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64 प्रतिशत महिलाओं में हीमोग्लोबिन की कमी, कैसे सुरक्षित रहे बचपन

Thu, 19 Aug 2021 01:26 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 19 Aug 2021 01:26 AM IST
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animia in 64 percent women in city
woman with baby.jpg - फोटो : woman with baby.jpg
ललितपुर। जिले की 64 फीसदी गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन (खून) सामान्य स्तर से कम है। अप्रैल से जुलाई तक 8831 महिलाओं की हीमोग्लोबिन की जांच की गई, जिसमें 5661 महिलाओं में सामान्य से कम पाया गया है। इसमें 549 महिलाओं में सात से भी कम पाया गया है।
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सुरक्षित प्रसव व शिशु मृत्युदर को कम करने के लिए भले ही तमाम योजनाएं संचालित की जा रही है। इसमें गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान टीकाकरण कर स्वास्थ्य की जांच की जाती है। इसमें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाता है और बचाव की जानकारी भी दी जाती है। लेकिन तमाम योजनाओं के बाद भी जिले में गर्भवती महिलाएं स्वस्थ नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड के अनुसार अप्रैल, मई, जून और जुलाई माह में 8831 गर्भवती महिलाओं की सेहत की जांच की गई। जिसमें 5661 महिलाओं में सामान्य से कम हीमोग्लोबिन पाया गया है। इस तरह 64 फीसदी महिलाओं में खून की कमी बनी हुई है। इसके साथ ही 549 महिलाओं में अधिक खून की गंभीर कमी पाई गई है। इस तरह छह फीसदी गर्भवती महिलाओं हाईरिस्क के लिए भी चिह्नित की गई है। इससे गर्भवती महिलाओं के लिए चल रही योजनाओं की हकीकत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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11.5 रहता है सामान्य हीमोग्लोबिन
सामान्य महिला के शरीर में 11.5 से 15 ग्राम प्रति डेसीलीटर रक्त होता है। खून की लगातार कमी के कारण अब 10 ग्राम डेसीलीटर तक रक्त की मात्रा को सामान्य मान लिया जा रहा है। इससे कम खतरनाक है। कई ऐसी महिलाएं आती हैं, जिनमें रक्त की मात्रा 10 ग्राम डेसीलीटर से भी कम मिली। कम हीमोग्लोबिन मां एवं गर्भ में पलने वाले के लिए भी घातक है।
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खून की कमी के कारण
- सामान्य तौर पर स्वास्थ्य रहने के लिए अच्छा खानपान जरूरी है। पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन युक्त खाना खाना चाहिए। शरीर में फॉलिक एसिड की कमी और विटामिन बी और आयरन की कमी से खून की कमी हो जाती है। महिलाएं संक्रमण होने भी एनीमिक हो जाती हैं।
गर्भावस्था में एनीमिया के दुष्परिणाम
- बच्चे का सही विकास न होना।
- समय से पूर्व प्रसव, शिशु की जान का खतरा।
- गर्भपात।
- प्रसव के बाद अधिक रक्तश्राव, जिससे मां को खतरा।
इस तरह बरतें सावधानी
- विशेषज्ञ चिकित्सक से उपचार लें।
- आयरन व अन्य गोली नियम से लें।
- गर्भावस्था के समय लोहे की कढ़ाई आदि में सब्जी पकाएं।
- प्रचुर मात्रा वाली सब्जी पालक आदि का सेवन अधिक करें।
हर नौ तारीख को करा सकते जांच
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत प्रत्येक माह की नौ तारीख को सभी सीएचसी व पीएसची पर गर्भवती महिलाओं की संपूर्ण जांच की जाती है। जिसमें गर्भवती महिलाएं जाकर जांच कराएं। जांच के बाद खून की कमी वाली महिलाओं को चिह्नित किया जाता है। साथ ही उपचार किया जाता है। बचाव की जानकारी दी जाती है। महिलाएं नौ तारीख को केंद्र पर पहुंच कर जांच कराएं।

फोटो- 02
महिलाओं में खून की कमी को पूरा करने के लिए आयरन की गोलियां दी जाती है। गर्भावस्था के दौरान मांग अधिक बढ़ जाती है। इसे पूरा करने के लिए नौ माह तक आयरन की गालियां खाना चाहिए।
- डॉ. गीतांजलि, स्त्री रोग विशेषज्ञ
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फोटो- 01
गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य की जांच कराएं। साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें। जिससे बच्चा को स्वस्थ रखा जा सके। नियमित आहार लें।
- डॉ. डीके बिजौरिया, जिला आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी
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