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छुट्टा जानवरों की कब्रगाह बनती जा रही अमरपुर मंडी
Thu, 07 Mar 2019 01:26 AM IST
Pragyan dubey
lalitpur
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Published by: Pragyan dubey
Updated Thu, 07 Mar 2019 01:26 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। अमरपुर स्थित विशिष्ट मंडी स्थल छुट्टा जानवरों के लिए कब्रगाह बनता जा रहा है। यहां छुट्टा जानवरों की आए दिन मौत हो रही है। बुधवार को दो मृत पशुओं को जेसीबी की मदद से गड्ढा खोदकर मिट्टी में दफनाया गया। कई और जानवरों की स्थिति नाजुक बनी हुई है। जानवर क्यों मर रहे हैं, यह बड़ा सवाल है। हालांकि, अफसर जानवरों की आपस की लड़ाई बता रहे हैं। चूंकि, मृत जानवरों का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया है। ऐसे में यह कैसे पता चलेगा कि मौत का कारण क्या है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छुट्टा जानवरों की समस्या से निपटने के लिए जगह-जगह गोवंश आश्रय स्थलों का निर्माण कराया है। जिले में 14 गोवंश आश्रय स्थल निर्मित हुए हैं। इसके बाद भी जब समस्या गंभीर नजर आई तो उन्होंने गांव-गांव में अस्थाई गोवंश आश्रय स्थलों का निर्माण कराया। इस तरह ग्रामीण क्षेत्रों में 140 अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल बनाए गए। इनमें से एक निकटवर्ती ग्राम अमरपुर में अस्थाई आश्रय स्थल बनाया गया है। राजस्व कर्मियों के अनुसार अमरपुर मंडी में 2,400 छुट्टा जानवरों को रोका गया है, जबकि वास्तव में संख्या इससे कहीं अधिक है।
जानवरों को पीने के पानी के लिए अस्थाई छोटा तालाब बनाया गया है। जानवरों को खाने के लिए खुले आसमान के नीचे भूसा डाला जाता है। अमरपुर मंडी में रोके गए छुट्टा जानवरों के लिए टैंकर से भी पीने का पानी लाया जा रहा है। बुधवार को तीन जानवर मरने पर उन्हें दफना दिया गया। इनमें दो बछड़े व एक गाय थी। हालांकि, जानवरों की मौत के मामले में विभागीय अधिकारी अनभिज्ञता जाहिर कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने स्वीकारा कि कुछ जानवरों की मौत लड़ने से हो रही है। इसके बाद भी छुट्टा जानवरों की आए दिन मौत हो रही है।
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26776 छुट्टा गोवंश
इस समय पूरे जिले में कुल 26,776 गोवंशों को संरक्षित किया गया है। कई बार बड़े जानवर बछड़ा-बछियों को खाने से रोक देते हैं, जिससे वे कमजोर हो जाते हैं तो कुछ अंदरूनी चोट खाकर मर जाते हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एसके शाक्य ने बताया कि जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह को स्थिति से अवगत कराया गया है। इस पर उन्होंने बछड़ा-बछिया को अलग स्थान पर रखने के लिए कहा है। इससे स्थिति में बदलाव होने की संभावना जताई जा रही है। उधर, तहसीलदार सदर राजबहादुर ने बताया कि सौ क्विंटल भूसा अमरपुर मंडी में भेजा जा रहा है। भूसा की कोई कमी नहीं है।
अखिलेश ने किया था लोकार्पण
बुुंदेलखंड पैकेज के तहत ग्राम अमरपुर में 84.66 करोड़ रुपये से विशिष्ट मंडी का निर्माण कराया गया है। मंडी का लोकार्पण तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था, लेकिन इसमें दुकानों का आवंटन नहीं किया जा सका। इससे इस मंडी का उपयोग क्रय केंद्रों के संचालन व चुनाव के दौरान किया जाता है। वर्तमान में इसे अस्थाई गोआश्रय स्थल के रूप में तब्दील किया गया है।
आपस में लड़ रहे जानवर
अमरपुर मंडी में रोके गए जानवर आपस में लड़ रहे हैं। इससे बछड़ा-बछिया की मौत हो रही है। दस दिन पहले लड़ने से दो बछड़ों की मौत हो गई थी। यहां पर खाने व पीने की कोई समस्या नहीं है।
- राज बहादुर, तहसीलदार सदर
कराई जाएगी तार फेसिंग
बड़े जानवरों से बछड़ा-बछिया को बचाने के लिए तार फेसिंग कराने का निर्णय लिया गया है। इससे कि छोटे जानवरों को खाने व पीने की समस्या उत्पन्न न हो। इसमें डीएम ने निर्देश जारी किए हैं।
- डॉ. एसके शाक्य, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छुट्टा जानवरों की समस्या से निपटने के लिए जगह-जगह गोवंश आश्रय स्थलों का निर्माण कराया है। जिले में 14 गोवंश आश्रय स्थल निर्मित हुए हैं। इसके बाद भी जब समस्या गंभीर नजर आई तो उन्होंने गांव-गांव में अस्थाई गोवंश आश्रय स्थलों का निर्माण कराया। इस तरह ग्रामीण क्षेत्रों में 140 अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल बनाए गए। इनमें से एक निकटवर्ती ग्राम अमरपुर में अस्थाई आश्रय स्थल बनाया गया है। राजस्व कर्मियों के अनुसार अमरपुर मंडी में 2,400 छुट्टा जानवरों को रोका गया है, जबकि वास्तव में संख्या इससे कहीं अधिक है।
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जानवरों को पीने के पानी के लिए अस्थाई छोटा तालाब बनाया गया है। जानवरों को खाने के लिए खुले आसमान के नीचे भूसा डाला जाता है। अमरपुर मंडी में रोके गए छुट्टा जानवरों के लिए टैंकर से भी पीने का पानी लाया जा रहा है। बुधवार को तीन जानवर मरने पर उन्हें दफना दिया गया। इनमें दो बछड़े व एक गाय थी। हालांकि, जानवरों की मौत के मामले में विभागीय अधिकारी अनभिज्ञता जाहिर कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने स्वीकारा कि कुछ जानवरों की मौत लड़ने से हो रही है। इसके बाद भी छुट्टा जानवरों की आए दिन मौत हो रही है।
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26776 छुट्टा गोवंश
इस समय पूरे जिले में कुल 26,776 गोवंशों को संरक्षित किया गया है। कई बार बड़े जानवर बछड़ा-बछियों को खाने से रोक देते हैं, जिससे वे कमजोर हो जाते हैं तो कुछ अंदरूनी चोट खाकर मर जाते हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एसके शाक्य ने बताया कि जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह को स्थिति से अवगत कराया गया है। इस पर उन्होंने बछड़ा-बछिया को अलग स्थान पर रखने के लिए कहा है। इससे स्थिति में बदलाव होने की संभावना जताई जा रही है। उधर, तहसीलदार सदर राजबहादुर ने बताया कि सौ क्विंटल भूसा अमरपुर मंडी में भेजा जा रहा है। भूसा की कोई कमी नहीं है।
अखिलेश ने किया था लोकार्पण
बुुंदेलखंड पैकेज के तहत ग्राम अमरपुर में 84.66 करोड़ रुपये से विशिष्ट मंडी का निर्माण कराया गया है। मंडी का लोकार्पण तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था, लेकिन इसमें दुकानों का आवंटन नहीं किया जा सका। इससे इस मंडी का उपयोग क्रय केंद्रों के संचालन व चुनाव के दौरान किया जाता है। वर्तमान में इसे अस्थाई गोआश्रय स्थल के रूप में तब्दील किया गया है।
आपस में लड़ रहे जानवर
अमरपुर मंडी में रोके गए जानवर आपस में लड़ रहे हैं। इससे बछड़ा-बछिया की मौत हो रही है। दस दिन पहले लड़ने से दो बछड़ों की मौत हो गई थी। यहां पर खाने व पीने की कोई समस्या नहीं है।
- राज बहादुर, तहसीलदार सदर
कराई जाएगी तार फेसिंग
बड़े जानवरों से बछड़ा-बछिया को बचाने के लिए तार फेसिंग कराने का निर्णय लिया गया है। इससे कि छोटे जानवरों को खाने व पीने की समस्या उत्पन्न न हो। इसमें डीएम ने निर्देश जारी किए हैं।
- डॉ. एसके शाक्य, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी