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Updated Tue, 29 May 2018 02:04 AM IST
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अब त्रिनेत्र एप करेगा अपराधियों की पहचान
थाने स्तर के अपराधियों का हो रहा डाटा तैयार
डीजीपी की महत्वाकांक्षी योजना को साकार करने में जुटे एसपी
ललितपुर।
पकड़े गए बदमाशों का आपराधिक रिकॉर्ड खंगालने के लिए पुलिस को अब अलग-अलग थानों से संपर्क नहीं करना होगा। बदमाशों के आपराधिक रिकार्ड के लिए पुलिस एक ऐसा ऐप्स विकसति कर रही जिसमें उनके सारे अपराध दर्ज रहेंगे।
पुलिस जिले के अपराधियों की पहचान पुलिस त्रिनेत्र एप के माध्यम से करेगी। इसके लिए जिला पुलिस ने बदमाशों का ऑनलाइन डाटा तैयार करना शुरू कर दिया है। डीजीपी के इस महत्वाकांक्षी एप के शुरू होते ही पकड़े गए बदमाश की वास्तविक पहचान और उसकी आपराधिक कुंडली एक क्लिक में पुलिस के सामने होगी। इसके अलावा फर्जी नाम-पते से जेल जाने वाले बदमाशों पर भी शिकंजा कसा जाएगा। जनपद के थानों की पुलिस ने नई व्यवस्था में ऑनलाइन डोजियर तैयार करने शुरू कर दिए हैं। एसपी ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को गंभीरता से लेते हुए टीमें गठित कर नोडल अधिकारी भी नामित कर दिया है और डाटाबेस तैयार करने वाली टीम की खुद निगरानी कर रहे हैं।
बदमाशों के खिलाफ छेड़े गए अभियान के तहत पुलिस अब हाईटेक ढंग से उनकी घेराबंदी करेगी। इसका माध्यम बन रहा है यूपी पुलिस का ‘त्रिनेत्र’ एप। पुलिस इसी एप में बदमाशों के ऑनलाइन डोजियर तैयार कर रही है। गौरतलब हो कि सूबे में पहले हाथ से एफआइआर लिखी जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे पुलिस के हाइटेक होने का सिलसिला शुरू हुआ। साल 2016 में प्रदेश के थानों में ऑनलाइन एफआईआर की व्यवस्था शुरू की गई थी। बीते साल पुलिस थानों की जीडी (जनरल डायरी) भी डिजिटल होने के साथ ऑनलाइन कर दी गई थी। जीडी ऑनलाइन होने के बाद इसमें हेरफेर की आशंका शून्य हो गई है। मसलन, पुलिसकर्मी या थानेदार की आमद और रवानगी के साथ दर्ज की गई एफआईआर का समय भी ऑनलाइन चलता रहता है। पूर्व में हाथ से लिखी जाने वाली जीडी में आमद-रवानगी के समय में घंटों का अंतर कर दिया जाता था। बड़ी घटना होने पर घंटों तक थाने की जीडी रोक दी जाती थी।
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यह बन रही नई व्यवस्था
जीडी और एफआईआर ऑनलाइन करने के बाद अब पुलिस ने बदमाशों पर शिकंजा कसने के लिए ऑनलाइन डोजियर बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। पुलिस मुख्यालय से बदमाशों के ऑनलाइन डोजियर बनाने के आदेश जारी किए गए हैं। जिला मुख्यालय से थानों को ‘त्रिनेत्र’ एप मुहैया कराया गया है। इस एप में ही शातिरों का डोजियर तैयार किया जा रहा है। थानों से बदमाशों का डोजियर बनाने के बाद उसे पुलिस मुख्यालय भेजा जाएगा। बदमाशों के पकड़े जाने के बाद ऑनलाइन डोजियर के डाटाबेस से उसका मिलान किया जाएगा। इससे पलभर में बदमाश की वास्तविक पहचान और विभिन्न अपराध में जेल जाने की तिथियों समेत पूरे आपराधिक इतिहास की जानकारी पुलिस को मिल जाएगी। ऑनलाइन डोजियर बनने के बाद बदमाशों का काला चिट्ठा एक जनपद से दूसरे जनपद की पुलिस के पास भी पहुंच जाएगा।
अपराधियों की पहचान करने में होगी आसानी
त्रिनेत्र एप डीजीपी ओपी सिंह का ड्रीम प्रोजेक्ट है और इसके लिए सभी जिलों में अपराधियों का डाटा फीड करने के निर्देश मिले हैं। इस एप में लूट, चोरी, छिनैती, स्नेचिंग, डकैती जैसी वारदातों को अंजाम देने वाले अपराधियों की कुंडली तैयार की जाएगी। इसमें अपराधियों की क्राइम हिस्ट्री, फोटो समेत विभिन्न जानकारियों को फीड किया जाएगा। इसके तैयार होते ही पुलिस यदि किसी संदिग्ध को गिरफ्तार करती है तो मात्र उसकी फोटो के माध्यम से ही उसकी पूरी कुंडली प्राप्त कर सकती है। इससे अपराधियों की पहचान करने में आसानी होगी। वहीं इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए एसपी डा. ओपी सिंह ने सभी थानों को निर्देश जारी कर दिए हैं और युवा और कंप्यूटर के जानकार सिपाहियों को डाटा तैयार करने के काम में लगा दिया है। इसके अलावा इस कार्य को सही ढंग से निस्पादित करने के लिए नोडल अधिकारी भी नामित कर दिया है। वहीं इस पूरी प्रक्रिया पर खुद भी निगरानी रख रहे हैं और प्रतिदिन समीक्षा कर रहे हैं।
वर्जन
थानों में बदमाशों का ऑनलाइन डोजियर बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। ‘त्रिनेत्र’ कंप्यूटर एप से थानों में ऑनलाइन डोजियर तैयार कर डीसीआरबी में भेजे जा रहे हैं। बाद में यह डाटा पुलिस मुख्यालय भेजा जाएगा। डोजियर की नई व्यवस्था से बदमाशों के बारे में पता करने में काफी सहूलियत हो जाएगी। जिले में अब तक साल 2001 तक के 218 अपराधियों का डाटा फीड कर लिया गया है और अब हिस्ट्रीशीटरों का डाटा फीड किया जा रहा है। एक महीने में इस एप का शुभारंभ हो सकता है।
- डा. ओपी सिंह, पुलिस अधीक्षक
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थाने स्तर के अपराधियों का हो रहा डाटा तैयार
डीजीपी की महत्वाकांक्षी योजना को साकार करने में जुटे एसपी
ललितपुर।
पकड़े गए बदमाशों का आपराधिक रिकॉर्ड खंगालने के लिए पुलिस को अब अलग-अलग थानों से संपर्क नहीं करना होगा। बदमाशों के आपराधिक रिकार्ड के लिए पुलिस एक ऐसा ऐप्स विकसति कर रही जिसमें उनके सारे अपराध दर्ज रहेंगे।
पुलिस जिले के अपराधियों की पहचान पुलिस त्रिनेत्र एप के माध्यम से करेगी। इसके लिए जिला पुलिस ने बदमाशों का ऑनलाइन डाटा तैयार करना शुरू कर दिया है। डीजीपी के इस महत्वाकांक्षी एप के शुरू होते ही पकड़े गए बदमाश की वास्तविक पहचान और उसकी आपराधिक कुंडली एक क्लिक में पुलिस के सामने होगी। इसके अलावा फर्जी नाम-पते से जेल जाने वाले बदमाशों पर भी शिकंजा कसा जाएगा। जनपद के थानों की पुलिस ने नई व्यवस्था में ऑनलाइन डोजियर तैयार करने शुरू कर दिए हैं। एसपी ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को गंभीरता से लेते हुए टीमें गठित कर नोडल अधिकारी भी नामित कर दिया है और डाटाबेस तैयार करने वाली टीम की खुद निगरानी कर रहे हैं।
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बदमाशों के खिलाफ छेड़े गए अभियान के तहत पुलिस अब हाईटेक ढंग से उनकी घेराबंदी करेगी। इसका माध्यम बन रहा है यूपी पुलिस का ‘त्रिनेत्र’ एप। पुलिस इसी एप में बदमाशों के ऑनलाइन डोजियर तैयार कर रही है। गौरतलब हो कि सूबे में पहले हाथ से एफआइआर लिखी जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे पुलिस के हाइटेक होने का सिलसिला शुरू हुआ। साल 2016 में प्रदेश के थानों में ऑनलाइन एफआईआर की व्यवस्था शुरू की गई थी। बीते साल पुलिस थानों की जीडी (जनरल डायरी) भी डिजिटल होने के साथ ऑनलाइन कर दी गई थी। जीडी ऑनलाइन होने के बाद इसमें हेरफेर की आशंका शून्य हो गई है। मसलन, पुलिसकर्मी या थानेदार की आमद और रवानगी के साथ दर्ज की गई एफआईआर का समय भी ऑनलाइन चलता रहता है। पूर्व में हाथ से लिखी जाने वाली जीडी में आमद-रवानगी के समय में घंटों का अंतर कर दिया जाता था। बड़ी घटना होने पर घंटों तक थाने की जीडी रोक दी जाती थी।
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यह बन रही नई व्यवस्था
जीडी और एफआईआर ऑनलाइन करने के बाद अब पुलिस ने बदमाशों पर शिकंजा कसने के लिए ऑनलाइन डोजियर बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। पुलिस मुख्यालय से बदमाशों के ऑनलाइन डोजियर बनाने के आदेश जारी किए गए हैं। जिला मुख्यालय से थानों को ‘त्रिनेत्र’ एप मुहैया कराया गया है। इस एप में ही शातिरों का डोजियर तैयार किया जा रहा है। थानों से बदमाशों का डोजियर बनाने के बाद उसे पुलिस मुख्यालय भेजा जाएगा। बदमाशों के पकड़े जाने के बाद ऑनलाइन डोजियर के डाटाबेस से उसका मिलान किया जाएगा। इससे पलभर में बदमाश की वास्तविक पहचान और विभिन्न अपराध में जेल जाने की तिथियों समेत पूरे आपराधिक इतिहास की जानकारी पुलिस को मिल जाएगी। ऑनलाइन डोजियर बनने के बाद बदमाशों का काला चिट्ठा एक जनपद से दूसरे जनपद की पुलिस के पास भी पहुंच जाएगा।
अपराधियों की पहचान करने में होगी आसानी
त्रिनेत्र एप डीजीपी ओपी सिंह का ड्रीम प्रोजेक्ट है और इसके लिए सभी जिलों में अपराधियों का डाटा फीड करने के निर्देश मिले हैं। इस एप में लूट, चोरी, छिनैती, स्नेचिंग, डकैती जैसी वारदातों को अंजाम देने वाले अपराधियों की कुंडली तैयार की जाएगी। इसमें अपराधियों की क्राइम हिस्ट्री, फोटो समेत विभिन्न जानकारियों को फीड किया जाएगा। इसके तैयार होते ही पुलिस यदि किसी संदिग्ध को गिरफ्तार करती है तो मात्र उसकी फोटो के माध्यम से ही उसकी पूरी कुंडली प्राप्त कर सकती है। इससे अपराधियों की पहचान करने में आसानी होगी। वहीं इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए एसपी डा. ओपी सिंह ने सभी थानों को निर्देश जारी कर दिए हैं और युवा और कंप्यूटर के जानकार सिपाहियों को डाटा तैयार करने के काम में लगा दिया है। इसके अलावा इस कार्य को सही ढंग से निस्पादित करने के लिए नोडल अधिकारी भी नामित कर दिया है। वहीं इस पूरी प्रक्रिया पर खुद भी निगरानी रख रहे हैं और प्रतिदिन समीक्षा कर रहे हैं।
वर्जन
थानों में बदमाशों का ऑनलाइन डोजियर बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। ‘त्रिनेत्र’ कंप्यूटर एप से थानों में ऑनलाइन डोजियर तैयार कर डीसीआरबी में भेजे जा रहे हैं। बाद में यह डाटा पुलिस मुख्यालय भेजा जाएगा। डोजियर की नई व्यवस्था से बदमाशों के बारे में पता करने में काफी सहूलियत हो जाएगी। जिले में अब तक साल 2001 तक के 218 अपराधियों का डाटा फीड कर लिया गया है और अब हिस्ट्रीशीटरों का डाटा फीड किया जा रहा है। एक महीने में इस एप का शुभारंभ हो सकता है।
- डा. ओपी सिंह, पुलिस अधीक्षक