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बजाज फाइनेंस धोखाधड़ी : जांच बढ़ी तो 1.71 करोड़ से छह करोड़ पहुंची रकम

Thu, 17 Sep 2026 12:59 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2026 12:59 AM IST
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As the investigation intensified, the amount rose from 1.71 crore to 6 crore.
ललितपुर। बजाज फाइनेंस कंपनी से धोखाधड़ी के मामले में एसआईटी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, फर्जीवाड़े की रकम भी बढ़ती गई। शुरुआत में कंपनी को करीब 1.71 करोड़ रुपये की क्षति पहुंचाने का मुकदमा दर्ज हुआ था, लेकिन विस्तृत जांच और साक्ष्यों के संकलन के बाद पुलिस के सामने धोखाधड़ी की रकम करीब छह करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई है।
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मामले में एसआईटी ने अब तीन और आरोपियों ममता साहू, दिनेश कार्तिक और चंचल अहिरवार के खिलाफ सीजेएम न्यायालय में तीसरा पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है। पुलिस ने जांच जारी रखने की बात कही है।
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5 अगस्त 2025 को कोतवाली सदर में बजाज फाइनेंस कंपनी के असिस्टेंट मैनेजर संदीप सोलंकी की तहरीर पर महेंद्र बरार समेत सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप था कि कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों ने कंपनी को कुल 1,71,01,703 रुपये की क्षति पहुंचाई।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन एसपी मोहम्मद मुश्ताक ने सीओ सदर के नेतृत्व में जनपद स्तरीय एसआईटी गठित की थी। जांच में पुलिस ने मामले से जुड़े कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। जांच आगे बढ़ने पर फर्जीवाड़े के तरीके और इसमें शामिल लोगों की संख्या की परतें खुलती गईं।

पुराने स्टांप पेपर में बदल देते थे तारीख
एसआईटी की जांच में सामने आया कि आरोपी गिरोह बनाकर काम कर रहे थे। कूटरचित रजिस्ट्री प्रपत्र, पैन कार्ड, आधार कार्ड और नए बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज तैयार कर बजाज फाइनेंस से लोन कराया जाता था।
आरोपी स्टांप पेपर खरीदने के बाद उसके विवरण में छेड़छाड़ करते थे। जांच के मुताबिक वर्ष 2024 और 2025 के मूल स्टांप पेपरों पर वर्ष 2014 और 2015 की तारीख अंकित कर दी जाती थी, ताकि दस्तावेज पुराने प्रतीत हों और उनका ऑनलाइन सत्यापन न हो सके।

जांच बढ़ी तो सामने आते गए नए नाम
एसआईटी ने जांच के दौरान पहले सात आरोपियों के खिलाफ 3 नवंबर 2025 को पूरक आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद जांच जारी रही और साक्ष्य जुटाए गए। 29 जनवरी 2026 को पांच और आरोपियों के खिलाफ दूसरा पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया।
जांच का दायरा बढ़ने और दस्तावेजों एवं लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों के परीक्षण के दौरान पुलिस के सामने आया कि कंपनी के साथ हुई धोखाधड़ी की रकम शुरुआती मुकदमे में दर्ज 1.71 करोड़ रुपये से कहीं अधिक है। एसआईटी के मुताबिक यह रकम करीब छह करोड़ रुपये तक पहुंचती है।
इसी जांच में ममता साहू निवासी गांधीनगर नई बस्ती, दिनेश कार्तिक निवासी जालौन और चंचल अहिरवार निवासी नेहरू नगर के नाम सामने आए। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। जांच पूरी करने के बाद तीनों के खिलाफ तीसरा पूरक आरोपपत्र सीजेएम न्यायालय में दाखिल किया गया।

पत्रक चिपकाकर लोगों को देते थे लोन का लालच
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह में शामिल लोगों के काम अलग-अलग स्तर पर बंटे हुए थे। लोन दिलाने का लालच देने वाले पत्रक तैयार कराकर उन्हें अलग-अलग स्थानों पर चस्पा किया जाता था। लोन लेने के इच्छुक लोग संपर्क करते थे। इसके बाद उनकी फाइल तैयार कर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर लोन कराया जाता था। पुलिस के अनुसार रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेजों में भी कूटरचना की जाती थी। पुराने दस्तावेज दिखाने के लिए स्टांप पेपर की तारीख और अन्य विवरण बदल दिए जाते थे।

अब तक 16 आरोपियों के खिलाफ तीन पूरक आरोपपत्र
एसआईटी अब तक 16 आरोपियों के खिलाफ तीन पूरक आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। वर्ष 2025 में दाखिल पहले पूरक आरोपपत्र में राशिद, राशिदा, महेंद्र, करन, नवनीत, शमीम और शिवम के नाम थे।
29 जनवरी 2026 को दाखिल दूसरे पूरक आरोपपत्र में धीरेंद्र कुमार, महेंद्र राय, पारस वर्मा, अभिनव निगम और विकास दिवाकर को आरोपी बनाया गया था। वहीं 15 सितंबर 2026 को दाखिल तीसरे पूरक आरोपपत्र में ममता साहू, दिनेश कार्तिक और चंचल अहिरवार के नाम शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक ममता साहू और चंचल अहिरवार जेल में हैं, जबकि अन्य आरोपियों में से कई जमानत पर बाहर हैं।

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करोड़ों रुपये के इस धोखाधड़ी मामले की एसआईटी ने गहनता से जांच की है। तीन आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किए गए हैं। मामले की जांच अभी जारी है। - अजय कुमार, क्षेत्राधिकारी सदर
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