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नकली मावा पर नहीं लग पा रहा अंकुश1
Updated Fri, 02 Mar 2018 12:24 AM IST
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खाद्य विभाग की टीम ने लिए 19 नमूने
त्योहार पर मिठाई और मावा में मिलावट की शिकायत
मड़ावरा की छापेमारी में पंचकल्याणक बना बाधा
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
होली पर मिलावटी मावा की बिक्री रोकने के लिए खाद्य विभाग की टीम छापेमारी कर रही है। लेकिन मड़ावरा में छापामार कार्रवाई को अंजाम नहीं दिया जा सका। अधिकारियों का कहना है कि पंचकल्याणक कार्यक्रम के चलते मिठाई व मावा की दुकानें बंद रहीं, जिससे छापेमारी में बाधा आई।
सभी तहसीलों में एसडीएम के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिठाईयों व किराने की दुकानों में छापेमारी कर जनपद में कुछ 19 नमूने लिए हैं। ललितपुर शहर में पांच, पाली तहसील में चार, महरौनी में तीन, तालबेहट में पांच, बार में दो नमूने लिए गए हैं। काफी हाउस में छैना, काला जामुन, तालाबपुरा में खोया व दूध, ब्याना नाले के पास मैदा का नमूना भरा गया। वहीं, मड़ावरा में छापेमारी की कार्रवाई नहीं हो सकी है। इसकी वजह पंचकल्याणक कार्यक्रम माना जा रहा है। इस कार्यक्रम में दुकानदारों की सहभागिता के चलते उनकी दुकानें बंद रही। टीम में खाद्य सुरक्षा अधिकारी सूरेलाल, प्रशांत मलैया, विजय कुमार श्रीवास शामिल रहे।
आप भी कर सकते हैं पहचान
मिलावटी मावे की पहचान के लिए थोड़ा-सा मावा किसी बर्तन में रखकर उसमें थोड़ा-सा पानी डालकर गर्म करें। गर्म होने के बाद उसमें टिंचर, आयोडीन की कुछ बूंदे डालें। अगर मावा में स्टार्च मिला होगा तो उसका रंग तुरंत नीला हो जाएगा, जबकि असली मावे का रंग पहले जैसा ही रहेगा साथ ही मिलावटी मावे से बनी मिठाई की भी जांच घर पर की जा सकती है। हथेली पर मावा की गोली बनाएं, अगर यह फटने लगे तो समझिए मावा नकली है। असली मावा चिपचिपा नहीं होता। चखकर भी असली मावे की पहचान की जा सकती है। अगर मावे का स्वाद कसैला है तो मावा नकली हो सकता है। नकली मावे को परखने के लिए पानी में डालकर फेंटने से वह दानेदार टुकडों में अलग हो तो वह नकली है।
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ऐसे बनता है नकली खोवा
विशेषज्ञों की मानें, तो एक किलो दूध से सिर्फ 200 ग्राम मावा ही निकलता है। जाहिर है इससे मावा बनाने वालों और व्यापारियों को ज्यादा फायदा नहीं हो पाता। लिहाजा मिलावटी मावा बनाया जाता है। मिलावटी मावा बनाने में अक्सर शकरकंदी, सिंघाड़े का आटा, आलू और मैदे का इस्तेमाल होता है।
जारी रहेगा अभियान
मिलावटीखोरी को रोकने के लिए हर जगह नजर रखी जा रही है। आगे भी अभियान जारी रहेगा।
कमल निवास त्रिपाठी
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी
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त्योहार पर मिठाई और मावा में मिलावट की शिकायत
मड़ावरा की छापेमारी में पंचकल्याणक बना बाधा
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
होली पर मिलावटी मावा की बिक्री रोकने के लिए खाद्य विभाग की टीम छापेमारी कर रही है। लेकिन मड़ावरा में छापामार कार्रवाई को अंजाम नहीं दिया जा सका। अधिकारियों का कहना है कि पंचकल्याणक कार्यक्रम के चलते मिठाई व मावा की दुकानें बंद रहीं, जिससे छापेमारी में बाधा आई।
सभी तहसीलों में एसडीएम के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिठाईयों व किराने की दुकानों में छापेमारी कर जनपद में कुछ 19 नमूने लिए हैं। ललितपुर शहर में पांच, पाली तहसील में चार, महरौनी में तीन, तालबेहट में पांच, बार में दो नमूने लिए गए हैं। काफी हाउस में छैना, काला जामुन, तालाबपुरा में खोया व दूध, ब्याना नाले के पास मैदा का नमूना भरा गया। वहीं, मड़ावरा में छापेमारी की कार्रवाई नहीं हो सकी है। इसकी वजह पंचकल्याणक कार्यक्रम माना जा रहा है। इस कार्यक्रम में दुकानदारों की सहभागिता के चलते उनकी दुकानें बंद रही। टीम में खाद्य सुरक्षा अधिकारी सूरेलाल, प्रशांत मलैया, विजय कुमार श्रीवास शामिल रहे।
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आप भी कर सकते हैं पहचान
मिलावटी मावे की पहचान के लिए थोड़ा-सा मावा किसी बर्तन में रखकर उसमें थोड़ा-सा पानी डालकर गर्म करें। गर्म होने के बाद उसमें टिंचर, आयोडीन की कुछ बूंदे डालें। अगर मावा में स्टार्च मिला होगा तो उसका रंग तुरंत नीला हो जाएगा, जबकि असली मावे का रंग पहले जैसा ही रहेगा साथ ही मिलावटी मावे से बनी मिठाई की भी जांच घर पर की जा सकती है। हथेली पर मावा की गोली बनाएं, अगर यह फटने लगे तो समझिए मावा नकली है। असली मावा चिपचिपा नहीं होता। चखकर भी असली मावे की पहचान की जा सकती है। अगर मावे का स्वाद कसैला है तो मावा नकली हो सकता है। नकली मावे को परखने के लिए पानी में डालकर फेंटने से वह दानेदार टुकडों में अलग हो तो वह नकली है।
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ऐसे बनता है नकली खोवा
विशेषज्ञों की मानें, तो एक किलो दूध से सिर्फ 200 ग्राम मावा ही निकलता है। जाहिर है इससे मावा बनाने वालों और व्यापारियों को ज्यादा फायदा नहीं हो पाता। लिहाजा मिलावटी मावा बनाया जाता है। मिलावटी मावा बनाने में अक्सर शकरकंदी, सिंघाड़े का आटा, आलू और मैदे का इस्तेमाल होता है।
जारी रहेगा अभियान
मिलावटीखोरी को रोकने के लिए हर जगह नजर रखी जा रही है। आगे भी अभियान जारी रहेगा।
कमल निवास त्रिपाठी
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी