बसपा विधायक का टिकट दुविधा में

lalitpur Updated Sat, 18 Jun 2016 01:28 AM IST
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ललितपुर। गर्मी का असर जैसे-जैसे कम हो रहा है, जनपद में वैसे-वैसे राजनीतिक गलियारों का माहौल गरम होता जा रहा है। विधानसभा चुनाव होने में करीब दस महीने का समय है, लेकिन जनपद में चुनावी मौसम ने अभी से जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं की माने तो सदर विधायक रमेश कुशवाहा की टिकट अभी दुविधा में है। वहीं, भाजपा में दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है।
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विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी को छोड़कर किसी भी पार्टी ने अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। लेकिन, पिछले तीन दिनों से सोशल मीडिया में चल रही चर्चाओं की माने तो सदर विधायक रमेश कुशवाहा का टिकट बहुजन समाज पार्टी द्वारा टिकट काटे जाने की संभावना है। हालांकि, सदर विधायक रमेश कुशवाहा 19 जून को लखनऊ में होने वाली बैठक का हवाला देकर चर्चाओं को अफवाह बता रहे हैं। वहीं, बसपा से संभावित  उम्मीदवार बताए जा रहे एक कार्यकर्ता द्वारा चुनाव के लिए चंदा जुटाने की कोशिशें इन अफवाहों को बल देने में लगी हुई हैं। वर्ष 2007 में बसपा ने  इंजी. नाथूराम कुशवाहा को अपना प्रत्याशी बनाकर सदर सीट पर कुशवाहा व दलित वोट बैंक का विजयी फार्मूला बनाया था। नाथूराम कुशवाहा की  असमय मृत्यु के बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी सुमन कुशवाहा को प्रत्याशी बनाया गया और वह भी विधायक बन गईं। लेकिन, वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सुमन कुशवाहा का टिकट काटकर पार्टी ने जमीनी कार्यकर्ता रमेश कुशवाहा को प्रत्याशी बनाया और वह जीत गए। अब 2017 में होने वाले चुनाव में उनकी टिकट कटने की चर्चाएं हैं।


पार्टी सूत्र बताते हैं कि प्रत्याशी बदलेगा, लेकिन जो भी नया हो प्रत्याशी सामने आएगा वह कुशवाहा जाति से ही होगा। जिन दो बसपा कार्यकर्ताओं को टिकट मिलने की चर्चाएं हैं, वह दोनों कुशवाहा जाति से ताल्लुक रखते हैं। लेकिन, स्थानीय कुशवाहा कार्यकर्ता को झांसी के एक सजातीय व्यापारी से टिकट को लेकर संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में बसपा कार्यकर्ताओं से लेकर आम लोगों को 19 जून का इंतजार है कि बसपा का प्रत्याशी घोषित हो

ऊंची पहुंच भाजपा के टिकट का आधार
भारतीय जनता पार्टी की ओर से भले ही अभी तक विधानसभा प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया हो, लेकिन सदर सीट से कुछ नाम लगातार चर्चा में बने हुए हैं। दिलचस्प यह है कि भाजपाई खुद मान रहे हैं, कि उनकी पार्टी का टिकट जनाधार नहीं, बल्कि आलाकमान से संबंधों के आधार पर तय होगा। भाजपा की ओर से सबसे ताजा नाम तालबेहट से ताल्लुक रखने वाले भोपाल के उद्योगपति जेके सिंह का चर्चा में है। अधिकृत प्रत्याशी नहीं होने के बावजूद जेके सिंह के पोस्टर व वॉल पेंटिंग जगह-जगह नजर आ रहे हैं। उनके व्यापारिक साझेदार सुधीर शर्मा की संघ में अच्छी पैठ है और मध्य प्रदेश भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व वर्तमान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा से नजदीकी संबंध हैं। जानकार इसे जेके सिंह की टिकट का मजबूत आधार मान रहे हैं। वहीं, पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह बुंदेला उर्फ भगत राजा समेत कुछ अन्य नेता भी टिकट के दावेदारों में शामिल हैं।

पूर्व मंत्री के अलावा कांग्रेस के पास नाम नहीं
स्थानीय स्तर पर सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ सबसे ज्यादा प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस पार्टी जिले की राजनीतिक चर्चाओं से फिलहाल बाहर है। इसका  सबसे बड़ा कारण कांग्रेस के पास स्थानीय स्तर पर कोई बड़ा चेहरा न होना है। कुछ दिन पहले तक पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य का नाम सदर  विधानसभा के लिए चल रहा था, लेकिन खुद पूर्व मंत्री ने इसका खंडन कर चर्चाओं पर विराम लगा दिया। ऐसे में दूसरी पार्टियों को टक्कर देने के लिए कांग्रेस को मजबूत उम्मीदवार तलाशने में काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है।

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