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बिना प्रशिक्षण दिए कहा रोगी ढूंढ कर लाओ

Mon, 09 Jul 2018 12:27 AM IST
amarujala
amarujala Updated Mon, 09 Jul 2018 12:27 AM IST
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bina prikchan kha marij dund kr lao
hospital, lalitpur news - फोटो : demo
जिले के स्वास्थ्य विभाग का एक और अजीबो गरीब कारनामा सामने आया है। विभाग द्वारा जनपद में कैंसर रोगियों को चिह्नित करने के लिए चलाया जा रहा। अफसरों ने अभियान की जिम्मेदारी जिन कर्मचारियों को सौंपी है, उन्हें अब तक प्रशिक्षण ही नहीं दिया जा सका है। ऐसे में अभियान सफल होने पर ही सवाल खडे़ हो गए है।   
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से कैंसर, ह्दय रोग, मधुमेह, रक्तचाप के उपचार के लिए एनसीडी कार्यक्रम चला रहा है। जिसके तहत जिला अस्पताल में एनसीडी सेल की स्थापना की गई है। जिसमें इन रोगों के उपचार का प्रावधान है लेकिन वर्तमान में ह्दय रोग, कैंसर के उपचार के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव बना हुआ है। जिससे ह्दय रोग, कैंसर रोगियों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। बीते महीनों में स्वास्थ्य विभाग ने कैंसर रोगियों को उपचार की सुविधा मुहैया कराने की रूपरेखा तय की। जिसमें कैंसर रोगियों के चिह्नित करने की योजना बनाई गई। इस कार्य का जिम्मा आशा व एएनएम को सौंपा गया है। कई महीनों के बीतने के बाद भी विभागीय कर्मचारियों को रोगियों की पहचान नहीं कर सके हैं। इसके पीछे मुख्य वजह उन्हें अफसरों द्वारा प्रशिक्षण नहीं देना माना जा रहा है। यही वजह है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारी गोलमोल जवाब देकर बचते नजर आ रहे हैं। ऐसी स्थिति में अभियान के सफल होने पर भी सवाल खडे़ हो गए है।
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ये है रणनीति
आशाओं को घर-घर जाकर परिवार के प्रत्येक सदस्य की स्वास्थ्य कुंडली बनाई जानी है। जिसमें परिवार के 30 वर्ष व इससे ऊपर की उम्र के सदस्यों को शामिल किया गया है। सर्वे के दौरान स्वास्थ्य कर्मी परिवार के प्रत्येक सदस्य का स्वास्थ्य ब्योरा जुटाएंगी। जिसमें मुंह का कैंसर, बच्चा दानी का कैंसर, स्तन कैंसर के साथ ही मधुमेह रोग व रक्तचाप शामिल है। यदि किसी व्यक्ति में संबंधित रोगों से संबंधित लक्षण पाए जाते हैं तो उन्हें जिला अस्पताल की एनसीडी सेल में बुलाया जाएगा। जहां पर इनका उपचार किया जाएगा। अगर कैंसर के शुरूआती लक्षण पाए जाते हैं तो उसके शरीर के संबंधित हिस्से के टुकड़ा लिया जाएगा, जिसे जांच के लिए झांसी व मुंबई भेजा जाएगा। रोग की पुष्टि होने पर मरीज को रेफर करने की भी योजना है। इसके अतिरिक्त उपकेंद्र पर एएनएम प्रत्येक बृहस्पतिवार को संबंधित रोगियों की जांच करेंगी, साथ ही स्तन कैंसर की भी जांच की जाएगी।  
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बच्चादानी कैंसर से कर्मचारी अनभिज्ञ  
स्वास्थ्य विभाग ने तीन प्रकार के कैंसर रोगियों के चिह्नित करने की योजना बनाई है। जिसमें स्तन कैंसर व मुंह के कैंसर का परीक्षण एएनएम द्वारा अपने सेंटर पर करने के लिए कहा गया है जबकि बच्चेदानी के कैंसर के मामले में अफसर मौन बने हैं। इसका परीक्षण करने के लिए कोई प्रशिक्षण भी कर्मियों को नहीं दिया गया है।  


प्रशिक्षण देने में ओर लग सकता समय
बच्चादानी के कैंसर के संबंध में कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाना है। इसका जिम्मा लखनऊ में बैठे अफसरों का है। वे ही तय करेंगे कि कौन प्रशिक्षण देगा और कहां इसका आयोजन होगा? इस कार्यक्रम को धरातल पर आने में समय खिंच सकता है।
डा. मुकेश दुबे
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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