{"_id":"649884d044be03e5f204fd7a","slug":"child-marriage-stopped-after-cgms-order-lalitpur-news-c-11-1-122158-2023-06-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lalitpur News: सीजीएम के आदेश के बाद रोका गया बाल विवाह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lalitpur News: सीजीएम के आदेश के बाद रोका गया बाल विवाह
विज्ञापन
ललितपुर। बाल विवाह को रोकने में प्रशासन व पुलिस की बेरुखी के कारण एनजीओ कार्यकर्ता को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बाल विवाह को रोकने के लिए तत्काल आदेश जारी किए।
प्रगति भारत सोसायटी की कार्यकारी निदेशक दीपाली पटैरिया ने न्यायालय में दिए प्रार्थनापत्र में बताया कि उसकी संस्था 150 गांवों में चाइल्ड लाइन व कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन के साथ मिलकर बाल अधिकारों और बाल विवाह प्रतिषेध पर कार्य करती हैं। संस्था को जानकारी हुई थाना बालाबेहट अंतर्गत ग्राम पठराई में एक व्यक्ति अपनी 14 वर्षीय पुत्री का विवाह कर संपन्न कराने जा रहा है। संस्था के लोगों ने पुत्री का पिता को मौखिक तौर पर समझाया, लेकिन वह मनाने को तैयार नहीं हुआ। बाल विवाह को रोके जाने के लिए जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, बाल संरक्षण अधिकारी व बाल कल्याण (न्याय पीठ) को प्रार्थनापत्र दिया। लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पूरे प्रकरण में रोचक तथ्य यह है कि विवाह 22 जून को था, एनजीओ कार्यकर्ता ने प्रशासनिक अमले हताश होकर 22 जून को न्यायालय की शरण, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उसी दिन मामले की गंभीरता को देखते हुए, सुनवाई करते हुए आदेश जारी किया।
विज्ञापन
प्रगति भारत सोसायटी की कार्यकारी निदेशक दीपाली पटैरिया ने न्यायालय में दिए प्रार्थनापत्र में बताया कि उसकी संस्था 150 गांवों में चाइल्ड लाइन व कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन के साथ मिलकर बाल अधिकारों और बाल विवाह प्रतिषेध पर कार्य करती हैं। संस्था को जानकारी हुई थाना बालाबेहट अंतर्गत ग्राम पठराई में एक व्यक्ति अपनी 14 वर्षीय पुत्री का विवाह कर संपन्न कराने जा रहा है। संस्था के लोगों ने पुत्री का पिता को मौखिक तौर पर समझाया, लेकिन वह मनाने को तैयार नहीं हुआ। बाल विवाह को रोके जाने के लिए जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, बाल संरक्षण अधिकारी व बाल कल्याण (न्याय पीठ) को प्रार्थनापत्र दिया। लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पूरे प्रकरण में रोचक तथ्य यह है कि विवाह 22 जून को था, एनजीओ कार्यकर्ता ने प्रशासनिक अमले हताश होकर 22 जून को न्यायालय की शरण, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उसी दिन मामले की गंभीरता को देखते हुए, सुनवाई करते हुए आदेश जारी किया।
विज्ञापन