधिकाशाषी अधिकारी और जगदीश शरण अग्रवाल समेत 14 लोगों को शमन जारी करते हुए सुनवाई के लिए 29 सितंबर की तिथि नियत की है। उक्त रिब्यू प्रार्थना पत्र में बताया गया है कि रानीबाग की उक्त आठ एकड़ जमीन जो कि अंदर हद नगर पालिका, तहसील ललितपुर में स्थित है, जो आराजी खेवट 53 में नजूल आराजी के रुप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज चली आ रही है और यह जेरेइंतजाम नगर पालिका है। उक्त जमीन का प्रकरण उच्चतम न्यायालय के आदेश पर निस्तारण के लिए जिला न्यायालय और फिर नियत प्राधिकारी के यहां पहुंचा। इसके बाद 10 अप्रैल 2015 को नगर पालिका के स्वामित्व को खत्म करते हुए रानी बाग की उक्त आठ एकड़ जमीन को नजूल न मानते हुए उसे राजा की संपत्ति घोषित कर दी गई और इस एसडीएम सदर ने 34 एलआरएक्ट के तहत रानीबाग को मोहनलाल आदि के पक्ष में अवैध कब्जेदार/जिमन-20 घोषित कर दिया गया। उक्त मामले में वादी ने जिलाधिकारी न्यायालय से जगदीश शरण बनाम आदि धारा-5 नजूल मैनुअल अंदर हद नगर पालिकशा रानीबाग के मामले में पारित किए गए 10 अप्रैल 2015 के निर्णय व आदेश को निरस्त कर खेवट 53 में यथावत दर्ज कराए जाने की मांग की है। जिसके आधार पर न्यायालय ने रानीबाग निवासी जगदीश शरण अग्रवाल, राजरानी अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, रामप्रकाश, ज्योति प्रकाश, हर प्रकाश, राजेंद्र प्रसाद, वेदप्रकाश, मनीष अग्रवाल, अनूप अग्रवाल, आशा अग्रवाल के अलावा नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका अध्यक्ष को शमन जारी करते हुए 27 सितंबर 2017 की तारीख नियत की गई है।
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ललितपुर।
शहर की बेशकीमती आठ एकड़ नजूल की जमीन को नियम कानून को ताक पर रखते हुए भूमिधरी के रूप में स्थानांतरित करने के मामले में डीएम मानवेंद्र सिंह ने निष्पक्ष जांच कराए जाने का निर्णय लेते हुए जिलास्तरीय अधिकारियों की चार सदस्यीय टीम गठित की है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
बता दें कि करीब सात दशक पूर्व उक्त रानीबाग की आठ एकड़ जमीन को जिमन-10 यानी नजूल की भूमि घोषित किया था, जबकि उक्त जमीन जेरेबंद नगर पालिका के सुपुर्द की थी। लेकिन इसके बावजूद भी वर्ष 1961 में टीकमगढ़ के राजा द्वारा उक्त जमीन का विक्रय कर दिया गया, जो कि नजूल भूमि घोषित होने के बाद नहीं किया जा सकता है और यह अवैधानिक है। इस पर राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने पर 31 भूक्बाधारियों के विरुद्घ कब्जा मुक्त कराने के लिए नियम प्राधिकारी/परगनाधिकारी न्यायालय में परिवाद भी दाखिल किया गया। इसमें अग्रवाल कंपनी व अन्य तीस लोगों को संबंधित न्यायालय द्वारा नोटिस भेजकर पक्ष रखने के लिए 11 जुलाई 1989 की तिथि तय हुई। इसके साथ ही नगर पालिका द्वारा उक्त सभी भूकब्जाधारियों के विरुद्घ सिविल अपील का आर्डर 25 नबंवर वर्ष 2008 को पारित कर जिला न्यायालय को अपील का उचित निस्तारण मैरिट के आधार पर करने के आदेश जारी किए गए थे। इस पर जिला न्यायाधीश ने यह मामला नियत प्राधिकारी को स्थानांतरित कर दिया, जिसके बाद 10 अप्रैल 2015 को नगर पालिका के स्वामित्व को खत्म करते हुए रानी बाग की उक्त आठ एकड़ जमीन को नजूल न मानते हुए उसे राजा की संपत्ति घोषित कर दी गई और इस एसडीएम सदर ने 34 एलआरएक्ट के तहत रानीबाग को मोहनलाल आदि के पक्ष में अवैध कब्जेदार/जिमन-20 घोषित कर दिया गया। उक्त मामले में एक व्यक्ति की शिकायत पर ग्रहमंत्रालय ने संज्ञान लिया और भारत सरकार के अंडर सेक्रेटरी ने उत्तर प्रदेश सरकार के चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखकर रानीबाग के उक्त मामले में सीबीआई जांच करने के विषय में उचित कार्रवाई करने की संस्तुति की थी। इसके बाद बाद कुछ लोगों द्वारा रानीबाग की बेशकीमती आठ एकड़ नजूल की जमीन को नियम कानून को ताक पर रखकर भूमिधरी घोषित करने की शिकायत प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रपति, ग्रहमंत्रालय, मुख्यमंत्री एवं जिला स्तर पर जिलाधिकारी से की थी और जमीन स्थानांतरण में करोड़ों रुपए की राजस्व हानि होने की बात भी कही गई थी। शिकायत मिलने और समाचार पत्रों की सुर्खियां बनी यह रानीबाग की जमीन के प्रकरण में जिला प्रशासन भी सचेत हो गया और जिलाधिकारी ने उक्त जमीन प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने के लिए चार सदस्यी जिला स्तरीय जांच कमेटी गठित की है। जिसमें एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह, एसडीएम सदर महेश प्रसाद दीक्षित, अपर उप परगनाधिकारी देवेंद्र पाल सिंह एवं तहसीडलदार स्त्रत्त्सदर हेमंत चौधरी शामिल हैं। जिलाधिकारी द्वारा जांच कमेटी गठित होने के बाद अब उक्त रानीबाग प्रकरण से जुड़े परोक्ष एवं अपरोक्ष रुप से जुड़े कई ारोबारिययों एवं कई सफेदपोश नेताओं में हड़कंप मचा हुआ है और यह प्रकरण शहर में चर्चाओं का विषय बना हुआ है।
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नगर के मध्य स्थित रानीबाग प्रकरण में जिला प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते उक्त जमीन निजी हाथों में जाने के बाद उसे खुर्द बुर्द की भी पूरी तैयारी कर ली गई और वर्तमान में उक्त जमीन पर बाउंड्रीबाल का निर्माण कार्य भी तेजी के साथ चल रहा है। लेकिन कुछ दिनों पूर्व कुछ लोगों द्वारा इसकी तसदीक करते हुए मामला संदेह प्रतीत होने पर इसकी शिकायत राष्ट्र व प्रदेश स्तर पर शिकायत की। यहां तक कि उक्त मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति भी करने का मामला सामने आया, तो यहां जिला प्रशासन भी सचेत हो गया और डेढ़ वर्ष से कुंभकरणीय नींद सो रहे जिला प्रशासन ने सीबीआई की सुगबुगाहट के बाद जिला स्तरीय अधिकारियों की चार सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी।
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चौदह लोगों के खिलाफ शमन जारी
शहर के रानीबाग की आठ एकड़ नजूल की जमीन को स्वत्वाधिकार घोषित करने के प्रकरण में मुहल्ला तालाबपुरा निवासी ग्याप्रसाद के रिब्यू प्रार्थना पत्र यानि पुनरावलोकन याचिका जिलाधिकारी की न्यायालय में दायर की। इस पर जिलाधिकारी न्यायालय ने उक्त रिब्यू प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए उक्त प्रकरण में नगर पालिका अध्यक्ष, नगर पालिका अधिकाशाषी अधिकारी और जगदीश शरण अग्रवाल समेत 14 लोगों को शमन जारी करते हुए सुनवाई के लिए 29 सितंबर की तिथि नियत की है। उक्त रिब्यू प्रार्थना पत्र में बताया गया है कि रानीबाग की उक्त आठ एकड़ जमीन जो कि अंदर हद नगर पालिका, तहसील ललितपुर में स्थित है, जो आराजी खेवट 53 में नजूल आराजी के रुप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज चली आ रही है और यह जेरेइंतजाम नगर पालिका है। उक्त जमीन का प्रकरण उच्चतम न्यायालय के आदेश पर निस्तारण के लिए जिला न्यायालय और फिर नियत प्राधिकारी के यहां पहुंचा। इसके बाद 10 अप्रैल 2015 को नगर पालिका के स्वामित्व को खत्म करते हुए रानी बाग की उक्त आठ एकड़ जमीन को नजूल न मानते हुए उसे राजा की संपत्ति घोषित कर दी गई और इस एसडीएम सदर ने 34 एलआरएक्ट के तहत रानीबाग को मोहनलाल आदि के पक्ष में अवैध कब्जेदार/जिमन-20 घोषित कर दिया गया। उक्त मामले में वादी ने जिलाधिकारी न्यायालय से जगदीश शरण बनाम आदि धारा-5 नजूल मैनुअल अंदर हद नगर पालिकशा रानीबाग के मामले में पारित किए गए 10 अप्रैल 2015 के निर्णय व आदेश को निरस्त कर खेवट 53 में यथावत दर्ज कराए जाने की मांग की है। जिसके आधार पर न्यायालय ने रानीबाग निवासी जगदीश शरण अग्रवाल, राजरानी अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, रामप्रकाश, ज्योति प्रकाश, हर प्रकाश, राजेंद्र प्रसाद, वेदप्रकाश, मनीष अग्रवाल, अनूप अग्रवाल, आशा अग्रवाल के अलावा नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका अध्यक्ष को शमन जारी करते हुए 27 सितंबर 2017 की तारीख नियत की गई है।