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बिजलीघर की दो ओसीवी मशीनें हुई ब्लास्ट

Tue, 12 Sep 2017 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 12 Sep 2017 12:51 AM IST
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bijli metar
bulb, lalitpur news - फोटो : amar ujala
नगर के विद्युत उपखंड पावर हाउस के कंट्रोल रूम की दो ओसीबी मशीनें सोमवार शाम जोरदार आवाज के साथ ब्लास्ट हो गयीं। गनीमत रही कि मशीन से धुआं निकलते देखकर कंट्रोल रूम में मौजूद कर्मचारी तत्काल वहां से बाहर भाग गये और कोई हताहत नहीं हुआ। मशीनों के ब्लास्ट होने के बाद सैदपुर और सिलावन फीडर के दर्जनों ग्रामों की विद्युत आपूर्ति ठप हो गयी।
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नगर के पावर हाउस के कंट्रोल रूम में स्थापित मशीनरी काफी जर्जर हो गयी है। लेकिन, इनको बदलने की दिशा में विभाग द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मशीनें आये दिन खराब हो जाती हैं और कर्मचारी मजबूरन इनमें ही सुधार करके कामचलाऊ व्यवस्था बना देते हैं। सोमवार शाम लगभग पौने छह बजे अचानक एक के बाद एक दो मशीनों में ब्लास्ट हो गये जिससे सैदपुर और सिलावन फीडर की आपूर्ति ठप हो गयी।
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धमाका इतना जोरदार था कि कंट्रोल रूम में धुंआ ही धुंआ दिखाई दे रहा था। कंट्रोल रूम के अंदर कोई भी विद्युतकर्मी जाने का साहस नहीं जुटा सका। इसकी सूचना अवर अभियंता बृजेंद्र पाल सिंह को दी गई। उन्होंने तत्काल पावर हाउस जाकर लाइन बंद कराई और मशीनो को देखा तो वह पूरी तरह से खराब हो चुकी थीं। यह मशीनें अब चलने लायक नही बची है। बताया गया है कि जब तक नई ओसीबी मशीनें नही आती हैं तब तक सिलावन और सैदपुर दोनों फीडरों की आपूर्ति बंद ही रहेगी।  
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आज नहीं चेता विभाग   
ऐसा पहली बार नहीं मशीनें कई बार धुआं छोड़ चुकी हैं। इसके बाद भी नई मशीनरी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। ऐसे में कर्मचारी पुरानी मशीनरी की मरम्मत करके ही कामचलाऊ व्यवस्था बनाकर आपूर्ति सुचारू रखने का प्रयास कर रहे हैं। मगर यह उपाय कारगर साबित नहीं हो पा रहे हैं। विभागीय उच्चाधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रहा है। ना तो नुकसान दिख रहा है और ही अपने कर्मचारियों की जान की परवाह है। ऐसे में हादसों का अंदेशा बना हुआ है।  टेस्टिंग में यह मशीनें बेकार बताई गयी हैं, ना तो यह मशीनें कट होती हैं और ना ही इनके मीटर चलते हैं। शट डाउन करने पर मशीनों की ट्राली बाहर निकलती है।


कभी - कभी तो लाइन बंद ही नहीं होती और फीडर गिर जाता है। ऐसे मे यदि कोई लाइनमेन खंभे पर चढ़कर काम कर रहा हो तो उसकी जानमाल को खतरा बना रहता है।अपनी जान जोखिम मे डालकर लाइनमेन व संविदाकर्मी अपनी सेवायें दे रहे हैं। लेकिन, विभाग की यह लापरवाही किसी दिन उन पर भारी पड़ सकती है। कुछ माह पहले सिलावन फीडर की लाईन पर काम करते समय एक विद्युत संविदाकर्मी की करंट लगने से मौत हो चुकी है। वहीं दो साल पहले पावर हाऊस के स्विच रूम में काम करते समय संविदाकर्मी आलोक सेन की मौत हो गयी थी लेकिन फिर भी विभाग इन हादसों से सबक नहीं ले रहा है जिससे कर्मचारी खतरों के साये में हैं।
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