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आखिरी दिन बाबा के दर पर जुटे जायरीन, आस्ताने पर मत्था टेक मांगी दुआएं

Wed, 04 Apr 2018 04:15 AM IST
Updated Wed, 04 Apr 2018 04:15 AM IST
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आखिरी दिन बाबा के दर पर जुटे जायरीन, आस्ताने पर मत्था टेक मांगी दुआएं
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आखिरी दिन बाबा के दर पर मांगी दुआएं
ललितपुर। कौमी एकता के प्रतीक हजरत बाबा सदन के दर पर चल रहे 100वें उर्स के चौथे व आखिरी दिन हजारों श्रद्धालुओं ने दर पर मत्था टेक बाबा से दुआएं मांगी। वहीं, विभिन्न संगठनों ने धूमधाम से बाबा के आस्ताने पर ‘नूरानी चादर’ पेश की।
जनपद के अलावा देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं ने बाबा की दरगाह पर हाजरी लगाई। बाबा सदन की दरगाह पर चादरें चढ़ाने का सिलसिला जारी बना रहा। विभिन्न संगठनों व राजनैतिक दलों द्वारा गाजे-बाजे के साथ चादरों की शोभायात्रा निकाली गई। करीब एक किमी के दायरे में फैले उर्स के आयोजन में बड़ी तादाद में उपभोक्ता सामग्री की दुकानें व मनोरंजन के संसाधन जुटे हुए हैं। वैसे तो दिन भर श्रद्घालुओं का दरगाह परिसर में तांता लगा रहता है किंतु शाम होते ही उर्स मेला परिसर में श्रद्घालुओं का बड़ा भारी जमघट शुरु हो गया। बाबा सदनशाह की दरगाह की खासियत यह है कि यहाँ जाति धर्म का विभेद समाप्त हो जाता। दरगाह पर कहीं मुस्लिम अपने धर्म के अनुसार बाबा का सजदा कर रहे थे तो कहीं हिन्दू तो कहीं सिख, ईसाई, जैन धर्मानुयाई उनकी पूजा करने में जुटे हुए थे। सायं से ही नगर में गाजे-बाजे के साथ बाबा सदनशाह की दरगाह पर चढने वाली चादरों की शोभायात्रा निकलना शुरु हो गया था। वहीं मेला के आखरी दिन खान-पान की मिष्ठान, सौन्दर्य सामग्री, खिलौने, घरेलू सामान व रेडीमेड गारमेंन्ट सहित अन्य सभी दुकानों पर मेला उतरते ही खरीददारों की काफी भीड़ देखने को मिली। मेला के अंतिम दिन लोगों ने खासतौर पर महिलाओं ने जमकर खरीदारी की है।
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आज होंगी इत्जिमाई शादियाँ
उर्स कमेटी के मीडिया प्रभारी मोहम्मद नसीमद व रिजवान उज्जमा ने संयुक्त रुप से जानकारी देते हुए बताया कि हजरत बाबा सदनशाह की दरगाह पर आज 54 जोड़े ेनिकाह के साक्षी बनेंगे। उक्त समारोह में शहर के अलावा अन्य जनपदों से आए जोड़े निकाह में बंधेगे। यहाँ पर मुस्लिम रीति रिवाज के अनुसार विवाह सम्पन्न होंगे।
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छोटा मजीद शोला की कव्वालियों ने बांधा समां
ललितपुर। महान सूफी संत हजरत बाबा सदनशाह रहमतउल्लाह अलैह की दरगाह पर चल रहे 100वें सालाना उर्स इजलास के चौथे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। नेताओं समेत हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा की दरगाह पर चादर चढ़ाकर मन्नतें मांगी। मशहूर फनकार हाजी छोटा मजीद शोला की कव्वालियों ने अपने फन का ऐसा जादू बिखेरा कि लोग झूमने पर मजबूर हो गए। हजारों की संख्या में श्रोता कव्वालियों का लुत्फ उठाते रहे।

बाबा सदनशाह रहमत उल्ला अलैह के उर्स के मौके पर परिसर में जारी कव्वालियों में इन दिनों खूब जमकर भीड़ उमड़ रही है। सोमवार की रात सजीं मशहूर फनकार हाजी छोटा मजीद शोला की महफिल सजी। उन्होंने रात से सुबह तक खुदा और नवी की शान व हुसैनी रंग से ख्वाजा को सुबह सलाम भेजा। रात से सुबह तक कव्वाल छोटा मजीद शोला समां बांधे रहे। सबसे पहले उन्होंने खुदा की शान में नात पढ़ी। इसी दौरान नवी के मर्तवा को बताते हुए नाते पाक ‘बहारो फूल बरसाओं मेरे सरकार आए है’ अब क्या जा अंधेरे तेरे जाने का वक्त है, अब आफताबे नूर के आने का वक्त है, ए आसमां के चांद सितारे उतर पड़ो, रसूल के आने का वक्त है बहारों फूल बरसाओं मेरे सरकार आए है।’ जिसको श्रोताओं ने मंत्रमुगध होकर सुना और नवी की शान में नारे लगाने शुरु कर दिए। इसी दौरान ख्वाजा गरीब नवाज का बुंलद दर्जा बताते हुए सुनाया ‘ये चिश्तिया नगरी भी रहमत का समंदर है रिंदो की नजर में मयखाना काबे के बराबर होता है, ख्वाजा की गली का हर फेरा हज के बराबर होता है। मदीना तो नहीं लेकिन मदीने की निशानी है दरे ख्वाजा, ये चिश्तिया नगरी भी रहमत का समंदर हैं। कोई तेरे दर से मायूस नहीं लौटा ख्वाजा हैदर की शिफअत वेशक ख्वाजा तेरे अंदर है। इसके बाद उन्होंने अपनी सबसे मशहूर ‘मेरा ख्वाजा महान, ख्वाजा का हिन्दुस्तान हैं...’ सुनाई तो लोग जमकर झूम उठे। मनकवत के बाद गजल का दौर शुरु हुआ, जिसका लोगों ने भरपूत लुत्फ उठाया। इससे पूर्व कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में पधारे सदर विधायक रामरतन कुशवाहा व सांसद प्रतिनिधि प्रदीप चौबे ने मंच से बाबा का यशगान किया। उन्होंने जनपद की कौमी एकता के कसीदे पढ़ते यूं ही माहौल हमेशा बनाए रखने का आह्वान किया। इस मौके पर कमिटि सदर बाबू बदरुद्दीन कुरैशी द्वारा मौजूद जनप्रतिनिधियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में संरक्षक सुजान सिंह बुन्देला, अंजुमन सदर असलम कुरैशी, सदर उर्स कमिटि बाबू बदरुद्दीन कुरैशी, जिला जज शिशिरकांत चौबे, पूर्व नपा अध्यक्ष डा.सतीश कुमार सुड़ेले, जनरल सेक्रेटरी हाजी साबिर अली, जनरल सेक्रेटरी अजीज कुरैशी, नायब सदर अब्दुल रहमान कल्ला, कमरुद्दीन कप्तान, रमजानी दादा, नायब सदर अबरार अली, मोहम्मद नसीम, रिजवान उज्जमा, मनीष अहमद कादरी, जहीर रानू पार्षद, नवाब बख्श, मुस्तफा खां पार्षद आदि मौजूद रहे।
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