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डिप्टी रेंजर के मामले में डीएफओ का यूटर्न
Updated Fri, 25 May 2018 03:08 AM IST
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डिप्टी रेंजर के मामले में डीएफओ का यूटर्न
तबादला रोकने के लिए उच्चाधिकारियों से की सिफारिश
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
सामाजिक वानिकी प्रभाग के निदेशक ने डिप्टी रेंजर के तबादले के मामले में यूटर्न ले लिया है। जिस डिप्टी रेंजर को उन्होंने एकतरफा रिलीव किया था, अब उसका ही तबादला रोकने के लिए उच्च अधिकारियों से सिफारिश की है, जो चर्चा का विषय बन गया है।
शासन ने एक ही जनपद में तीन साल और मंडल में छह साल से ज्यादा समय बिताने वाले अधिकारियों के तबादले की नीति तैयार की है। लेकिन वन एक ऐसा विभाग है जहां अधिकारियों के तबादले कोई मायने नहीं रखते हैं। करीब 11 माह पहले ललितपुर वन रेंज में कार्यरत डिप्टी रेंजर प्रागीलाल का स्थानांतरण उरई के लिए हुआ था। लेकिन उन्होंने अभी तक रेंज नहीं छोड़ी। एक समय ऐसा आया था जब क्षेत्रीय निदेशक बुंदेलखंड वृत्त के आदेश पर डीएफओ गोविंद शरण ने 18 दिसंबर 2017 में एकतरफा अवमुक्त कर दिया था। इसके बाद भी महीनों ललितपुर रेंजर की कृपा से रेंज में डटे रहे। विभाग में ऐसी परिस्थितियां बदली कि जिस अधिकारी ने उन्हें कार्यमुक्त किया था, उन्होंने ही उच्चस्थ अधिकारी को पत्र लिखकर पौधरोपण कर डिप्टी रेंजर को रोकने की सिफारिश की है। मुख्य वन संरक्षक ने भी डीएफओ के पत्र को तरजीह देते हुए अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इससे तमाम सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग में डिप्टी रेंजर के रुकने से न केवल पूर्व का तबादला बल्कि उसे एकतरफा रिलीव करने के आदेश का पालन भी नहीं कराया जा सका जो चर्चा का विषय बन गया है।
पौधरोपण होने तक रोकने की मिली है अनुमति
डिप्टी रेंजर की जगह प्रतिस्थानी नहीं आया है। जिस कारण डिप्टी रेंजर को पौधरोपण होने तक रोकने का अनुरोध किया था। जिस पर मुख्य वन संरक्षक बुंदेलखंड ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।
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गोविंद शरण, प्रभागीय निदेशक
सामाजिक वानिकी प्रभाग
अनसुलझे सवाल पर मौन
क्या दिसंबर माह से डिप्टी रेंजर को वेतन निर्गत किया जाएगा? एकतरफा रिलीव अधिकारी को बगैर तबादला निरस्त किए वापस काम पर लिया जा सकता है। डीएफओ के पास इन सवालों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।
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तबादला रोकने के लिए उच्चाधिकारियों से की सिफारिश
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
सामाजिक वानिकी प्रभाग के निदेशक ने डिप्टी रेंजर के तबादले के मामले में यूटर्न ले लिया है। जिस डिप्टी रेंजर को उन्होंने एकतरफा रिलीव किया था, अब उसका ही तबादला रोकने के लिए उच्च अधिकारियों से सिफारिश की है, जो चर्चा का विषय बन गया है।
शासन ने एक ही जनपद में तीन साल और मंडल में छह साल से ज्यादा समय बिताने वाले अधिकारियों के तबादले की नीति तैयार की है। लेकिन वन एक ऐसा विभाग है जहां अधिकारियों के तबादले कोई मायने नहीं रखते हैं। करीब 11 माह पहले ललितपुर वन रेंज में कार्यरत डिप्टी रेंजर प्रागीलाल का स्थानांतरण उरई के लिए हुआ था। लेकिन उन्होंने अभी तक रेंज नहीं छोड़ी। एक समय ऐसा आया था जब क्षेत्रीय निदेशक बुंदेलखंड वृत्त के आदेश पर डीएफओ गोविंद शरण ने 18 दिसंबर 2017 में एकतरफा अवमुक्त कर दिया था। इसके बाद भी महीनों ललितपुर रेंजर की कृपा से रेंज में डटे रहे। विभाग में ऐसी परिस्थितियां बदली कि जिस अधिकारी ने उन्हें कार्यमुक्त किया था, उन्होंने ही उच्चस्थ अधिकारी को पत्र लिखकर पौधरोपण कर डिप्टी रेंजर को रोकने की सिफारिश की है। मुख्य वन संरक्षक ने भी डीएफओ के पत्र को तरजीह देते हुए अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इससे तमाम सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग में डिप्टी रेंजर के रुकने से न केवल पूर्व का तबादला बल्कि उसे एकतरफा रिलीव करने के आदेश का पालन भी नहीं कराया जा सका जो चर्चा का विषय बन गया है।
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पौधरोपण होने तक रोकने की मिली है अनुमति
डिप्टी रेंजर की जगह प्रतिस्थानी नहीं आया है। जिस कारण डिप्टी रेंजर को पौधरोपण होने तक रोकने का अनुरोध किया था। जिस पर मुख्य वन संरक्षक बुंदेलखंड ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।
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गोविंद शरण, प्रभागीय निदेशक
सामाजिक वानिकी प्रभाग
अनसुलझे सवाल पर मौन
क्या दिसंबर माह से डिप्टी रेंजर को वेतन निर्गत किया जाएगा? एकतरफा रिलीव अधिकारी को बगैर तबादला निरस्त किए वापस काम पर लिया जा सकता है। डीएफओ के पास इन सवालों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।