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जिले की कई ग्राम पंचायतों की बागडोर अंगूठा टेक ग्राम प्रधानों के हाथों में
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ललितपुर। जिले के कई ग्राम पंचायतों की बागडोर निरक्षर ग्राम प्रधानों ने संभाल ली है। कुछ दिन पहले हुए चुनाव में क्षेत्रीय मतदाताओं ने इन प्रतिनिधियों पर अपना भरोसा जताया था। आज उन्होंने ऑनलाइन शपथ लेकर ग्राम पंचायत के सर्वांगीण विकास कराने की शपथ ली। जिले में कुल 26 प्रधान निरक्षर चुने गोए हैं।
पिछले दिनों त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया के अंतर्गत जनपद की 415 ग्राम पंचायतों के चुनाव हुए थे। इस दौरान कई महिला-पुरुषों ने अपना भाग्य आजमाया। जो चुनाव लड़ रहे थे, उनमें अनेक पढ़े लिखे लोग भी शामिल थे लेकिन क्षेत्रीय मतदाताओं ने निरक्षर प्रत्याशी को ही अपना मत देकर समर्थन दिया। इस कारण उन्हें जीत मिली। बुधवार को उन्होंने ऑनलाइन शपथ लेकर ग्राम पंचायत का कामकाज संभाल लिया। दिलचस्प बात यह है कि निरक्षर प्रधानों में अधिकांश आरक्षित कोटे के हैं। इनमें या तो वह अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की आरक्षित सीट से चुनकर आए हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों पर गौर करें तो विकासखंड जखौरा की 6, बिरधा की 5, महरौनी की 9, मड़ावरा की 6 ग्राम पंचायतें हैं, जहां निरक्षर प्रधान निर्वाचित हुए हैं। इस तरह जिले में कुल 26 प्रधान निरक्षर चुने गए हैं।
लेनी पड़ी ऑनलाइन शपथ, अब कैसे करेंगे काम
इंटरनेट के युग में निरक्षरता समाज का पीछा नहीं छोड़ रही है। आज भी कई लोग निरक्षरता का कलंक अपने माथे पर लिए हुए हैं। आज जब अधिकांश काम इंटरनेट के सहारे हो रहा है। कोरोना काल में प्रधानों को संक्रमण से बचने के लिए ऑनलाइन शपथ लेनी पड़ी है, ऐसे में निरक्षर जनप्रतिनिधि कैसे काम कर पाएंगे, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। कहीं न कहीं उन्हें किसी अन्य का सहारा लेना पड़ेगा।
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पिछले दिनों त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया के अंतर्गत जनपद की 415 ग्राम पंचायतों के चुनाव हुए थे। इस दौरान कई महिला-पुरुषों ने अपना भाग्य आजमाया। जो चुनाव लड़ रहे थे, उनमें अनेक पढ़े लिखे लोग भी शामिल थे लेकिन क्षेत्रीय मतदाताओं ने निरक्षर प्रत्याशी को ही अपना मत देकर समर्थन दिया। इस कारण उन्हें जीत मिली। बुधवार को उन्होंने ऑनलाइन शपथ लेकर ग्राम पंचायत का कामकाज संभाल लिया। दिलचस्प बात यह है कि निरक्षर प्रधानों में अधिकांश आरक्षित कोटे के हैं। इनमें या तो वह अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की आरक्षित सीट से चुनकर आए हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों पर गौर करें तो विकासखंड जखौरा की 6, बिरधा की 5, महरौनी की 9, मड़ावरा की 6 ग्राम पंचायतें हैं, जहां निरक्षर प्रधान निर्वाचित हुए हैं। इस तरह जिले में कुल 26 प्रधान निरक्षर चुने गए हैं।
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लेनी पड़ी ऑनलाइन शपथ, अब कैसे करेंगे काम
इंटरनेट के युग में निरक्षरता समाज का पीछा नहीं छोड़ रही है। आज भी कई लोग निरक्षरता का कलंक अपने माथे पर लिए हुए हैं। आज जब अधिकांश काम इंटरनेट के सहारे हो रहा है। कोरोना काल में प्रधानों को संक्रमण से बचने के लिए ऑनलाइन शपथ लेनी पड़ी है, ऐसे में निरक्षर जनप्रतिनिधि कैसे काम कर पाएंगे, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। कहीं न कहीं उन्हें किसी अन्य का सहारा लेना पड़ेगा।
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