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अवैध खनन कारोबार पर नहीं लग पा रहा अंकुश
Updated Sat, 22 Sep 2018 01:37 AM IST
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अवैध खनन कारोबार पर नहीं लग पा रहा अंकुश
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। तमाम दिशा निर्देशों के बाद भी जिले में अवैध खनन के कारोबार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। खनिज माफियाओं ने नदी, नालों और ग्राम पंचायत की भूमि पर धड़ल्ले से खनन का कारोबार चला रखा है। वहीं, वन विभाग की भूमि को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। इसमें विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता से इंकार नहीं किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह इनके डंपिग प्वाइंट बने हुए हैं, जिससे राजस्व को भारी हानि पहुंच रही है।
भले ही शासन प्रशासन द्वारा अवैध खनन पर लगाम लगने का दावा कर रहे हों, लेकिन धरातल पर खनन का कारोबार खूब फल-फूल रहा है। जिले की अधिकांश नदी, नालों के साथ ही वन विभाग की जमीन में खनन देखने को मिल रहा है। वर्तमान में अवैध खनन कारोबारी वृहद स्तर पर खनन कार्य को बेखौफ तरीके से चला रहे हैं। इससे खनिज संपदा के साथ-साथ राजस्व को चूना लगाया जा रहा है तो वहीं पर्यावरण को भी प्रदूषित करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है। इसमें विभागीय अधिकारियों की उदासीनता निकलकर सामने आ रही है। जिस वजह से अवैध खनन पर रोक नहीं लग पा रही है। इस खेल में माफिया मालामाल हो रहे हैं। जिले की पाली तहसील अंतर्गत ग्राम निवाई के किनारे से गंभीरा नाले से निकाला जा रहा है। जिस पर लगभग दो वर्ष से लगातार अवैध खनन का कारोबार किया जा रहा है। जिस पर कार्रवाई नहीं होनेे से बीते माह से खनन में और तेजी आ गई है। इसमें निवाई व बरौदी गांव के लगभग 20 लोग बालू को नाले से बाहर निकालने का कार्य कर रहे हैं। ग्रामीणों की माने तो एक मजदूर एक दिन में लगभग डेढ़ से दो ट्राली बालू निकाल रहे हैं। इस नाले से 24 घंटे में लगभग 30 से 40 ट्राली बालू का कारोबार हो रहा है। इन वाहनों के आवागमन से नाले के आसपास के किसानों के खेतों की फसल को नष्ट कर दिया है। विभागीय अधिकारियों की मिली भगत से इन माफियाओं पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिससे विभाग के राजस्व को हानि पहुंच रही है।
नाले से अवैध खनन का मामला संज्ञान में आया है। जिसकी जांच कराई जाएगी। खनन होने पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
आरपी सिंह, जिला खान अधिकारी ललितपुर
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। तमाम दिशा निर्देशों के बाद भी जिले में अवैध खनन के कारोबार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। खनिज माफियाओं ने नदी, नालों और ग्राम पंचायत की भूमि पर धड़ल्ले से खनन का कारोबार चला रखा है। वहीं, वन विभाग की भूमि को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। इसमें विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता से इंकार नहीं किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह इनके डंपिग प्वाइंट बने हुए हैं, जिससे राजस्व को भारी हानि पहुंच रही है।
भले ही शासन प्रशासन द्वारा अवैध खनन पर लगाम लगने का दावा कर रहे हों, लेकिन धरातल पर खनन का कारोबार खूब फल-फूल रहा है। जिले की अधिकांश नदी, नालों के साथ ही वन विभाग की जमीन में खनन देखने को मिल रहा है। वर्तमान में अवैध खनन कारोबारी वृहद स्तर पर खनन कार्य को बेखौफ तरीके से चला रहे हैं। इससे खनिज संपदा के साथ-साथ राजस्व को चूना लगाया जा रहा है तो वहीं पर्यावरण को भी प्रदूषित करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है। इसमें विभागीय अधिकारियों की उदासीनता निकलकर सामने आ रही है। जिस वजह से अवैध खनन पर रोक नहीं लग पा रही है। इस खेल में माफिया मालामाल हो रहे हैं। जिले की पाली तहसील अंतर्गत ग्राम निवाई के किनारे से गंभीरा नाले से निकाला जा रहा है। जिस पर लगभग दो वर्ष से लगातार अवैध खनन का कारोबार किया जा रहा है। जिस पर कार्रवाई नहीं होनेे से बीते माह से खनन में और तेजी आ गई है। इसमें निवाई व बरौदी गांव के लगभग 20 लोग बालू को नाले से बाहर निकालने का कार्य कर रहे हैं। ग्रामीणों की माने तो एक मजदूर एक दिन में लगभग डेढ़ से दो ट्राली बालू निकाल रहे हैं। इस नाले से 24 घंटे में लगभग 30 से 40 ट्राली बालू का कारोबार हो रहा है। इन वाहनों के आवागमन से नाले के आसपास के किसानों के खेतों की फसल को नष्ट कर दिया है। विभागीय अधिकारियों की मिली भगत से इन माफियाओं पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिससे विभाग के राजस्व को हानि पहुंच रही है।
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नाले से अवैध खनन का मामला संज्ञान में आया है। जिसकी जांच कराई जाएगी। खनन होने पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
आरपी सिंह, जिला खान अधिकारी ललितपुर