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बजट से अटका पुलों का निर्माण
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मुख्य सड़क पर बना शहजाद नदी का पुल
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। शहर में शहजाद नदी और ब्याना नाला पर अंग्रेजी शासनकाल के दौरान बने जर्जर हो चुके पुलों की कोई सुध नहीं ले रहा है। इनका हाल खराब है और संकरे होने के कारण आए दिन जाम की स्थिति बनती है। मुख्यमंत्री त्वरित योजना के तहत पुलों का निर्माण कराने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था, लेकिन बजट नहीं मिल सका। ऐसे में शहरवासियों को पुराने व जर्जर पुलों के रास्ते ही निकलने को मजबूर होना पड़ रहा है।
मोहल्ला नदीपुरा क्षेत्र में शहजाद नदी का पुल काफी नीचा होने के कारण बरसात के दिनों में गोविंद सागर बांध के गेट खुलने के कारण यह पुल पानी में डूब जाता है। नदी की तेज धार में अक्सर पुल की सड़क क्षतिग्रस्त हो जाती है। ऐसी स्थिति में यहां आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है और साल भर इस पुल से हिचकोले खाकर ही वाहन चालकों को निकलना पड़ता है। कई बार वाहन चालक गड्ढों में गिर जाते हैं। हालांकि, स्थानीय प्रशासन के हस्तक्षेप पर पुल की मरम्मत होती है, लेकिन मरम्मत के नाम पर भी खानापूर्ति ही की जाती है। ऐसा ही हाल डॉ. आंबेडकर पार्क के पास से निकले ब्याना नाला पर बने पुल का है, जो काफी संकरा होने के कारण यहां पर भी अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। सुरई घाट के आगे बाईपास रोड से पंचमुखी हनुमानजी मंदिर के पहले शहजाद नदी पर बने पुल की स्थिति तो और खराब है। बीते वर्ष बरसात के दौरान गोविंद सागर बांध के साइफन व गेटों के पानी की निकासी होने से यह पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। इस पर आवागमन भी बाधित हो गया था, हालांकि नगर पालिका द्वारा मिट्टी डलवाकर पैदल राहगीरों के निकलवाने के लिए इंतजाम जरुर किए गए थे, लेकिन वाहन निकालना इस पुल से खतरे से खाली नहीं है।
शहजाद नदी व ब्याना नाले पर बने पुलों के निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा बीते वर्ष एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया था, लेकिन अब तक इन पुलों के निर्माण के लिए बजट को मंजूरी नहीं मिल सकी है। इसके चलते इन पुलों के निर्माण का प्रस्ताव अधर में अटका हुआ है।
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पुलों का निर्माण मुख्यमंत्री त्वरित विकास योजना के तहत होना है। इनके निर्माण को अभी बजट नहीं मिला है। लेकिन, बजट सत्र के बाद इनके निर्माण को धनराशि स्वीकृत होने की उम्मीद है।
- रामरतन कुशवाहा, सदर विधायक।
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मोहल्ला नदीपुरा क्षेत्र में शहजाद नदी का पुल काफी नीचा होने के कारण बरसात के दिनों में गोविंद सागर बांध के गेट खुलने के कारण यह पुल पानी में डूब जाता है। नदी की तेज धार में अक्सर पुल की सड़क क्षतिग्रस्त हो जाती है। ऐसी स्थिति में यहां आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है और साल भर इस पुल से हिचकोले खाकर ही वाहन चालकों को निकलना पड़ता है। कई बार वाहन चालक गड्ढों में गिर जाते हैं। हालांकि, स्थानीय प्रशासन के हस्तक्षेप पर पुल की मरम्मत होती है, लेकिन मरम्मत के नाम पर भी खानापूर्ति ही की जाती है। ऐसा ही हाल डॉ. आंबेडकर पार्क के पास से निकले ब्याना नाला पर बने पुल का है, जो काफी संकरा होने के कारण यहां पर भी अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। सुरई घाट के आगे बाईपास रोड से पंचमुखी हनुमानजी मंदिर के पहले शहजाद नदी पर बने पुल की स्थिति तो और खराब है। बीते वर्ष बरसात के दौरान गोविंद सागर बांध के साइफन व गेटों के पानी की निकासी होने से यह पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। इस पर आवागमन भी बाधित हो गया था, हालांकि नगर पालिका द्वारा मिट्टी डलवाकर पैदल राहगीरों के निकलवाने के लिए इंतजाम जरुर किए गए थे, लेकिन वाहन निकालना इस पुल से खतरे से खाली नहीं है।
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शहजाद नदी व ब्याना नाले पर बने पुलों के निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा बीते वर्ष एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया था, लेकिन अब तक इन पुलों के निर्माण के लिए बजट को मंजूरी नहीं मिल सकी है। इसके चलते इन पुलों के निर्माण का प्रस्ताव अधर में अटका हुआ है।
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पुलों का निर्माण मुख्यमंत्री त्वरित विकास योजना के तहत होना है। इनके निर्माण को अभी बजट नहीं मिला है। लेकिन, बजट सत्र के बाद इनके निर्माण को धनराशि स्वीकृत होने की उम्मीद है।
- रामरतन कुशवाहा, सदर विधायक।