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Lalitpur News: भालुओं को मिलेगा सुरक्षित ठिकाना, 50 लाख की योजना
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मड़ावरा वन क्षेत्र में 300 भालुओं को संरक्षित करने के लिए देश का पहला जामवंत वन संरक्षण केंद्र विकसित करेगा विभाग
ललितपुर। मड़ावरा वन क्षेत्र में करीब 300 भालुओं की सुरक्षा और संरक्षण को ठोस आधार मिलने जा रहा है। जामवंत वन संरक्षण केंद्र बनाने के लिए विभाग ने 50 लाख रुपये की कार्ययोजना शासन को भेजी है। यदि योजना को मंजूरी मिलती है तो यह देश का पहला भालू संरक्षण केंद्र होगा। योजना के तहत भालुओं के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित बनाने, जल स्रोत विकसित करने और फलों के पेड़ लगाने जैसे कदम उठाए जाएंगे।
विभागीय अफसरों ने बताया कि मड़ावरा वन क्षेत्र 8522 हेक्टेयर में फैला हुआ है। इस घने वन क्षेत्र में रीछना पहाड़ी के आसपास के इलाके में भालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले सात सालों में भालुओं की संख्या 300 से ज्यादा हो गई है।
ऐसे में इस क्षेत्र के ग्राम सोलदा, लखंजर, पापड़ा, धौरी सागर, कोथरा के अलावा अन्य इलाकों का भी वातावरण भालुओं के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। योजना के तहत वन विभाग की ओर से जंगली क्षेत्र में भालुओं की निगरानी के लिए सुरक्षा चाैकियां बनाई जाएंगी और जंगल के चारों तरफ घेराबंदी की जाएगी। पानी की भी व्यवस्था की जाएगी।
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हाल ही में मड़ावरा के जंगलों में बाघ देखा गया था। इसके अलावा तेंदुआ, लकड़बग्घा, हिरन, बारहसिंघा, जंगली सूअर, चीतल आदि वन्यजीव भी इस क्षेत्र में विचरण करते हैं। अफसरों का कहना है कि इस कदम से न केवल भालुओं का संरक्षण होगा बल्कि अन्य वन्यजीवों को भी सुरक्षित आवास मिलेगा।
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ललितपुर। मड़ावरा वन क्षेत्र में करीब 300 भालुओं की सुरक्षा और संरक्षण को ठोस आधार मिलने जा रहा है। जामवंत वन संरक्षण केंद्र बनाने के लिए विभाग ने 50 लाख रुपये की कार्ययोजना शासन को भेजी है। यदि योजना को मंजूरी मिलती है तो यह देश का पहला भालू संरक्षण केंद्र होगा। योजना के तहत भालुओं के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित बनाने, जल स्रोत विकसित करने और फलों के पेड़ लगाने जैसे कदम उठाए जाएंगे।
विभागीय अफसरों ने बताया कि मड़ावरा वन क्षेत्र 8522 हेक्टेयर में फैला हुआ है। इस घने वन क्षेत्र में रीछना पहाड़ी के आसपास के इलाके में भालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले सात सालों में भालुओं की संख्या 300 से ज्यादा हो गई है।
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ऐसे में इस क्षेत्र के ग्राम सोलदा, लखंजर, पापड़ा, धौरी सागर, कोथरा के अलावा अन्य इलाकों का भी वातावरण भालुओं के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। योजना के तहत वन विभाग की ओर से जंगली क्षेत्र में भालुओं की निगरानी के लिए सुरक्षा चाैकियां बनाई जाएंगी और जंगल के चारों तरफ घेराबंदी की जाएगी। पानी की भी व्यवस्था की जाएगी।
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हाल ही में मड़ावरा के जंगलों में बाघ देखा गया था। इसके अलावा तेंदुआ, लकड़बग्घा, हिरन, बारहसिंघा, जंगली सूअर, चीतल आदि वन्यजीव भी इस क्षेत्र में विचरण करते हैं। अफसरों का कहना है कि इस कदम से न केवल भालुओं का संरक्षण होगा बल्कि अन्य वन्यजीवों को भी सुरक्षित आवास मिलेगा।