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जिले में खपाए जा रहे हैं नकली नोट

Sat, 24 Oct 2015 02:17 AM IST
ब्यूरो ललितपुर।
ब्यूरो ललितपुर। Updated Sat, 24 Oct 2015 02:17 AM IST
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Be absorbed in the district are fake
ललितपुर। जिला नकली नोट खपाने का गढ़ बन गया है। बैंकों में रोजाना एक से दो मामले नकली नोट के आ रहे हैं। इसमें से सबसे ज्यादा नकली नोटों की शिकायत ग्रामीणों से मिल रही हैं। गल्ला मंडी नकली नोटों को खपाने का बड़ा अड्डा बनता जा रहा है, जहां से आसानी से किसानों के माध्यम से नकली नोट ठिकाने लगाए जा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक औसतन 26 प्रतिशत नकली नोट चलन में हैं।
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देश की सबसे बड़ी वित्तीय संस्था रिर्जव बैंक ऑफ इंडिया की मानें तो पूरे देश में करीब तीस फीसदी नकली नोट प्रचलन में है। इस स्थिति से जिला भी अछूता नहीं है। जिले के बैंकों में रोजाना एक से दो केस नकली नोट के आ रहे हैं। सबसे ज्यादा नकली नोटों की शिकायत ग्रामीण निवासियों से मिल रही है। बैंकों में नकली नोट जांचने के लिए कुछ महीने पहले ही मशीनें लगाई गई हैं, लेकिन इन मशीनों की कार्यप्रणाली पर सौ फीसदी भरोसा बैंक कर्मी भी नहीं कर पा रहे हैं। जिसका खामियाजा आम लोगों को उठाना पड़ रहा है। जिले में औसतन दस करोड़ रुपए का नगद लेन- देन होता है। लेकिन, इतनी बड़ी रकम में शामिल नकली नोटों को जांचना आसान नहीं है।
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मंडियां बनी नकली नोट खपाने का अड्डा
जिले में अनाज, दाल, पत्थर, लकड़ी, जड़ी- बूटी, ग्रेनाइट आदि की मंडियों में बड़े पैमाने पर नकद रुपये का लेनदेन होता है। यहां की अनाज मंडी में सीजन में करोड़ों रुपये का नगद लेनदेन होता है। जिले का किसान फसल बेचने के बाद नकद रुपये ले जाता है। इस नकदी में निकलने वाले नकली नोटों की जिम्मेदारी न तो अनाज खरीदने वाला व्यापारी लेता है और न ही किसान की सुनवाई बैंक में होती है। करीब आठ महीने पहले जाखलौन के व्यापारियों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा था, जिसमें बताया गया था कि क्षेत्र में तरबूज खरीदने आने वाले व्यापारी नकली नोट किसानों को थमा देते हैं।
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रोज आ रहे मामले
जिले के एक बड़े बैंक मैनेजर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके बैंक में रोजाना नकली नोट के एक- दो मामले सामने आ रहे हैं। ज्यादातर मामले ग्रामीण किसानों से जुड़े हैं। रिजर्व बैंक की गाइड लाइन के मुताबिक नकली नोट पकड़ में आने के बाद उसे नष्ट कर दिया जाता है या फिर पर लाल स्याही से नकली नोट की टीप अंकित कर दी जाती है। किसानों को अनाज के बदले दी जाने वाली नकदी में नकली नोट निकलने की घटनाएं ज्यादा सामने आयी हैं। उन्होंने बताया कि व्यापारियों को भी बड़ी सावधानी से नकदी की जांच करने के बाद ही लेनदेन में इस्तेमाल करना चाहिए।


नकली नहीं, असली भी पकड़ में
कुछ महीने पहले बैंकों में आयी नकली नोट जांचने की मशीन से बैंक कर्मी परेशान हैं। यह मशीन नकली नोट को बाहर निकालने के साथ- साथ पुराने असली नोट को भी नकली की श्रेणी में शामिल कर देती है। इस कारण से बैंक कर्मियों को असली व नकली नोट की जांच मैनुअली करनी पड़ रही है। इसके अलावा कई बैंकों में केवल मशीनें नोट गिनने का काम कर रही है।

पकड़ा गया था गिरोह
जिले में नकली नोट खपाने वाले गिरोह को पकड़ने में पुलिस ने सफलता प्राप्त की है। पिछले साल महरौनी कस्बे में महिलाओं का एक गिरोह नकली नोट खपाते हुए पकड़ा गया था। पूछताछ में इन महिलाओं ने बताया था कि उन्हें पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति ने नोट खपाने को दिए थे। इस आरोपी की कुर्की तक हो गई है, लेकिन अभी यह पकड़ में नहीं आ पाया है।

किसान है टारगेट पर
बैंक अधिकारियों की मानें तो सबसे ज्यादा नकली नोट खपाने के लिए किसानों को निशाने पर रखा जाता है। बैंक में रकम जमा करने के मामले में किसानों का आंकड़ा बीस फीसदी से कम है। जिले के ज्यादातर किसान घरों में नकदी रखते हैं, जिस कारण से नकली नोट लंबे समय के लिए दब जाते हैं। काफी समय बाद पकड़ में आने पर किसान कहीं भी दावा करने की स्थिति में नहीं रहता है।


बैंक व पुलिस में समन्वय की जरूरत
बैंकों में नकली नोट पकड़ में आने के बाद उस नोट को नष्ट या लाल स्याही से रंग दिया जाता है। लेकिन, नकली नोट बैंक या ग्राहक के पास कहां से आया, इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। अगर पुलिस विभाग व बैंक के बीच समन्वय बनाया जाए, तो नकली नोट की केस हिस्ट्री बनाकर उस पर जांच की जा सकती है, जिससे नकली नोट खपाने वाले उजागर हो सकते हैं।
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