{"_id":"66cccd231b1864c48006e2b4","slug":"could-not-get-benefit-of-pandit-deendayal-self-employment-scheme-lalitpur-news-c-131-1-ltp1002-119857-2024-08-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lalitpur News: पंडित दीनदयाल स्वरोजगार योजना का नहीं मिल सका लाभ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lalitpur News: पंडित दीनदयाल स्वरोजगार योजना का नहीं मिल सका लाभ
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वरोजगार योजना का लोगों को लाभ नहीं मिल पाया। तीन वर्षों में विभाग सिर्फ 136 लोगों को ही लाभ पहुंचा सका, जबकि प्रत्येक वर्ष 600 लोगों को लाभ पहुंचाया जाना था।
सरकार ने अनुसूचित जाति के व्यक्ति को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के लिए पंडित दीनदयाल स्वरोजगार योजना का संचालन किया था। इसके अंतर्गत ऐसे लोगों को लाभ दिया जाना था, जिनकी वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्र में 46080 रुपये व नगरीय क्षेत्र में 56460 रुपये हो। ऐसे व्यक्तियों को रोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराया जाना था। प्रतिवर्ष 600 का लक्ष्य था, लेकिन तीन वर्षों में विभाग मात्र 136 लोगों को लाभ पहुंचा पाया। वित्तीय वर्ष 2020-21 में 78 लाभार्थी, 2021-22 में 34 लाभार्थी व 2022-23 में 24 लाभार्थी को लाभ मिला। इसमें दस प्रतिशत अनुदान व बाकी ऋण 60 किस्तों में बिना ब्याज के चुकाना होता है। मुख्य विकास अधिकारी केके पांडेय ने बताया कि शासन से धनराशि न आने के कारण यह योजना बंद कर दी गई है।
विज्ञापन
ललितपुर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वरोजगार योजना का लोगों को लाभ नहीं मिल पाया। तीन वर्षों में विभाग सिर्फ 136 लोगों को ही लाभ पहुंचा सका, जबकि प्रत्येक वर्ष 600 लोगों को लाभ पहुंचाया जाना था।
सरकार ने अनुसूचित जाति के व्यक्ति को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के लिए पंडित दीनदयाल स्वरोजगार योजना का संचालन किया था। इसके अंतर्गत ऐसे लोगों को लाभ दिया जाना था, जिनकी वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्र में 46080 रुपये व नगरीय क्षेत्र में 56460 रुपये हो। ऐसे व्यक्तियों को रोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराया जाना था। प्रतिवर्ष 600 का लक्ष्य था, लेकिन तीन वर्षों में विभाग मात्र 136 लोगों को लाभ पहुंचा पाया। वित्तीय वर्ष 2020-21 में 78 लाभार्थी, 2021-22 में 34 लाभार्थी व 2022-23 में 24 लाभार्थी को लाभ मिला। इसमें दस प्रतिशत अनुदान व बाकी ऋण 60 किस्तों में बिना ब्याज के चुकाना होता है। मुख्य विकास अधिकारी केके पांडेय ने बताया कि शासन से धनराशि न आने के कारण यह योजना बंद कर दी गई है।
विज्ञापन