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धड़ल्ले से हो रही डग्गामारी
Lalitpur
Updated Wed, 22 Jan 2014 05:51 AM IST
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कुम्हैड़ी (ललितपुर)। कुम्हैड़ी मार्ग पर डग्गामार वाहनों की रेलमपेल है। वाहन चेकिंग का भी डग्गा मारों पर असर नहीं पड़ रहा है।
सुगम यातायात के लिए सहायक संभागीय परिवहन विभाग ने तमाम नियम कानून बना रखे हैं। सवारी वाहनों में निर्धारित संख्या में यात्रियों को बैठाने के साथ तय रूट पर ही वाहन चलाने के नियम हैं, बावजूद इसके नगरीय व ग्रामीण इलाकों की सड़कों पर खुलेआम इन नियमों की हर रोज धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। महरौनी स्थित कुम्हैड़ी मार्ग पर तो डग्गामार वाहनों का बोलबाला है। यहां जीप, आपे निर्धारित संख्या से कई गुना अधिक सवारियों को बैठाकर आवागमन करते हैं, जिससे यात्रियों की जान हर पल जोखिम में रहती है। विरोध करने पर वाहन चालक व संचालक यात्रियों के साथ अभद्रता करते हैं। परमिट के बाद भी समय से नहीं चलने वाली बसों के कारण डग्गामार वाहनों की मनमानी का लोगों को शिकार होना पड़ता है।
पुलिस की वाहन चेकिंग का भी इन पर असर नहीं पड़ता है। चेकिंग चालू होते ही वाहन चालक कुछ देर के लिए मौके से गायब हो जाते हैं। इसके बाद फिर से उनकी मनमानी प्रारंभ हो जाती है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। उनका कहना है कि मनमाना किराया देने के बाद भी उनको कठिनाई से सफर तय करना पड़ता है। आवागमन की इस समस्या की ओर प्रशासनिक अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए।
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सुगम यातायात के लिए सहायक संभागीय परिवहन विभाग ने तमाम नियम कानून बना रखे हैं। सवारी वाहनों में निर्धारित संख्या में यात्रियों को बैठाने के साथ तय रूट पर ही वाहन चलाने के नियम हैं, बावजूद इसके नगरीय व ग्रामीण इलाकों की सड़कों पर खुलेआम इन नियमों की हर रोज धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। महरौनी स्थित कुम्हैड़ी मार्ग पर तो डग्गामार वाहनों का बोलबाला है। यहां जीप, आपे निर्धारित संख्या से कई गुना अधिक सवारियों को बैठाकर आवागमन करते हैं, जिससे यात्रियों की जान हर पल जोखिम में रहती है। विरोध करने पर वाहन चालक व संचालक यात्रियों के साथ अभद्रता करते हैं। परमिट के बाद भी समय से नहीं चलने वाली बसों के कारण डग्गामार वाहनों की मनमानी का लोगों को शिकार होना पड़ता है।
पुलिस की वाहन चेकिंग का भी इन पर असर नहीं पड़ता है। चेकिंग चालू होते ही वाहन चालक कुछ देर के लिए मौके से गायब हो जाते हैं। इसके बाद फिर से उनकी मनमानी प्रारंभ हो जाती है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। उनका कहना है कि मनमाना किराया देने के बाद भी उनको कठिनाई से सफर तय करना पड़ता है। आवागमन की इस समस्या की ओर प्रशासनिक अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए।
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