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बुंदेलखंड में एक और किसान की मौत
ब्यूरो
Updated Tue, 17 Nov 2015 01:39 AM IST
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ललितपुर। महरौनी तहसील के ग्राम खिरिया लटकनजू में एक किसान की सदमे से मौत हो गई। परिजनों के अनुसार किसान को फसल बर्बादी और और बेटी की शादी की चिंता थी।
ग्राम खिरिया लटकनजू निवासी बालचंद्र उर्फ सोनू ने बताया कि सोमवार की सुबह करीब छह बजे उसके पिता नाथूराम अहिरवार (55 वर्ष) खेत पर जाने की बात कहकर घर से निकले। करीब पौन घंटे बाद गांव के निवासी एक ग्रामीण ने उनको सूचना दी कि उसके पिता खेत में अचेत पड़े हुए हैं।
मौके पर जाकर नाथूराम को बेहोश अवस्था में देखा। इसपर उपचार के लिए महरौनी अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उनको मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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सोनू ने बताया कि उसके पिता के पास दो एकड़ जमीन थी। पिछली बार गेहूं की फसल व इस बार सोयाबीन व उर्द की फसल बर्बाद हो गई।
इस कारण से मजदूरी कर नाथूराम परिवार का पेट पाल रहा था। उसकी पांच लड़कियां हैं, जिनमें से चार की शादी हो चुकी है। आखिरी पुत्री की शादी के लिए वह काफी समय से परेशान था। उस पर किसान क्रेडिट कार्ड का साठ हजार रुपये व साहूकारों का करीब डेढ़ लाख रुपये का कर्ज है। परिजनों का कहना है कि इसी चिंता के कारण सदमे से उसकी मौत हो गई।
स्मरण रहे कि बुंदेलखंड में सूखे से फसल बर्बाद होने और कर्ज से तंग आकर इससे पहले भी 30 किसानों की मौत हो चुकी है।
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ग्राम खिरिया लटकनजू निवासी बालचंद्र उर्फ सोनू ने बताया कि सोमवार की सुबह करीब छह बजे उसके पिता नाथूराम अहिरवार (55 वर्ष) खेत पर जाने की बात कहकर घर से निकले। करीब पौन घंटे बाद गांव के निवासी एक ग्रामीण ने उनको सूचना दी कि उसके पिता खेत में अचेत पड़े हुए हैं।
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मौके पर जाकर नाथूराम को बेहोश अवस्था में देखा। इसपर उपचार के लिए महरौनी अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उनको मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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सोनू ने बताया कि उसके पिता के पास दो एकड़ जमीन थी। पिछली बार गेहूं की फसल व इस बार सोयाबीन व उर्द की फसल बर्बाद हो गई।
इस कारण से मजदूरी कर नाथूराम परिवार का पेट पाल रहा था। उसकी पांच लड़कियां हैं, जिनमें से चार की शादी हो चुकी है। आखिरी पुत्री की शादी के लिए वह काफी समय से परेशान था। उस पर किसान क्रेडिट कार्ड का साठ हजार रुपये व साहूकारों का करीब डेढ़ लाख रुपये का कर्ज है। परिजनों का कहना है कि इसी चिंता के कारण सदमे से उसकी मौत हो गई।
स्मरण रहे कि बुंदेलखंड में सूखे से फसल बर्बाद होने और कर्ज से तंग आकर इससे पहले भी 30 किसानों की मौत हो चुकी है।