{"_id":"5ed2a4338ebc3ea8214981cd","slug":"chiken-pox-in-bharon-lalitpur-news-jhs1679065133","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारौन में फैला चेचक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भारौन में फैला चेचक
विज्ञापन
ग्राम भारौन में हैंडपंप के पास भरा गंदा पानी
- फोटो : LALITPUR
धौर्रा। ब्लाक बिरधा के ग्राम भारौन में चेचक फैला हुआ है। गांव में उपचार के लिए कोई सुविधा नहीं है। ग्रामीणों को दस किलोमीटर दूर ग्राम धौर्रा में इलाज कराने के लिए आना पड़ रहा है। 15 परिवारों के बच्चे, बूढे व जवान चेचक की बीमारी से ग्रसित हैं। दो महीने से ग्रामीण बीमार हो रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों की तरफ स्वास्थ्य विभाग का ध्यान नहीं है। इससे बीमारी घटने की जगह और बढ़ रही है।
ग्राम भारौन में सहरिया जाति के अधिकांश लोग रहते हैं। सहरिया बाहुल्य क्षेत्र में दो हैंडपंप लगे हैं, जिसमें से एक खराब है और यदि चलाओ तो गंदा पानी आता है। दूसरा हैंडपंप कीचड़ के बीच में लगा है। इसी हैंडपंप के सहारे करीब सौ लोग रह रहे हैं। यह सहरिया परिवार जंगल से जड़ी- बूटी बीनकर अपनी गुजर- बसर करते हैं। लेकिन, लॉकडाउन के कारण जड़ी- बूट़ी बाजार में बिक नहीं रही है। इसलिए हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के दौरान निशुल्क राशन देने की घोषणा की है, पर इन सहरियों को निशुल्क राशन के नाम पर एक बार सिर्फ चावल दिया गया है। रोजगार के लिए सहरियों के जॉब कार्ड बने हैं, लेकिन इन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है। गर्मी के कारण सहरिया परिवारों में अधिकांश चेचक के शिकार हैं। लेकिन, इनके लिए उपचार की सुविधा नहीं है। बीमार होने की स्थिति में यह लोग दस किलोमीटर दूर ग्राम धौर्रा में उपचार कराने के लिए जाते हैं।
विज्ञापन
धौर्रा में भी ग्रामीणों को उपचार की सुविधा नहीं मिल पा रही है। क्योंकि, धौर्रा में चिकित्सक नहीं आते है। फार्मासिस्ट के भरोसे काम चल रहा है। कहने को स्वास्थ्य सेवाएं निशुल्क हैं, लेकिन जो भी मरीज उपचार के लिए आता है। उसे नजराना चढ़ाना पड़ता है, क्योंकि बिना इसके कोई सुनता ही नहीं है। ग्राम भारौन के 15 परिवारों के बच्चे, बूढे और जवान चेचक की बीमारी से ग्रसित हैं।
--------------------
दो महीने से अधिक समय से बीमार हैं। किसी डाक्टर ने ध्यान नहीं दिया, जबकि, चिकित्सकों को सूचना दे दी गई थी। एएनएम आती नहीं हैं। केवल आशा आती हैं, वह भी खानापूर्ति करके वापस चली जाती हैं।
- बिरजू सहरिया
-------------
ग्राम धौर्रा में प्राइवेट डॉक्टर के सहारे उपचार करा रहे हैं। कोई काम नहीं मिल रहा है, बाहर नहीं जा पा रहे हैं। सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है। चेचक से परेशान हैं, लेकिन इलाज नहीं हो रहा है। राशन के नाम पर सिर्फ चावल मिला है।
- रामरतन सहरिया
------------
महीना भर से बीमारी चल रहे हैं। यहां पर कोई डॉक्टर नहीं है। इस कारण उपचार नहीं मिल पा रहा है। दवाई लेने ग्राम धौर्रा तक दस किलोमीटर पैदल जाना पड़ रहा है, लेकिन आराम नहीं मिला है।
- हरकुंवर
-------------
पूरे मोहल्ला के बच्चे बीमार हैं। किसी को अब तक आराम नहीं मिला है। ग्राम धौर्रा में दवाई करा रहे हैं। ललितपुर जाने- आने का साधन नहीं है।
- रुकमन
-------------
मोहल्ले में दो हैंडपंप हैं। इसमें से एक का पानी गंदा है और पीने योग्य नहीं है। दूसरा हैंडपंप गंदगी के बीच लगा है। इससे बीमारी का खतरा बना रहता है। यहां पर सफाई नहीं हो रही है।
- लालाराम
--------
चेचक के लक्षण
-----------
- लाल चकत्ते होना
- हल्का बुखार रहना
- चिड़चिड़ापन होना
- गर्मी अधिक होना
----------
ग्राम भारौन में ग्रामीणों के बीमार होने की खबर मिली है। इस पर चिकित्सकों को भेजकर उपचार मुहैया कराया जाएगा।
- डा. प्रताप सिंह
मुख्य चिकित्साधिकारी
विज्ञापन
ग्राम भारौन में सहरिया जाति के अधिकांश लोग रहते हैं। सहरिया बाहुल्य क्षेत्र में दो हैंडपंप लगे हैं, जिसमें से एक खराब है और यदि चलाओ तो गंदा पानी आता है। दूसरा हैंडपंप कीचड़ के बीच में लगा है। इसी हैंडपंप के सहारे करीब सौ लोग रह रहे हैं। यह सहरिया परिवार जंगल से जड़ी- बूटी बीनकर अपनी गुजर- बसर करते हैं। लेकिन, लॉकडाउन के कारण जड़ी- बूट़ी बाजार में बिक नहीं रही है। इसलिए हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
विज्ञापन
केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के दौरान निशुल्क राशन देने की घोषणा की है, पर इन सहरियों को निशुल्क राशन के नाम पर एक बार सिर्फ चावल दिया गया है। रोजगार के लिए सहरियों के जॉब कार्ड बने हैं, लेकिन इन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है। गर्मी के कारण सहरिया परिवारों में अधिकांश चेचक के शिकार हैं। लेकिन, इनके लिए उपचार की सुविधा नहीं है। बीमार होने की स्थिति में यह लोग दस किलोमीटर दूर ग्राम धौर्रा में उपचार कराने के लिए जाते हैं।
विज्ञापन
धौर्रा में भी ग्रामीणों को उपचार की सुविधा नहीं मिल पा रही है। क्योंकि, धौर्रा में चिकित्सक नहीं आते है। फार्मासिस्ट के भरोसे काम चल रहा है। कहने को स्वास्थ्य सेवाएं निशुल्क हैं, लेकिन जो भी मरीज उपचार के लिए आता है। उसे नजराना चढ़ाना पड़ता है, क्योंकि बिना इसके कोई सुनता ही नहीं है। ग्राम भारौन के 15 परिवारों के बच्चे, बूढे और जवान चेचक की बीमारी से ग्रसित हैं।
--------------------
दो महीने से अधिक समय से बीमार हैं। किसी डाक्टर ने ध्यान नहीं दिया, जबकि, चिकित्सकों को सूचना दे दी गई थी। एएनएम आती नहीं हैं। केवल आशा आती हैं, वह भी खानापूर्ति करके वापस चली जाती हैं।
- बिरजू सहरिया
-------------
ग्राम धौर्रा में प्राइवेट डॉक्टर के सहारे उपचार करा रहे हैं। कोई काम नहीं मिल रहा है, बाहर नहीं जा पा रहे हैं। सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है। चेचक से परेशान हैं, लेकिन इलाज नहीं हो रहा है। राशन के नाम पर सिर्फ चावल मिला है।
- रामरतन सहरिया
------------
महीना भर से बीमारी चल रहे हैं। यहां पर कोई डॉक्टर नहीं है। इस कारण उपचार नहीं मिल पा रहा है। दवाई लेने ग्राम धौर्रा तक दस किलोमीटर पैदल जाना पड़ रहा है, लेकिन आराम नहीं मिला है।
- हरकुंवर
-------------
पूरे मोहल्ला के बच्चे बीमार हैं। किसी को अब तक आराम नहीं मिला है। ग्राम धौर्रा में दवाई करा रहे हैं। ललितपुर जाने- आने का साधन नहीं है।
- रुकमन
-------------
मोहल्ले में दो हैंडपंप हैं। इसमें से एक का पानी गंदा है और पीने योग्य नहीं है। दूसरा हैंडपंप गंदगी के बीच लगा है। इससे बीमारी का खतरा बना रहता है। यहां पर सफाई नहीं हो रही है।
- लालाराम
--------
चेचक के लक्षण
-----------
- लाल चकत्ते होना
- हल्का बुखार रहना
- चिड़चिड़ापन होना
- गर्मी अधिक होना
----------
ग्राम भारौन में ग्रामीणों के बीमार होने की खबर मिली है। इस पर चिकित्सकों को भेजकर उपचार मुहैया कराया जाएगा।
- डा. प्रताप सिंह
मुख्य चिकित्साधिकारी

चेचक की बीमारी से ग्रसित बच्चे- फोटो : LALITPUR