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किशोरियों को स्वस्थ रखेगी सरकार
Lalitpur
Updated Tue, 04 Feb 2014 02:52 PM IST
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ललितपुर। जनपद की 19 हजार से अधिक किशोरियों को इस वर्ष आयरन व डी वर्मिंग की गोलियां खिलाई जाएंगी। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य विभाग के लिए पांच लाख गोलियों की खरीद के लिए साढ़े तेरह लाख रुपये बजट जारी कर दिया है।
किशोरियों को स्वस्थ रखने के लिए वर्ष 2011-12 से महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से प्रदेश के 22 जनपदों में राजीव गांधी किशोरी बालिका सशक्तिकरण योजना संचालित की जा रही है, इसमें ललितपुर जनपद को भी शामिल किया गया है। इस योजना के तहत 10 से 19 वर्ष की स्कूल न जाने वाली किशोरियों को नियमित आयरन व डी वर्मिंग की गोलियां खिलाई जाती हैं, ताकि इनमें रक्तअल्पता को दूर करके उन्हें स्वस्थ रखा जा सके। चिह्नित किशोरियों को आईसीडीएस (इंट्रीग्रेटिड चिल्ड्रन डेवलपमेंट सर्विस) के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में आयरन व डी वर्मिंग की गोलियां खिलाई जाती हैं। आयरन फोलिक एसिड गोली सप्ताह में एक बार तथा डी वर्मिंग छह माह में दी जाती है। किशोरियों को गोलियां उपलब्ध कराने का जिम्मा एनआरएचएम के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग को सौंपा गया है। आईसीडीएस के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2013-14 में किशोरियों को गोलियों से आच्छादित करने की योजना तैयार कर ली है। इस वर्ष 10 से 19 वर्ष की आयु की 19 हजार से अधिक स्कूल न जाने वाली किशोरियों को चिन्हित किया गया है। जनपद में संचालित 378 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से नियमित गोलियां खिलाई जाएंगी। एनआरएचएम निदेशक ने चिन्हित किशोरियों के सापेक्ष पांच लाख से अधिक गोलियों की खरीद के लिए स्वास्थ्य विभाग को बजट जारी कर दिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. आरसी निरंजन का कहना है कि जारी की धनराशि से गोलियों की खरीद करके परियोजना अधिकारी आईसीडीएस को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि प्रत्येक किशोरी के लिए दवा उपलब्ध हो सके।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम भी लागू
ललितपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत जहां स्कूल न जाने वाली 10 से 19 वर्ष तक की किशोरियों को स्वस्थ रखने के लिए ‘सबला’ स्कीम संचालित हो रही है। वहीं, स्कूल में पढ़ने वाले 19 वर्ष तक के सभी बच्चों के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना चलाई जा रही है। वर्ष 2013-14 से इस कार्यक्रम को देश भर में संचालित करने का निर्णय लिया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों व स्कूलों में भ्रमण के लिए मेडिकल टीमों क ा चयन किया गया है। एनएनएम व आशा कार्यकत्रियों को नवजात शिशुओं में होने वाले रोगों को पहचानने के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
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किशोरियों को स्वस्थ रखने के लिए वर्ष 2011-12 से महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से प्रदेश के 22 जनपदों में राजीव गांधी किशोरी बालिका सशक्तिकरण योजना संचालित की जा रही है, इसमें ललितपुर जनपद को भी शामिल किया गया है। इस योजना के तहत 10 से 19 वर्ष की स्कूल न जाने वाली किशोरियों को नियमित आयरन व डी वर्मिंग की गोलियां खिलाई जाती हैं, ताकि इनमें रक्तअल्पता को दूर करके उन्हें स्वस्थ रखा जा सके। चिह्नित किशोरियों को आईसीडीएस (इंट्रीग्रेटिड चिल्ड्रन डेवलपमेंट सर्विस) के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में आयरन व डी वर्मिंग की गोलियां खिलाई जाती हैं। आयरन फोलिक एसिड गोली सप्ताह में एक बार तथा डी वर्मिंग छह माह में दी जाती है। किशोरियों को गोलियां उपलब्ध कराने का जिम्मा एनआरएचएम के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग को सौंपा गया है। आईसीडीएस के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2013-14 में किशोरियों को गोलियों से आच्छादित करने की योजना तैयार कर ली है। इस वर्ष 10 से 19 वर्ष की आयु की 19 हजार से अधिक स्कूल न जाने वाली किशोरियों को चिन्हित किया गया है। जनपद में संचालित 378 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से नियमित गोलियां खिलाई जाएंगी। एनआरएचएम निदेशक ने चिन्हित किशोरियों के सापेक्ष पांच लाख से अधिक गोलियों की खरीद के लिए स्वास्थ्य विभाग को बजट जारी कर दिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. आरसी निरंजन का कहना है कि जारी की धनराशि से गोलियों की खरीद करके परियोजना अधिकारी आईसीडीएस को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि प्रत्येक किशोरी के लिए दवा उपलब्ध हो सके।
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम भी लागू
ललितपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत जहां स्कूल न जाने वाली 10 से 19 वर्ष तक की किशोरियों को स्वस्थ रखने के लिए ‘सबला’ स्कीम संचालित हो रही है। वहीं, स्कूल में पढ़ने वाले 19 वर्ष तक के सभी बच्चों के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना चलाई जा रही है। वर्ष 2013-14 से इस कार्यक्रम को देश भर में संचालित करने का निर्णय लिया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों व स्कूलों में भ्रमण के लिए मेडिकल टीमों क ा चयन किया गया है। एनएनएम व आशा कार्यकत्रियों को नवजात शिशुओं में होने वाले रोगों को पहचानने के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
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