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इतिहास के पन्नों में दबकर रह गयी बुंदेला विद्रोह के नायक की वीर गाथा

Fri, 02 Oct 2020 01:33 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2020 01:33 AM IST
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bundela revolt madhukar shah
नाराहट में स्थित मधुकर शाह की हबेली - फोटो : LALITPUR
डोंगरा खुर्द (ललितपुर)। नाराहट गांव के बुंदेला परिवार में जन्मे मधुकर शाह ने अंग्रेजी हुकूमत की मनमानी के खिलाफ 1842 में सशस्त्र विद्रोह का बिगुल फूंका था। इस दौरान उनकी अंग्रेजी सेना के साथ क्षेत्र के जंगलों में कई बार मुठभेड़ हुई सैकड़ों की संख्या में अंग्रेजी सेना के जवान मारे गये थे। इससे अंग्रेजी राज डगमगाने लगा था।
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सन 1836 में सागर जिले के अंग्रेज अफसर ने नया कानून जारी कर जागीरदारों, ताल्लुकेदारों के अधिकारों को सीमित करने का प्रयास किया गया। अंग्रेज अफसर की इस हरकत को जागीरदारों ने अपने स्वाभिमान के विरुद्ध समझा और अंग्रेजों के प्रति नफरत और विद्रोह की ज्वाला यहीं से भड़कने लगी। इतिहास कारों के अनुसार, उस दौरान ज्यादातर जागीरदार बुंदेला या सजातीय ठाकुर ही थे। अंग्रेजों ने सज्जन जागीरदार पर पुरानी लगान बकाया दिखाकर सागर के दीवानी जज ने राव साहब पर डिक्री कर दी। वहीं, डिक्री जमा नहीं करने पर संपत्ति कुर्क करने के आदेश दे दिए थे। वहीं, चन्द्ररापुर के राजा पर पशु चोरी का झूठा आरोप लगाकर उनके उपर भी डिक्री कर दी गई ।अमीनों एवं पटवारियों का बोलचाल भी उनके स्वाभिमान को चोट पहुंचा रहा था। अंग्रेजों की इस हरकत से विद्रोह की ज्वाला भड़कने लगी थी। इस विद्रोह की ज्वाला को खुरई के तहसीलदार ने भांप लिया और उसने वहां से कलेक्टर को सूचना भेज दी की। नाराहट के राव साहब, नन्ने डोंगरा के दीवान प्रताप सिंह बुंदेला, बड़े डोंगरा के भोले जू , गुढ़ा के विक्रम जीत सिंह कभी भी विद्रोह कर सकते हैं। इसे ध्यान में रखकर अंग्रेजों ने एक और हरकत कर दी। बुंदेलखंड के राजाओं के यहां होली पर दरवाजे पर बेड़नी नृत्य का रिवाज था। 26 मार्च को होली के दिन शाहगढ़ की मशहूर बेड़नी झुकुनिया को नृत्य के लिए बुलाया गया था और नृत्य कार्यक्रम चल ही रहा था कि अंग्रेजी जमादार मौके पर आया और उत्सव के बीच से बेड़नी को उठा ले गया। उसकी यह हरकत बुंदेलों को नागवार गुजरी और सभी ने हथियार उठा लिए लेकिन राव साहब ने उस समय सभी को शांत कर दिया। आठ अप्रैल को नाराहट में बुंदेलों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह करते हुए दर्जनों अंग्रेज सिपाहियों की हत्या कर दी। इस घटना के बाद अंग्रेजों ने नाराहट के बिजय बहादुर राव साहब को गिरफ्तार कर लिया था। अंग्रेजों की इस कार्रवाई से राव साहब के तीन बेटों में तूफान ला दिया था। बुंदेला विद्रोह को लोधी एवं गौण राजाओं का भी साथ मिलने लगा। अंग्रेजी सेना के साथ दर्जनों बार मुठभेड़ होने के बाद अंग्रेज अफसर हैमिल्टन ने मधुकर शाह एवं इनके भाई गज सिंह और उर्फ गणेश जू बुंदेला को अपनी बहिन के घर से गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था। बुंदेला विद्रोह को रोकने में इस बीच अंग्रेजों ने कुछ देश द्रोहियों की मदद से मधुकर शाह को नींद में सोते हुए उनकी बहिन के घर से गिरफ्तार कर लिया था। वर्ष 1843 में उन्हें सागर जेल में फांसी के फंदे पर लटका दिया गया था। उनके भाई को काले पानी की सजा दी गई थी, उस समय उनकी उम्र 19 साल थी।
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अमिताभ बच्चन ने किया था पुस्तक का विमोचन
अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंकने वाले 1842 के बुंदेला विद्रोह के महानायक नाराहट की माटी में जन्मे वीर सपूत मधुकर शाह के उपर लिखी गई मशहूर फिल्म अभिनेता गोविंद नामदेव द्वारा रचित पुस्तक बुंदेला विद्रोह का अमिताभ बच्चन ने विमोचन किया था। इसमें मधुकर शाह के छठी पीढ़ी के वंशज विक्रम शाह को भी मंच पर बुलाया गया था।
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आज भी मौजूद हैं समाधि स्थल
सागर में आज भी शहीद की समाधि स्थल एवं पार्क मौजूद है। अमर शहीद मधुकर शाह के बलिदान को सदैव जीवंत रखने के लिए सागर की जेल में समाधि स्थल देखा जा सकता है। इसके अलावा गोपाल गंज में उनके नाम से पार्क बना हुआ है।
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1857 के स्वतंत्रता संग्राम के लगभग 15 वर्ष पूर्व साहसी युवक ने बुन्देलखण्ड के बुन्देला, ठाकुरों को संगठित करके अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंकने का साहसी कार्य किया था, जिससे अंग्रेजी हुकूमत के हाथ- पैर फूल गए थे। अंग्रेजों ने षड्यंत्र के तहत उन्हें सागर में खुले आम फांसी के फंदे पर लटका दिया था। -लक्ष्मी नारायण विश्वकर्मा।
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शासन प्रशासन ने जिले में अभी तक मधुकर शाह के नाम पर पार्क या स्मारक नहीं बनवाया। उन्होंने स्मारक बनाने की मांग की, ताकि आने वाली पीढी आजादी की लड़ाई में नाराहट क्षेत्र के योगदान को याद रख सके।-

हरेन्द्र शाह रावसाहब नाराहट

सागर में बनी मधुकर शाह की स्मारक

सागर में बनी मधुकर शाह की स्मारक- फोटो : LALITPUR

सागर में मधुकर शाह पार्क

सागर में मधुकर शाह पार्क- फोटो : LALITPUR

मधुकर शाह के बंशज को सम्मानित करते अभिताभ बच्चन

मधुकर शाह के बंशज को सम्मानित करते अभिताभ बच्चन- फोटो : LALITPUR

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