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लगातार हो रही बारिश ने किसानों की मंशा पर फेरा पानी
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- फोटो : kisan.jpg
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ललितपुर। देर से शुरू हुई लगातार बारिश ने किसानों की मंशा पर पानी फेर दिया है। करीब एक सप्ताह से हो रही बारिश से खेतों की मिट्टी अधिक गीली हो गई है। इससे ट्रैक्टर नहीं चल पाने के कारण बुवाई नहीं हो पा रही है। किसानों का कहना है कि इस कारण करीब 50 प्रतिशत ही फसल की बुवाई नहीं हो पा रही है।
मानसून समय पर आने से बारिश के बाद जून अंतिम सप्ताह से जुलाई के मध्य सप्ताह तक खरीफ फसल की बुवाई का सीजन रहता है। किसानों ने बुवाई के लिए खेतों की जुताई कर ली और बीज शोधन व खाद का इंतजाम कर लिया लेकिन खरीफ की फसल के लिए जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के मध्य सप्ताह निकल गया। पर्याप्त बारिश न होने से खेतों में नमी नहीं आई। इससे किसानों ने बुवाई नहीं की। इस दौरान कई किसानों ने हल्की बूंदाबादी में ही बुवाई कर दी और बीज अंकुरित हुआ, बारिश न होने से सूख कर नष्ट हो गए। कुछ खेतों में बीज अच्छे से अंकुरित हुए और फसल सही रही। कई किसान पर्याप्त बारिश होने और खेतों में नमी आने तक बुवाई का इंतजार करते रहे।
जब बारिश जुलाई के मध्य सप्ताह के बाद शुरू हुई तो अब थमने नहीं ले रही है। 18 जुलाई की रात से लगातार बारिश हो रही है। प्रतिदिन बारिश होने से खेतों में पर्याप्त मात्रा में नमी आ गई। जुलाई माह का अंतिम सप्ताह चल रहा है और बारिश नहीं थम रही है। इससे लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर में बुवाई नहीं हो सकी है। अब यह किसान बारिश रुकने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन बारिश न रुकने से बुवाई की मंशा पर पानी फिर गया है। कृषि विभाग के जानकार जुलाई माह के बाद बुवाई से उत्पादन कम होने की संभावना जता रहे है। साथ ही आगे की फसल भी देरी से होती है।
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यह हुई बुवाई
फसल बुवाई हेक्टेयर
मूंगफली 8312
तिल 6233
सोयाबीन 14758
मूंग 3572
उड़द 98134
मक्का 14325
धान 348
ज्वार 432
अन्य 56
कुल 146172
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15 जुलाई तक फसल की बुवाई का सही सीजन होता है। इसके बाद केवल उड़द और मूंग की बुवाई कर सकते हैं। जुलाई के अंतिम सप्ताह के बाद बुवाई से आगे की फसल में देरी हो जाती है।
- डॉ. नितिन कुमार यादव, कृषि वैज्ञानिक
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फोटो- 21
कैप्सन- कुंवर राज यादव
जून माह में फसल की बुवाई की तैयारी कर ली थी। बारिश का इंतजार करते रहे। देर से हुई तो लगातार होने से बुवाई नहीं हो पा रही है।
- कुंवर राज यादव
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फोटो- 22
कैप्सन- संतोष कुमार
खरीफ फसल की बुवाई करने के लिए तैयार बैठे हैं। बारिश शुुरू हुई तो रुक नहीं रही है। दो दिन खुले तो बुवाई कर सकेंगे।
- संतोष कुमार
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मानसून समय पर आने से बारिश के बाद जून अंतिम सप्ताह से जुलाई के मध्य सप्ताह तक खरीफ फसल की बुवाई का सीजन रहता है। किसानों ने बुवाई के लिए खेतों की जुताई कर ली और बीज शोधन व खाद का इंतजाम कर लिया लेकिन खरीफ की फसल के लिए जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के मध्य सप्ताह निकल गया। पर्याप्त बारिश न होने से खेतों में नमी नहीं आई। इससे किसानों ने बुवाई नहीं की। इस दौरान कई किसानों ने हल्की बूंदाबादी में ही बुवाई कर दी और बीज अंकुरित हुआ, बारिश न होने से सूख कर नष्ट हो गए। कुछ खेतों में बीज अच्छे से अंकुरित हुए और फसल सही रही। कई किसान पर्याप्त बारिश होने और खेतों में नमी आने तक बुवाई का इंतजार करते रहे।
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जब बारिश जुलाई के मध्य सप्ताह के बाद शुरू हुई तो अब थमने नहीं ले रही है। 18 जुलाई की रात से लगातार बारिश हो रही है। प्रतिदिन बारिश होने से खेतों में पर्याप्त मात्रा में नमी आ गई। जुलाई माह का अंतिम सप्ताह चल रहा है और बारिश नहीं थम रही है। इससे लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर में बुवाई नहीं हो सकी है। अब यह किसान बारिश रुकने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन बारिश न रुकने से बुवाई की मंशा पर पानी फिर गया है। कृषि विभाग के जानकार जुलाई माह के बाद बुवाई से उत्पादन कम होने की संभावना जता रहे है। साथ ही आगे की फसल भी देरी से होती है।
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यह हुई बुवाई
फसल बुवाई हेक्टेयर
मूंगफली 8312
तिल 6233
सोयाबीन 14758
मूंग 3572
उड़द 98134
मक्का 14325
धान 348
ज्वार 432
अन्य 56
कुल 146172
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15 जुलाई तक फसल की बुवाई का सही सीजन होता है। इसके बाद केवल उड़द और मूंग की बुवाई कर सकते हैं। जुलाई के अंतिम सप्ताह के बाद बुवाई से आगे की फसल में देरी हो जाती है।
- डॉ. नितिन कुमार यादव, कृषि वैज्ञानिक
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फोटो- 21
कैप्सन- कुंवर राज यादव
जून माह में फसल की बुवाई की तैयारी कर ली थी। बारिश का इंतजार करते रहे। देर से हुई तो लगातार होने से बुवाई नहीं हो पा रही है।
- कुंवर राज यादव
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फोटो- 22
कैप्सन- संतोष कुमार
खरीफ फसल की बुवाई करने के लिए तैयार बैठे हैं। बारिश शुुरू हुई तो रुक नहीं रही है। दो दिन खुले तो बुवाई कर सकेंगे।
- संतोष कुमार