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टीबी रोगी खोज अभियान शुरू
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टीवी जागरूकता वैन को हरी झंडी दिखाते एडीएम लवकुश त्रिपाठी
- फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। राष्ट्रीय क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत सक्रिय क्षय रोगी खोज अभियान (एक्टिव टीबी केस फाइंडिग प्रोग्राम) का शुभारंभ सोमवार को कलक्ट्रेट परिसर में प्रभारी जिलाधिकारी लवकुश त्रिपाठी ने हरी झंडी दिखाकर किया।
टीबी रोगी खोज अभियान के अंतर्गत 29 फरवरी तक घर- घर जाकर टीबी के मरीज खोजे जाएंगे। ऐसे लोग जिन्हें 15 दिन से लगातार खांसी का आ रही है, 15 दिन से अधिक बुखार आ रहा है, छह महीने में कभी भी बलगम में खून का आ जाता है, एक महीने में कभी भी सीने में दर्द की शिकायत हो जाती है, वजन कम हो रहा है, पुराने टीबी के मरीज जिनको ऐसा कोई लक्षण है।
जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. जे एस बख्शी ने बताया कि एक टीबी रोगी एक वर्ष में आसपास के कम से कम पंद्रह लोगों को संक्रमित करता है। बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक का लक्ष्य तय किया है। संभावित मरीजों के बलगम के दो नमूने लेकर नजदीक के बलगम जांच केंद्र पर जांच कराई जाएगी। इसके बाद टीबी की पुष्टि होने पर रोगी को घर पर ही दवा उपलब्ध कराई जाएगी।
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अभियान के लिए कुल लक्षित आबादी 143500 है, जिसमें सभी ब्लॉकों व शहरी क्षेत्रों की 10 प्रतिशत आबादी शामिल की गई है। अभियान का उद्देश्य टीबी के मरीजों की जांच एवं पहचान कर इनका 48 घंटे के अंदर उपचार शुरू कराना है। इस दौरान एसीएफ टीम सदस्य, कलेक्ट्रेट और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी उपस्थित रहे।
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टीबी रोगी खोज अभियान के अंतर्गत 29 फरवरी तक घर- घर जाकर टीबी के मरीज खोजे जाएंगे। ऐसे लोग जिन्हें 15 दिन से लगातार खांसी का आ रही है, 15 दिन से अधिक बुखार आ रहा है, छह महीने में कभी भी बलगम में खून का आ जाता है, एक महीने में कभी भी सीने में दर्द की शिकायत हो जाती है, वजन कम हो रहा है, पुराने टीबी के मरीज जिनको ऐसा कोई लक्षण है।
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जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. जे एस बख्शी ने बताया कि एक टीबी रोगी एक वर्ष में आसपास के कम से कम पंद्रह लोगों को संक्रमित करता है। बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक का लक्ष्य तय किया है। संभावित मरीजों के बलगम के दो नमूने लेकर नजदीक के बलगम जांच केंद्र पर जांच कराई जाएगी। इसके बाद टीबी की पुष्टि होने पर रोगी को घर पर ही दवा उपलब्ध कराई जाएगी।
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अभियान के लिए कुल लक्षित आबादी 143500 है, जिसमें सभी ब्लॉकों व शहरी क्षेत्रों की 10 प्रतिशत आबादी शामिल की गई है। अभियान का उद्देश्य टीबी के मरीजों की जांच एवं पहचान कर इनका 48 घंटे के अंदर उपचार शुरू कराना है। इस दौरान एसीएफ टीम सदस्य, कलेक्ट्रेट और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी उपस्थित रहे।