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मुख्य सचिव के निर्देश की अनदेखी
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Thu, 16 Jul 2015 12:10 AM IST
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नगर पालिका का निर्माण पटल नगर की सड़कों को सुधारने का काम करता है तथा मार्ग प्रकाश विभाग विद्युत व्यवस्था को संभाल रहा है। गृहकर पटल के पास गृहकर वसूली और नाम परिवर्तन की जिम्मेदारी है तथा नजूल पटल में दुकानों के किराए के साथ नगर में पालिका की जमीन से कब्जा हटाने का काम सौंपा गया है। जन्म- मृत्यु पटल नगरीय लोगों को जन्म- मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का काम करता है तथा सफाई पटल नगरीय सीमा से गंदगी का उठाने का काम करता है। यह ऐसे पटल हैं, जिनसे नगर के लोगों का आए दिन वास्ता पड़ता है। नगर पालिका में 62 लिपिक (कनिष्ठ व वरिष्ठ) के सापेक्ष मात्र 37 कर्मचारी हैं तथा गृहकर पटल के साथ सफाई में भी अन्य कर्मचारियों की लंबे समय से कमी चली आ रही है। इसके चलते नगर पालिका के दैनिक कार्य प्रभावित होते चले आ रहे हैं। जनता भी नगर पालिका अध्यक्ष, ईओ व प्रशासन को भी इस संबंध में शिकायती पत्र देती है। लेकिन, नगर पालिका कर्मचारियों के ऊपर अधिक काम का बोझ होने के कारण समय से काम नहीं हो पाता है। इसके चलते नगरवासी नपा के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
इस संबंध में मुख्य सचिव आलोक रंजन ने 13 अक्टूबर 2009 को सभी मंडलायुक्त व जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए था, जिसमें कहा गया था कि प्राय: मंडल या जिला प्रशासन नगरीय निकाय के कर्मियों को अतिरिक्त कार्य सौंप देते हैं, जिससे जनता के कार्य सुगमता एवं गुणवत्तापूर्ण नहीं हो पाते हैं। उन्होंने निकाय के कर्मियों से अत्यंत आवश्यक एवं अपरिहार्य परिस्थिति में ही काम कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बाद भी नगर पालिका कर्मचारियों से अन्य योजनाओं का सर्वे व सत्यापन कार्य कराया जा रहा है। इससे विभागीय कार्य समय से नहीं हो पा रहे हैं।
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