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किताबी ज्ञान के साथ-साथ संस्कारों की शिक्षा भी जरुरी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Feb 2017 12:39 AM IST
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- फोटो : amar ujala, lalitpur news
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नेहरू महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना छात्रा इकाई द्वारा सात दिवसीय विशेष शिविर का आयोजन किया जा रहा था, जिसका समापन हो गया है। समापन समारोह का आयोजन स्थानीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय में किया गया।
बृहस्पतिवार को आयोजित एनएसएस के समापन समारोह की शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में आए कार्यवाहक प्राचार्य और संस्कृत विभागाध्यक्ष डा. ओमप्रकाश शास्त्री ने दीप प्रज्ज्वलित व मां सरस्वती का पूजन कर किया। इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान में पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में समाज में संस्कारों का क्षरण हो रहा है। ऐसे स्थिति में किताबी ज्ञान के साथ-साथ विद्यार्थियों को संस्कारों की भी शिक्षा दी जाना जरूरी है। एनएसएस के जरिये विद्यार्थियों में संस्कार, समाजसेवा व राष्ट्रहित की भावनाएं आती है, जिससे वह अपना जीवन भी उज्ज्वल बना सकें व देश की सेवा करने में योगदान दे सके। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने गीता में नारियों की सात शक्तियों का वर्णन करते हुए पुरुषों की अपेक्षा नारियों में सात शक्तियां होने की बात कही है, जो अपने साथ ही आदर्श समाज एवं राष्ट्र का निर्माण कर सकती हैं। इसी क्रम में कार्यक्रम अधिकारी डा.ऊषा पाठक ने सात दिवसीय विशेष शिविर की आख्या प्रस्तुत करते हुए कहा कि शिविर के माध्यम से सिर्फ छात्राओं को सीखने का मौका दिया गया है और उनके अंदर छिपी हुई प्रतिभा का विकास करने हेतु प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि शिविर में छात्राओं ने जो भी सीखा उसे आत्मसात जरुर करें तभी शिविर की सार्थकता साबित होगी। इसी क्रम में उन्होंने बताया कि इन सात दिवसीय शिविर में छात्राओं में शिविर के माध्यम से सेवाभाव जागृत कर चयनित स्थल हरदीला में श्रमदान, जल संरक्षण, टीकारण अभियान, जनसूचना अधिकारों की जानकारी, साफ सफाई, मतदाता जागरुकता, शिक्षा से संबंधित जानकारी लोगों को उपलब्ध कराई गई। वहीं हिन्दी प्रवक्ता डा.सुधाकर उपाध्याय ने अपने संबोधन में युवा शक्ति को अणु शक्ति के समान बाते हुए अपनी ताकत का उपयोग सकारात्मक एवं रचनात्मक दिशा में करने की बात कही है। इस अवसर पर छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। महाविद्यालय की ओर से एनएसएस इकाई की छात्राओं को पुरस्कृत भी किया गया। इस दौरान मुख्य रुप से डा.रिचा राज सक्सेना, दीपक पाठक, प्रीति सिरौठिया, वर्षा जैन, संतोष सिंह, अमित सोनी, अंजली भारतीय, फहीम बख्श, राजीव गोस्वामी, भगवती प्रसाद, संजय शर्मा, रमेश पाल, राकेश, कामता प्रसाद आदि उपस्थित रहे। वहीं कार्यक्रम का संचालन डा.सुधाकर उपाध्याय ने किया व कार्यक्रम अधिकारी डा.ऊषा पाठक ने सभी का आभार व्यक्त किया है।
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बृहस्पतिवार को आयोजित एनएसएस के समापन समारोह की शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में आए कार्यवाहक प्राचार्य और संस्कृत विभागाध्यक्ष डा. ओमप्रकाश शास्त्री ने दीप प्रज्ज्वलित व मां सरस्वती का पूजन कर किया। इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान में पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में समाज में संस्कारों का क्षरण हो रहा है। ऐसे स्थिति में किताबी ज्ञान के साथ-साथ विद्यार्थियों को संस्कारों की भी शिक्षा दी जाना जरूरी है। एनएसएस के जरिये विद्यार्थियों में संस्कार, समाजसेवा व राष्ट्रहित की भावनाएं आती है, जिससे वह अपना जीवन भी उज्ज्वल बना सकें व देश की सेवा करने में योगदान दे सके। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने गीता में नारियों की सात शक्तियों का वर्णन करते हुए पुरुषों की अपेक्षा नारियों में सात शक्तियां होने की बात कही है, जो अपने साथ ही आदर्श समाज एवं राष्ट्र का निर्माण कर सकती हैं। इसी क्रम में कार्यक्रम अधिकारी डा.ऊषा पाठक ने सात दिवसीय विशेष शिविर की आख्या प्रस्तुत करते हुए कहा कि शिविर के माध्यम से सिर्फ छात्राओं को सीखने का मौका दिया गया है और उनके अंदर छिपी हुई प्रतिभा का विकास करने हेतु प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि शिविर में छात्राओं ने जो भी सीखा उसे आत्मसात जरुर करें तभी शिविर की सार्थकता साबित होगी। इसी क्रम में उन्होंने बताया कि इन सात दिवसीय शिविर में छात्राओं में शिविर के माध्यम से सेवाभाव जागृत कर चयनित स्थल हरदीला में श्रमदान, जल संरक्षण, टीकारण अभियान, जनसूचना अधिकारों की जानकारी, साफ सफाई, मतदाता जागरुकता, शिक्षा से संबंधित जानकारी लोगों को उपलब्ध कराई गई। वहीं हिन्दी प्रवक्ता डा.सुधाकर उपाध्याय ने अपने संबोधन में युवा शक्ति को अणु शक्ति के समान बाते हुए अपनी ताकत का उपयोग सकारात्मक एवं रचनात्मक दिशा में करने की बात कही है। इस अवसर पर छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। महाविद्यालय की ओर से एनएसएस इकाई की छात्राओं को पुरस्कृत भी किया गया। इस दौरान मुख्य रुप से डा.रिचा राज सक्सेना, दीपक पाठक, प्रीति सिरौठिया, वर्षा जैन, संतोष सिंह, अमित सोनी, अंजली भारतीय, फहीम बख्श, राजीव गोस्वामी, भगवती प्रसाद, संजय शर्मा, रमेश पाल, राकेश, कामता प्रसाद आदि उपस्थित रहे। वहीं कार्यक्रम का संचालन डा.सुधाकर उपाध्याय ने किया व कार्यक्रम अधिकारी डा.ऊषा पाठक ने सभी का आभार व्यक्त किया है।
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