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सामग्री लगा दी सस्ती तो बच्चे कैसे करें मस्ती
lalitpur
Updated Wed, 02 Aug 2017 01:11 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : demo pic
तीन वर्ष पूर्व लाखों रुपये की लागत से आजाद बाल क्रीड़ा स्थल को नया रूप दिया गया था, जो अब देखरेख के अभाव में पुन: बदहाल स्थिति में पहुंच गया है। महीनों से क्षतिग्रस्त झूलों को सुधरवाया नहीं गया है। कई झूलों के तो अवशेष ही नजर आने लगे हैं। लोगों का आरोप है कि इसमें लगाई गई सामग्री सस्ती व गुणवत्ताविहीन थी, इसी कारण इसने जल्दी ही दम तोड़ दिया। पार्क में कीचड़ ने और भी बुरा हाल कर दिया गया है। कुछ शौकीन बच्चे कपड़ों की परवाह किए बिना ही कीचड़ में झूला झूलते रहते हैं। इसके बाद भी नगर पालिका चेत नहीं रही है।
शहर के बीचोंबीच तुवन मंदिर के पास चंद्रशेखर आजाद बाल क्रीड़ा स्थल स्थित है, इसे तीन साल पहले पार्क का रूप दिया गया। इस दौरान पार्क की चहारदीवारी पर कार्टून बनवाए गए तो कई आकर्षक झूले व रिस्क पट्टी लगवाई गई, इनमें एक मछलीनुमा खिसकपट्टी बच्चों को काफी लुभाती है जो अब क्षतिग्रस्त होने से बच्चों के कपड़े फाड़ रही है। कई बच्चे तो खिसकते समय मछली में ही फंस जाते हैं। इसकी वजह रिस्क पट्टी में जगह-जगह छेद हो गए हैं, जिस झूले पर बच्चे बतखें पर बैठकर मस्ती करते थे, उसमें से कई बतखें ही गायब हो गई हैं। एक झूले की बेरिंग जवाब दे गई है तो अन्य झूलों की स्थिति बेहतर नहीं है। नगर पालिका परिषद के कर्मियों ने महीनों से पार्क की सुध नहीं ली है। इससे कई झूलें क्षतिग्रस्त पड़े हैं। अब तो झूलों के नीचे बारिश का पानी भरने से कीचड़ हो गया है। इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। कई बच्चे तो कीचड़ में घुसना भी पसंद नहीं कर रहे हैं। कुछ ही शौकीन बच्चे हैं जो जोखिम उठाकर झूला झूल रहे हैं। ऐसे में कई बच्चे झूलों से नीचे गिरकर चुटहिल हो चुके हैं। इससे अभिभावकों में नगर पालिका के प्रति असंतोष पनप रहा है। वर्तमान में केवल चाइनीज हट भी ठीकठाक स्थिति में है। इस पर बच्चे बैठ सकते हैं, साथ ही बनाई गई खिसक पट्टी का आनंद उठा सकते हैं। विभागीय कर्मियों का कहना है कि दो बार पार्क की मरम्मत कराई जा चुकी है। इससे पहले पार्क को आकर्षक बनाने के लिए करीब पांच लाख रुपये व्यय हुए थे। अब एक और मरम्मत की आवश्यकता महसूस की जा रही है। जिसे ध्यान में रखकर कार्रवाई भी प्रारंभ हो गई है।
सात वर्ष की आयु से ऊपर के झूलते हैं बच्चे
झूूलों के क्षतिग्रस्त होने के पीछे एक वजह निर्धारित आयु से ज्यादा के बच्चे भी झूला झूलते हैं। हालांकि, नगर पालिका परिषद ने इस पर अंकुश लगाने के लिए 500 रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। विडंबना यह है कि पालिका कर्मी अभी तक ऐसे एक भी बच्चे पकड़ नहीं सकी है, जबकि हर रोज तमाम बड़े बच्चे झूलों का आनंद लेते हैं।
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नजर नहीं आता चौकीदार
नगर पालिका परिषद ने पार्क की निगरानी के लिए एक चौकीदार नियुक्त है। इसके बाद भी पार्क में बच्चों के बीच गाय, साड़ पहुंच जाते हैं। ऐसे में कोई भी अनहोनी की संभावना बनी रहती है। पार्क में जगह-जगह बड़ी घास हो गई है। इसमें जहरीले कीड़ों के विचरण का अंदेशा बना रहता है। इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
क्षतिग्रस्त झूलों की होगी मरम्मत
पार्क के क्षतिग्रस्त झूलों की मरम्मत कराने के लिए कुटेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। शीघ्र ही झूलों की मरम्मत करा दी जाएगी। जहां तक पार्क में कीचड़ व झूलों की मरम्मत की बात है तो इसका स्थलीय सत्यापन करा लिया जाएगा।
- सुभाष जायसवाल, अध्यक्ष
नगर पालिका परिषद ललितपुर।
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शहर के बीचोंबीच तुवन मंदिर के पास चंद्रशेखर आजाद बाल क्रीड़ा स्थल स्थित है, इसे तीन साल पहले पार्क का रूप दिया गया। इस दौरान पार्क की चहारदीवारी पर कार्टून बनवाए गए तो कई आकर्षक झूले व रिस्क पट्टी लगवाई गई, इनमें एक मछलीनुमा खिसकपट्टी बच्चों को काफी लुभाती है जो अब क्षतिग्रस्त होने से बच्चों के कपड़े फाड़ रही है। कई बच्चे तो खिसकते समय मछली में ही फंस जाते हैं। इसकी वजह रिस्क पट्टी में जगह-जगह छेद हो गए हैं, जिस झूले पर बच्चे बतखें पर बैठकर मस्ती करते थे, उसमें से कई बतखें ही गायब हो गई हैं। एक झूले की बेरिंग जवाब दे गई है तो अन्य झूलों की स्थिति बेहतर नहीं है। नगर पालिका परिषद के कर्मियों ने महीनों से पार्क की सुध नहीं ली है। इससे कई झूलें क्षतिग्रस्त पड़े हैं। अब तो झूलों के नीचे बारिश का पानी भरने से कीचड़ हो गया है। इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। कई बच्चे तो कीचड़ में घुसना भी पसंद नहीं कर रहे हैं। कुछ ही शौकीन बच्चे हैं जो जोखिम उठाकर झूला झूल रहे हैं। ऐसे में कई बच्चे झूलों से नीचे गिरकर चुटहिल हो चुके हैं। इससे अभिभावकों में नगर पालिका के प्रति असंतोष पनप रहा है। वर्तमान में केवल चाइनीज हट भी ठीकठाक स्थिति में है। इस पर बच्चे बैठ सकते हैं, साथ ही बनाई गई खिसक पट्टी का आनंद उठा सकते हैं। विभागीय कर्मियों का कहना है कि दो बार पार्क की मरम्मत कराई जा चुकी है। इससे पहले पार्क को आकर्षक बनाने के लिए करीब पांच लाख रुपये व्यय हुए थे। अब एक और मरम्मत की आवश्यकता महसूस की जा रही है। जिसे ध्यान में रखकर कार्रवाई भी प्रारंभ हो गई है।
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सात वर्ष की आयु से ऊपर के झूलते हैं बच्चे
झूूलों के क्षतिग्रस्त होने के पीछे एक वजह निर्धारित आयु से ज्यादा के बच्चे भी झूला झूलते हैं। हालांकि, नगर पालिका परिषद ने इस पर अंकुश लगाने के लिए 500 रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। विडंबना यह है कि पालिका कर्मी अभी तक ऐसे एक भी बच्चे पकड़ नहीं सकी है, जबकि हर रोज तमाम बड़े बच्चे झूलों का आनंद लेते हैं।
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नजर नहीं आता चौकीदार
नगर पालिका परिषद ने पार्क की निगरानी के लिए एक चौकीदार नियुक्त है। इसके बाद भी पार्क में बच्चों के बीच गाय, साड़ पहुंच जाते हैं। ऐसे में कोई भी अनहोनी की संभावना बनी रहती है। पार्क में जगह-जगह बड़ी घास हो गई है। इसमें जहरीले कीड़ों के विचरण का अंदेशा बना रहता है। इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
क्षतिग्रस्त झूलों की होगी मरम्मत
पार्क के क्षतिग्रस्त झूलों की मरम्मत कराने के लिए कुटेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। शीघ्र ही झूलों की मरम्मत करा दी जाएगी। जहां तक पार्क में कीचड़ व झूलों की मरम्मत की बात है तो इसका स्थलीय सत्यापन करा लिया जाएगा।
- सुभाष जायसवाल, अध्यक्ष
नगर पालिका परिषद ललितपुर।