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सीसीटीवी और जीपीएस सिस्टम भी नहीं रोक सका धांधली
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 31 Dec 2017 01:06 AM IST
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CCTV lalitpur news
- फोटो : demo
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ललितपुर। विद्युत स्टोर में सीसीटीवी और ट्रांसफार्मर वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाने और सामान वितरण की प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद भी यहां करीब 16 लाख रुपए का घोटाला हो गया। जांच रिपोर्ट देने के बाद भी दोषी कर्मचारियों पर अब तक कार्रवाई नहीं हो सकी है। हालांकि, मामला आगरा तक पहुंचने के बाद विद्युत स्टोर के इस घोटाले में कई लोगों पर गाज गिर सकती है।
विद्युत स्टोर में करोड़ों रुपए का विद्युत सामान भंडार किया जाता है, जो विभागीय स्टीमेट के तहत सरकारी और निजी विद्युत संबंधी कार्य के लिए वितरित किया जाता है। इसका जिम्मा विद्युत स्टोर इंचार्ज का रहता है। करोड़ों रुपए के सामान की रखवाली के लिए यहां स्टोर विभाग में विद्युत सामग्री रखने वाले लगभग सभी स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाया गया है। साथ ही स्टोर के मुख्य गेट पर एक गार्ड भी हमेशा तैैनात रहता है।
वहीं ट्रांसफार्मर लाने या ले जाने के लिए लगाए गए आधा दर्जन से अधिक ट्रांसफार्मर वाहनों पर भी जीपीएस सिस्टम भी लगाया गया है। ताकि ट्रांसफार्मर लाने या ले जाने के दौरान उस वाहन की सही लोकेशन भी ली जा सके। वहीं विद्युत स्टोर विभाग में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों का ऑनलाइन कनैक्शन भी सीधे मंडलीय कार्यालय से जुड़ा हुआ है, ताकि यदि कहीं कोई गड़बड़ी या संदिग्धता नजर आए तो उसे आसानी से पकड़ा जा सके। इसके बाद भी विद्युत स्टोर में 16 लाख रुपए की कीमत का घोटाला हो गया और खुद उच्चाधिकारी भी इस मामले को पकड़ नहीं पाए। वह तो नए विद्युत स्टोर सहायक अभियंता की तैनाती के दौरान यह मामला विद्युत सामग्री की गिनती के दौरान पकड़ में आ गया।
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वहीं इस घोटाले में जांच टीम द्वारा विद्युत सामग्री की गिनती के बाद अपनी रिपोर्ट भी उच्चाधिकारियों को दे दी, लेकिन इसके बाद भी उक्त मामले में अब तक कोई कार्रवाई न होना मामले को दबाने की ओर इंगित कर रहा है। इस मामले में यदि उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो स्टोर विभाग में घोटालों की लंबी परतें खुल सकती हैं और इसमें कई लोगों के चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं, जिसमें वर्तमान से लेकर कई पुराने कर्मचारियों पर गाज गिरना तय रहेगा।
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विद्युत स्टोर में करोड़ों रुपए का विद्युत सामान भंडार किया जाता है, जो विभागीय स्टीमेट के तहत सरकारी और निजी विद्युत संबंधी कार्य के लिए वितरित किया जाता है। इसका जिम्मा विद्युत स्टोर इंचार्ज का रहता है। करोड़ों रुपए के सामान की रखवाली के लिए यहां स्टोर विभाग में विद्युत सामग्री रखने वाले लगभग सभी स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाया गया है। साथ ही स्टोर के मुख्य गेट पर एक गार्ड भी हमेशा तैैनात रहता है।
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वहीं ट्रांसफार्मर लाने या ले जाने के लिए लगाए गए आधा दर्जन से अधिक ट्रांसफार्मर वाहनों पर भी जीपीएस सिस्टम भी लगाया गया है। ताकि ट्रांसफार्मर लाने या ले जाने के दौरान उस वाहन की सही लोकेशन भी ली जा सके। वहीं विद्युत स्टोर विभाग में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों का ऑनलाइन कनैक्शन भी सीधे मंडलीय कार्यालय से जुड़ा हुआ है, ताकि यदि कहीं कोई गड़बड़ी या संदिग्धता नजर आए तो उसे आसानी से पकड़ा जा सके। इसके बाद भी विद्युत स्टोर में 16 लाख रुपए की कीमत का घोटाला हो गया और खुद उच्चाधिकारी भी इस मामले को पकड़ नहीं पाए। वह तो नए विद्युत स्टोर सहायक अभियंता की तैनाती के दौरान यह मामला विद्युत सामग्री की गिनती के दौरान पकड़ में आ गया।
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वहीं इस घोटाले में जांच टीम द्वारा विद्युत सामग्री की गिनती के बाद अपनी रिपोर्ट भी उच्चाधिकारियों को दे दी, लेकिन इसके बाद भी उक्त मामले में अब तक कोई कार्रवाई न होना मामले को दबाने की ओर इंगित कर रहा है। इस मामले में यदि उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो स्टोर विभाग में घोटालों की लंबी परतें खुल सकती हैं और इसमें कई लोगों के चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं, जिसमें वर्तमान से लेकर कई पुराने कर्मचारियों पर गाज गिरना तय रहेगा।