फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   bus stand problem

चार साल में नहीं ढूंढी जा सकी नये बस स्टैंड के लिए जमीन

Wed, 15 Jan 2020 01:42 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jan 2020 01:42 AM IST
विज्ञापन
bus stand problem
बस स्टैंड़ पर आडी तिरछी खड़ी बसें - फोटो : LALITPUR
ललितपुर। मोहल्ला घुुसयाना में संचालित अंतर्राज्यीय बस अड्डे के लिए जमीन की तलाश पूरी नहीं हो पाई है। जिला प्रशासन की ओर से लगभग चार साल पहले इसकी प्रक्रिया प्रारंभ हुई थी, जो अब तक जारी है। इसमें हो रही देरी से नागरिकों को आए दिन जाम जैसी समस्या से जूझना पड़ता है। इतना ही नहीं, इन वर्षो में कई लोग दुर्घटना केे शिकार भी हो चुके हैं।
विज्ञापन

शहर के बस स्टैंड के लिए हमेशा से जमीन की समस्या रही है। पहले प्रदर्शनी ग्राउंड में बस स्टैंड संचालित होता था, लेकिन सेना के हस्तक्षेप के कारण इसे स्थानांतरित किया गया। जब मोहल्ला घुसयाना में बस स्टैंड पहुंचा तो यहां भी सेना ने दखल देेना आरंभ कर दिया। जिला प्रशासन के हस्तक्षेप से भूमि का विवाद निपट गया, लेकिन मौजूदा समय में निजी बस स्टैंड पर पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। इससे बस स्टैंड पर यात्रियों के लिए सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पा रहा है। इस ओर ध्यान नहीं देने से अतिक्रमण ने भी पैर पसार लिए हैं।
विज्ञापन

बस स्टैंड से स्थानीय स्तर के अलावा मध्यप्रदेश के जिलों के लिए बसें उपलब्ध हैं। इसके बाद भी बस स्टैंड पर टिकट घर नहीं बना है और न सुरक्षा के लिहाज से चहारदीवारी और डिवाइडर बना है। बसें भी बेतरतीब खड़ी होती हैं, जिससे यात्रियों को असुविधा होती है। सबसे बड़ी समस्या बसों के आने-जाने से है। बस स्टैंड बीच बस्ती में होने से सड़कों पर बसों के कारण आए दिन जाम लगता है। जिस रास्ते से बसें गुजरती हैं, उस रास्ते पर जिला अस्पताल, एचबीएम अस्पताल, महिला अस्पताल, नर्सिग होम, जीजीआईसी, केंद्रीय विद्यालय, आईटीआई, रायल एकेडमी के विद्यार्थियों का आवागमन होता है। इससे इस रास्ते पर वाहनों का दबाव कुछ ज्यादा ही रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बस स्टैंड को शहर से बाहर करने की मांग लंबे समय से हो रही है। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बस स्टैंड को स्थानांतरित करने के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी को पत्र लिखा था। इस पर जिला प्रशासन सक्रिय हो गया था। तत्कालीन जिलाधिकारी डा. रूपेश कुमार ने तत्कालीन एसडीएम रमेश चंद्र को निर्देश दिए थे कि हवाई पट्टी के पास नजूल की जमीन को चिह्नित कर इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। कुछ महीनों तक जमीन तलाशने की कार्रवाई चलती रही लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
वर्तमान में भी मोहल्ला घुसयाना में ही बस स्टैंड संचालित हो रहा है। इस दौरान कई बस दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कइयों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। वर्षों पहले एक बालक को टक्कर मारकर होटल में बस घुस गई थी। पिछले साल जामा मस्जिद के सामने एक व्यक्ति की मौत बस से कुचलकर हो गई थी। इसी तरह एक लड़की की भी मृत्यु बस दुर्घटना में हुई थी। ऐसे में बस स्टैंड सुविधा की जगह परेशानी का सबब बन गया है।
----
शहर में बस स्टैंड के अलावा भी कई स्थानों पर बसें खड़ी की जाती हैं। इसमें कुछ बसें एक फिलिंग स्टेशन के सामने व कुछ नगर संसाधन केंद्र के पास यात्रियों का इंतजार करती हैं। इस तरह की अव्यवस्था का विपरीत असर शहर के यातायात पर पड़ रहा है। जहां से गुजरते हैं, वहां जाम जैसी स्थिति बन जाती है।
- अमित कटारे
----
जिला अस्पताल के कारण आसपास के एरिया को साइलेंट जोन घोषित किया गया है, लेकिन बस स्टैंड होने से सबसे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण इसी क्षेत्र में होता है। जब जाम जैसे हालात बनते हैं और भी चालक जल्दी निकलने के लिए हार्न का इस्तेमाल करते हैं। इस तरह ध्वनि प्रदूषण को बढ़ावा मिल रहा है।
- ब्रजेश यादव
----
बस स्टैंड को बस्ती से बाहर होना चाहिए। इससे टैक्सी व रिक्शा चालकों की आय में बढ़ोतरी होगी और शहर में वाहनों का दबाव भी कम हो जाएगा। इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। यदि जमीन की तलाश के लिए अधिकारी गंभीर हो जाएं तो शीघ्र ही समस्या का निदान हो जाएगा।
- राजू चौबे
----
शहर में बस स्टैंड के साथ टैक्सी वालों की भी समस्या गंभीर है। टैक्सी चालकों के लिए जो पार्किग स्थल बनाए गए हैं, उन पर पर्याप्त जगह नहीं है। इसके अलावा बस स्टैंड के अंदर टैक्सियों की आवाजाही पर रोक लगना चाहिए। इससे भी बस स्टैंड पर अव्यवस्था होती है।

- अत्तू महाराज
----
बस स्टैंड को अन्य जगह ले जाने के लिए शहर के अंदर भूखंड प्राप्त नहीं हो पा रहा है। बस स्टैंड पर साफ-सफाई कराई जा रही है। अलाव जलाए जा रहे हैं। शाम के समय नगर पालिका का एक वाहन बस स्टैंड का भ्रमण करता है। यदि कोई खुले आसमान में सोता पाया जाता है तो उसे रैन बसेरा में ठहराया जाता है।
- डा.संजय कुमार मिश्रा, अधिशासी अधिकारी
नगर पालिका परिषद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed