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दरिंदगी रोकने के लिए फांसी की सजा जरूरी
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अपराजिता की शपथ लेती छात्राएं
- फोटो : LALITPUR
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दरिंदगी रोकने के लिए फांसी की सजा जरूरी
ललितपुर। ‘अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स’ अभियान के तहत छात्राओं ने न किसी से डरेंगे और डटकर मुकाबला करेंगे की शपथ ली और हैदराबाद में हुई हैवानियत के दोषी आरोपियों को फांसी की सजा दिए जाने की मांग की।
हैदराबाद में 27 वर्षीय महिला पशु चिकित्सक की बलात्कार के बाद हत्या कर शव को जला देने के मामले में देश भर में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। शहर में आलोक एकेडमी की छात्राओं ने शपथ ली। संचालक आलोक सिंह राजपूत ने कहा कि लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। बहुत हो गया, अब इन दुस्साहसिक घटनाओं पर रोक लगनी चाहिए। कभी निर्भया तो कभी कठुआ कांड और अब एक चिकित्सक हत्याकांड। अब फास्ट ट्रैक कोर्ट की जरूरत है, क्योंकि निर्भया को इंसाफ नहीं मिला है। समाज व प्रशासन को आगे आकर इसकी चिंता करनी चाहिए। जैसा गुस्सा लोगों में निर्भया कांड के समय था, वैसा गुस्सा फिर दिख रहा है। पुरुषों को अपनी सोच महिला के प्रति बदलनी होगी। मृत्यु दंड और फास्ट ट्रैक अदालतों की संख्या बढ़ाने की काफी जरूरत है। पुलिस पेट्रोलिंग होनी चाहिए। महिलाएं भी किसी गलत हरकत को नजरंदाज न करें, तत्काल पुलिस की मदद लें।
निर्भया जैसी घटना की पुनरावृत्ति हो गई। कब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। पशुओं जैसी सोच रखने वाले लोगों की सोच बदलने होगी। यह तभी संभव होगा, जब बिना समय गंवाए बलात्कारी को फांसी दे दी जाए। देश के कानून को सख्त बनाना होगा। इससे लोगों में खौफ पैदा होगा।
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- दिव्या वेद
अब वक्त आ गया है कि देश में दरिंदों को फांसी की सजा दी जाए। बलात्कार हो या ऐसी घटना जो विचलित कर दे, इन्हें अंजाम देने वाले लोगों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। कानून का डर होना बहुत जरूरी है, क्योंकि कुछ लोग डर की भाषा ही समझते हैं।
- वर्षा तिवारी
इस तरह की त्रासदी से उबरने के लिए सिर्फ कानून बनाना समाधान नहीं है। प्राथमिक स्तर से ही नैतिक मूल्यपरक शिक्षा को पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग बनाना होगा। हर मां अपने बेटों को संस्कारों के पाठ के साथ पालन-पोषण करे तो ऐसी ह्रदयविदारक घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी।
- रानी निरंजन
एक पशु चिकित्सक के साथ जो हुआ उसके लिए शर्मनाक शब्द बौना है। यह हमारे समाज के मुंह पर जोरदार तमाचा है, जो पूरे देश को शर्मिंदा करता है। समाज को यह दिखाता है कि बेटी और महिलाओं के प्रति कितने घृणित लोग हैं। सरकारें आखिर कब तक बेटियों को यूं ही मरते हुए देखती रहेंगी।
-निधि सुड़ेले
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ललितपुर। ‘अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स’ अभियान के तहत छात्राओं ने न किसी से डरेंगे और डटकर मुकाबला करेंगे की शपथ ली और हैदराबाद में हुई हैवानियत के दोषी आरोपियों को फांसी की सजा दिए जाने की मांग की।
हैदराबाद में 27 वर्षीय महिला पशु चिकित्सक की बलात्कार के बाद हत्या कर शव को जला देने के मामले में देश भर में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। शहर में आलोक एकेडमी की छात्राओं ने शपथ ली। संचालक आलोक सिंह राजपूत ने कहा कि लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। बहुत हो गया, अब इन दुस्साहसिक घटनाओं पर रोक लगनी चाहिए। कभी निर्भया तो कभी कठुआ कांड और अब एक चिकित्सक हत्याकांड। अब फास्ट ट्रैक कोर्ट की जरूरत है, क्योंकि निर्भया को इंसाफ नहीं मिला है। समाज व प्रशासन को आगे आकर इसकी चिंता करनी चाहिए। जैसा गुस्सा लोगों में निर्भया कांड के समय था, वैसा गुस्सा फिर दिख रहा है। पुरुषों को अपनी सोच महिला के प्रति बदलनी होगी। मृत्यु दंड और फास्ट ट्रैक अदालतों की संख्या बढ़ाने की काफी जरूरत है। पुलिस पेट्रोलिंग होनी चाहिए। महिलाएं भी किसी गलत हरकत को नजरंदाज न करें, तत्काल पुलिस की मदद लें।
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निर्भया जैसी घटना की पुनरावृत्ति हो गई। कब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। पशुओं जैसी सोच रखने वाले लोगों की सोच बदलने होगी। यह तभी संभव होगा, जब बिना समय गंवाए बलात्कारी को फांसी दे दी जाए। देश के कानून को सख्त बनाना होगा। इससे लोगों में खौफ पैदा होगा।
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- दिव्या वेद
अब वक्त आ गया है कि देश में दरिंदों को फांसी की सजा दी जाए। बलात्कार हो या ऐसी घटना जो विचलित कर दे, इन्हें अंजाम देने वाले लोगों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। कानून का डर होना बहुत जरूरी है, क्योंकि कुछ लोग डर की भाषा ही समझते हैं।
- वर्षा तिवारी
इस तरह की त्रासदी से उबरने के लिए सिर्फ कानून बनाना समाधान नहीं है। प्राथमिक स्तर से ही नैतिक मूल्यपरक शिक्षा को पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग बनाना होगा। हर मां अपने बेटों को संस्कारों के पाठ के साथ पालन-पोषण करे तो ऐसी ह्रदयविदारक घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी।
- रानी निरंजन
एक पशु चिकित्सक के साथ जो हुआ उसके लिए शर्मनाक शब्द बौना है। यह हमारे समाज के मुंह पर जोरदार तमाचा है, जो पूरे देश को शर्मिंदा करता है। समाज को यह दिखाता है कि बेटी और महिलाओं के प्रति कितने घृणित लोग हैं। सरकारें आखिर कब तक बेटियों को यूं ही मरते हुए देखती रहेंगी।
-निधि सुड़ेले