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रात होने से पहले ही बुझ जाते हैं अलाव

Thu, 12 Jan 2017 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 12 Jan 2017 01:00 AM IST
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Are extinguished before bonfire night
winter lalitpur news - फोटो : demo
सर्दी चरम पर पहुंच गई है। ऐसे में घर से बाहर रहने वालों के लिए अलाव ही सहारा है, पर शहर के प्रमुख चौराहों, सार्वजनिक स्थलों, जिला अस्पताल, बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन जैसे मुख्य स्थलों पर अलाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं नहीं हैं। इसके कारण लोग परेशान हैं। नगर पालिका ने करीब तीन लाख रुपये की स्वीकृति शहर के विभिन्न स्थानों पर अलाव की व्यवस्था कराने के लिए दी है, लेकिन यह अलाव केवल खानापूर्ति तक ही सीमित हैं। कई स्थानों पर गीली लकड़ियों और तो कही अपर्याप्त ईंधन की समस्या आ रही है।
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सोमवार से शहर में कड़ाके की ठंड पड़ने लगी है, शहर का तापमान नौ डिग्री के नीचे तक पहुंच गया है। रात के समय कोहरा और ओस की नमी ने लोगों ठिठुरने के लिए मजबूर कर दिया है। ऐसे में व्यापारियों, राहगीरों, बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन पर यात्रियों, टैक्सी व रिक्शा चालकों, बस स्टॉफ, रात की ड्यूटी करने वाले पुलिस व सुरक्षा कर्मियों व अन्य लोग जो देर रात तक और कुछ जो पूरी रात घरों से बाहर रहते हैं, उनके ऊपर यह ठंड बहुत बुरी बीत रही है। ऐसे में अलाव ही सबसे बड़ा सहारा है। नगर पालिका की मानें तो वह शहर में करीब 20 सार्वजनिक स्थलों पर अलाव की हर रोज व्यवस्था करा रही है।
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इसमें सुपर मार्केट, रैन बसेरा सदर कोतवाली के सामने, तुवन चौराहा, सिद्धी फार्मेसी के पास, श्रीवर्णी जैन चौराहा, कपिल गेस्ट हाउस, रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, आजाद चौक, मवेशी बाजार, कैलगुंवा तिराहा, चौकाबाग, कटरा बाजार, इलाईट चौराहा, नृसिंह मंदिर के पास, क्षेत्रपाल मंदिर के पास, कचहरी परिसर में केंटीन के पास, कचहरी परिसर में जिला बार सभागार कक्ष के पास और मुहल्ला अजीतापुरा आदि स्थान शामिल हैं और तहसील प्रशासन द्वारा वर्तमान में शहर में केवल रेलवे स्टेशन, जिला चिकित्सालय और वीर सावरकर चौक पर अलाव की व्यवस्था करा रही है, जिसमें भी नगर पालिका द्वारा सहयोग किया जाता है।
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दोनों ही विभागों द्वारा शहर के विभिन्न स्थलों पर अलाव की व्यवस्था कराई जा रही है, लेकिन अलाव के नाम पर केवल खान पूर्ति ही की जा रही है। अमर उजाला की टीम ने बीते मंगलवार की शहर के विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर अलाव की वास्तविक स्थिति देखी और लोगों से उनके हाल भी जाने। 

8.10 बजे: वीरसावरकर चौक
शहर के मुख्य बाजार में स्थित वीर सावकर चौक शहर का सबसे व्यस्त व प्रमुख चौराहा है। यहां पर देर रात करीब बाहर बजे तक आमजन की उपस्थिति रहती है। इसके बाद चौराहे पर पूरी रात करीब आधा दर्जन पुलिस व सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं और टैक्सी चालक भी स्टेशन के लिए यात्रियों का इंतजार करते रहते हैं। इस चौराहे पर तहसील प्रशासन अलाव की व्यवस्था करता है। रात करीब आठ बजकर 15 मिनिट पर जब यहां पहुंचे तो लकड़ियां पूरी तरह से गीली थीं और बहुत कम थीं, जो करीब दो घंटे तक के लिए ही पर्याप्त थी थी। स्थानीय व्यापारी हल्कूलाल जैन बताते हैं कि यहां लकड़ी शाम को साढ़े छह बजे के बाद उपलब्ध कराई जाती है और जो केवल दस बजे तक ही चलती है। वहीं लकड़ी गीली होने के कारण सही तरीके से जलती भी नहीं है।

8:20 : घंटाघर
शहर का हृदय स्थल कहलाने वाला घंटाघर परिसर पर अलावा की व्यवस्था नगर पालिका कराता है। यहीं पर नगर पालिका का स्वयं का कार्यालय स्थित है और सदर चौकी व सदर क्षेत्राधिकारी कार्यालय भी है। रात करीब 08 बजकर 20 मिनट पर यहां के अलाव की स्थिति देखी तो यहां केवल तीन खाली कुर्सी रखी हुईं थी, जो शायद पुलिस कर्मियों की होंगी। यहां पड़ी लकड़ियां पूरी तरह से गीली थी और ऐसा लग रहा था कि किसी ने उनको जलाने की काफी कोशिश की, लेकिन वह जल नहीं सकीं। घंटाघर पर पूरी रात पुलिस कर्मी गस्त करते हैं, जो अलाव के अभाव में ठिठुरने के मजबूर हैं।

8:30: बस अड्डा
शहर में इकलौता बस स्टैंड हैं, तो मुहल्ला घुसयाना में स्थित है। बस स्टैंड पर नगर पालिका ही अलाव की व्यवस्था करता है, लेकिन मंगलवार की रात जब साढ़े आठ बजे यहां के अलाव की स्थिति देखी तो सरकारी अलाव गायब था और कुछ स्थानीय व्यापारी बस क्लीनर लोग खुद ही किसी तरह से आग की व्यवस्था कर रहे थे। वहां बैठे सीताराम ने बताया जो झांसी बस पर क्लीनर का काम करता है, कि दो दिनों से नगर पालिका द्वारा अलाव के लिए लकड़ी की व्यवस्था नहीं कराई गई है। वैसे हर रोज शाम करीब साढ़े छह बजे तक लकड़ी उपलब्ध कराई जाती है, लेकिन लकड़ी गीली और कम मात्रा में ही रहती है। लकड़ी जलाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है और वह करीब नौ बजे तक पूरी खत्म भी हो जाती है।
-सीताराम
बस क्लीनर।

8:45 : श्रीवर्णी कॉलेज
रेलवे स्टेशन मार्ग पर स्थित श्रीवर्णी जैन चौराहे पर अलाव की व्यवस्था नगर पालिका करता है। रात करीब आठ बजकर पैंतालीस मिनट पर यहां बैठे दयालपाल बताते हैं कि प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई लकड़ियां गीली हैं, कड़ी मशक्कत के बाद जली, जो ज्यादा देर तक नहीं जल सकी। 


8:55 पर स्थानीय रेलवे स्टेशन के बाहर हालात
स्थानीय रेलवे स्टेशन पर पूरी रात हलचल रहती है। टैक्सी चालक और होटल व चाय की दुकान वाले रात भर जागते रहते हैं और पूरी रात करीब आधा दर्जन से अधिक पुलिस कर्मी व सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं। यहां पर तहसील प्रशासन व नगर पालिका दोनों ही अलाव की व्यवस्था करातें हैं, इसके बावजूद यहां पर लकड़ियां ग्यारह बजे के पहले की खत्म हो जाती है। इसके बाद टैक्सी चालक व होटल संचालक खुद ही आग की व्यवस्था करते हैं। टैक्सी चालक सीताराम ने बताया कि प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई लकड़ियां गीली होने के कारण सही से जलती नहीं है और यदि किसी तरह जल भी जाएं तो दस बजे तक खत्म हो जाती है।
-सीताराम
टैक्सी चालक
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