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विशेष पैकेज में भ्रष्टाचार की जांच करे सीबीआई
ब्यूरो
Updated Wed, 13 Jan 2016 01:50 AM IST
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ललितपुर। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि बुंदेलखंड में सूखे से किसानों का बुरा हाल है। सिंचाई के अभाव में अधिकांश खेत खाली पड़े हैं, सिर्फ 20 प्रतिशत खेतों में बुवाई हो सकी है। उन्होंने बुंदेलखंड विशेष पैकेज में हुए भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच कराने की मांग की।
बुंदेलखंड के भ्रमण पर आए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मंगलवार को वन विभाग के रेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि बुंदेलखंड में सूखे के कारण भूगर्भ जल स्तर नीचे की ओर खिसकता जा रहा है। कुओं में न के बराबर पानी रह गया है, आने वाले दिनों में पीने के पानी की समस्या आने वाली है।
बेतवा नदी से बांध, नदी, तालाब व पोखर भरे जाएं। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर में भूसे से कागज बन रहा है। यदि भूसे की आवाजाही नहीं रोकी गई तो जानवरों को चारा खिलाने का संकट खड़ा हो गया है। समूचे बुंदेलखंड क्षेत्र को सूखा आपदा घोषित किया जाए।
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उन्होंने कहा कि क्षेत्र से किसानों का पलायन तब तक नहीं रुकेगा, जब तक यहां रोजगार मुहैया नहीं होगा। किसान साहूकारों के चंगुल में फंसते जा रहे हैं, इससे उनकी जमीनों के जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है। केंद्र व राज्य सरकारें किसानों को राहत देने में विफल साबित हो रही हैं। बुंदेलखंड के किसानों को विशेष आरक्षण देकर सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि बुंदेलखंड विशेष पैकेज देकर वाहवाही लूटी गई, लेकिन इससे किसानों का भला नहीं हुआ, बल्कि अधिकारियों की जेबें गर्म होती रहीं।
उन्होंने पैकेज में हुए भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच कराने व किसानों के कर्ज को माफ करने की मांग की। इस संबंध में वह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात करेंगे। विशेष पैकेज में लोकल स्तर की कमेटियों को शामिल किया जाए, जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके। उन्होंने इस धन का ज्यादा से ज्यादा पैसा सिंचाई संसाधन पर खर्च करने की वकालत की।
टिकैत ने यह भी कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री संजीव बालियान को शीघ्र ही बुंदेलखंड के भ्रमण पर बुलाया जाएगा, ताकि वह हकीकत से रूबरू हो सकें।
सूखे के मामले में प्रधानमंत्री को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। 25 साल से कोई कृषि नीति तय नहीं हो सकी है। कृषि से जुड़े 18 मंत्री हैं, लेकिन कृषि के क्षेत्र में सही दिशा में काम नहीं हो पा रहा है। यदि 18 मंत्रियों की कमेटी बना दी जाए तो सार्थक परिणाम सामने आएंगे।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड आर्गेनिक बोर्ड गठन के मामले में अनदेखी की जा रही है। किसानों के साथ अछूतों जैसा व्यवहार हो रहा है। विभिन्न मांगों को लेकर 17 मार्च को दिल्ली में प्रदर्शन किया जाएगा। बुंदेलखंड के भ्रमण के पश्चात रणनीति का खुलासा किया जाएगा।
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बुंदेलखंड के भ्रमण पर आए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मंगलवार को वन विभाग के रेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि बुंदेलखंड में सूखे के कारण भूगर्भ जल स्तर नीचे की ओर खिसकता जा रहा है। कुओं में न के बराबर पानी रह गया है, आने वाले दिनों में पीने के पानी की समस्या आने वाली है।
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बेतवा नदी से बांध, नदी, तालाब व पोखर भरे जाएं। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर में भूसे से कागज बन रहा है। यदि भूसे की आवाजाही नहीं रोकी गई तो जानवरों को चारा खिलाने का संकट खड़ा हो गया है। समूचे बुंदेलखंड क्षेत्र को सूखा आपदा घोषित किया जाए।
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उन्होंने कहा कि क्षेत्र से किसानों का पलायन तब तक नहीं रुकेगा, जब तक यहां रोजगार मुहैया नहीं होगा। किसान साहूकारों के चंगुल में फंसते जा रहे हैं, इससे उनकी जमीनों के जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है। केंद्र व राज्य सरकारें किसानों को राहत देने में विफल साबित हो रही हैं। बुंदेलखंड के किसानों को विशेष आरक्षण देकर सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि बुंदेलखंड विशेष पैकेज देकर वाहवाही लूटी गई, लेकिन इससे किसानों का भला नहीं हुआ, बल्कि अधिकारियों की जेबें गर्म होती रहीं।
उन्होंने पैकेज में हुए भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच कराने व किसानों के कर्ज को माफ करने की मांग की। इस संबंध में वह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात करेंगे। विशेष पैकेज में लोकल स्तर की कमेटियों को शामिल किया जाए, जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके। उन्होंने इस धन का ज्यादा से ज्यादा पैसा सिंचाई संसाधन पर खर्च करने की वकालत की।
टिकैत ने यह भी कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री संजीव बालियान को शीघ्र ही बुंदेलखंड के भ्रमण पर बुलाया जाएगा, ताकि वह हकीकत से रूबरू हो सकें।
सूखे के मामले में प्रधानमंत्री को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। 25 साल से कोई कृषि नीति तय नहीं हो सकी है। कृषि से जुड़े 18 मंत्री हैं, लेकिन कृषि के क्षेत्र में सही दिशा में काम नहीं हो पा रहा है। यदि 18 मंत्रियों की कमेटी बना दी जाए तो सार्थक परिणाम सामने आएंगे।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड आर्गेनिक बोर्ड गठन के मामले में अनदेखी की जा रही है। किसानों के साथ अछूतों जैसा व्यवहार हो रहा है। विभिन्न मांगों को लेकर 17 मार्च को दिल्ली में प्रदर्शन किया जाएगा। बुंदेलखंड के भ्रमण के पश्चात रणनीति का खुलासा किया जाएगा।