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शहजाद नदी के टूटे पुल पर कोई भी गंभीर नहीं, मंदिर जाने को भक्त व राहगीर हो रहे परेशान

Sat, 03 Oct 2020 11:13 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 03 Oct 2020 11:13 PM IST
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broken bridge shahjaad river
क्षतिग्रस्त पड़ा पंचमुखी हनुमान मंदिर को जाने वाला पुल - फोटो : LALITPUR
ललितपुर। बाईपास खिरका मोहल्ला से पुराना रजवारा रोड पर पंचमुखी हनुमान मंदिर के पहले स्थिथ शहजाद नदी का पुल क्षतिग्रस्त और सड़क जर्जर होने के कारण राहगीरों एवं मंदिर जाने वाले भक्तों को परेशानी हो रही है। रात के समय यहां के आसपास के लोगों को पुल पार करके निकलने में नदी में गिरने का खतरा बना रहता है।
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शहजाद नदी के जर्जर पुल का एक हिस्सा दो वर्ष पहले बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया था। जिससे इस रास्ते से निकलना पूरी तरह से बंद हो गया। नदी का पानी कम होने पर लोग नदी में स्थित चट्टानों से होकर नदी पार करते थे या फिर करीब चार किलोमीटर घूमकर कैलगुंवा चौराहे से होकर निकलना पड़ता था। इसके कुछ दिन बाद स्थानीय लोगों ने खुद ही यहां नदी में पड़े खंडा, बोल्डर के पत्थर एवं मिट्टी डालकर अस्थायी रास्ता आने जाने लायक बना लिया और पुल के लेबल तक मिट्टी पत्थर डाल दिए। इससे अब भी यहां से दो पहिया वाहन तो किसी प्रकार निकल ही जाता है। लेकिन यदि इस बार भी बारिश के दौरान बांध के गेट खुलते हैं, तो क्षतिग्रस्त पुल का और भी बुरा हाल हो सकता है, जिसके बाद यह रास्ता पूरी तरह से बंद होने की संभावना है। दो वर्ष बाद भी इस पुल की सुध नहीं ली गई और अब भी यह शहजाद नदी का पुल क्षतिग्रस्त एवं जर्जर अवस्था में होने के कारण यहां के आसपास के लोग और राहगीरों को काफी असुविधा हो रही है। यहां तक कि इसी पुल के दूसरी ओर नदी किनारे पंचमुखी हनुमान मंदिर एवं कुछ दूरी पर ही बलखंडी हनुमान मंदिर स्थित है, जहां आसपास के मोहल्लेवासी एवं शहर के कई श्रद्धालु मंदिर जाते हैं, जिन्हें भी क्षतिग्रस्त पुल एवं जर्जर सड़क की वजह से काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। जबकि इससे पूर्व जर्जर सड़क के रास्ते कंचनघाट का प्रसिद्घ हनुमान मंदिर भी है। हालांकि यह पुल से पहले पड़ने की वजह से लोगों को अधिक परेशान नहीं होना पड़ता। लोगों व राहगीरों ने समस्याएं भी बताई और पुल की मरम्मत की मांग की।
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यह पुल दो साल पहले यहां बाढ़ आने से टूट गया था। पुल के दूसरी ओर मकान है, इसलिए रोज इसी रास्ते से निकलना पड़ता है, जिससे काफी परेशानी होती है। कैलाश पुरोहित, नागरिक।
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शहजाद नदी का यह पुल कई सालों से जर्जर पड़ा हुआ है। पुल के दूसरी ओर हमारी खेती है, रोज यहां से ही निकलना पड़ता है। निकलने में मुश्किल होती है। कन्छेदी कुशवाहा, किसान।
मोहल्ले के लोगों ने इकट्ठा होकर नदी में पड़े चट्टानों के खंडा व बोल्डर और कुछ मिट्टी डलवाकर पुल का रास्ता निकलने लायक बनवाया था। लेकिन फिर से बारिश होने पर इसका आधा रास्ता फिर से टूट गया। विनोद कुमार।

कई बार रात में निकलने पर गिरने का डर बना रहता है। यहां तो सड़क भी बहुत खराब है, लेकिन रोजाना काम के सिलसिले में इसी रास्ते से निकलना पड़ता है। सुरेश, नागरिक।
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