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विभाग खुद बीमार, कैसे मिलेगा जिले को कुष्ठ से छुटकारा
Updated Wed, 21 Mar 2018 02:05 AM IST
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विभाग बीमार, कैैसे हो कुष्ठ रोग का उपचार
ललितपुर।
कुष्ठ रोग महकमा लंबे समय से कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। विभाग में जहां 20 कर्मचारी होना चाहिए, वहां केवल तीन कर्मचारी ही तैनात हैं। इससे विभाग के कामकाज की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
जिले को कुष्ठ रोग से छुटकारा दिलाने के उद्देश्य से विभाग काम कर रहा है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में जिले में 75 रोगी चिह्नित हुए हैं। लेकिन, इसके पर्यवेक्षण में कर्मचारियों की कमी खल रही है। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में स्वीकृत 15 के मुकाबले एक पद एनएमए (नॉन मेडिकल असिस्टेंट) का भरा हुआ है। एनएमएस (नॉन मेडिकल सुपरवाइजर) के स्वीकृत चार में से दो पद भरे हैं। स्वीकृत स्वास्थ्य शिक्षक का भी पद खाली चल रहा है। जिले में सात जगहों पर उपचार किया जा रहा है। इसमें विकास खंडों में स्थित सीएससी, पीएससी व जिला अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा उपचार किया जा रहा है।
यहां हैं तीन कर्मी तैनात
जनपद के कुष्ठ रोग विभाग में कुल 20 पद सृजित हैं जिसके सापेक्ष तीन कर्मचारी ही तैनात हैं। जिनमें दो एनएमएस (नॉन मेडीकल सुपरवाइजर) जिला कुष्ठ रोग कार्यालय में तैनात हैं। तो वही एक एनएमए ( नॉन मेडीकल असिस्टेंट) है जो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिरधा में तैनात हैं। वहीं, व्यवस्था बनाने के लिए पीएससी पर तैनात चिकित्सकों को इसका प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तालबेहट, बार, महरौनी, मड़ावरा केंद्रों पर तैनात किया गया है। इसी तरह दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिरधा व जखौरा के अधीक्षकों नेे कुष्ठ रोग के इलाज के लिए चिकित्सक तैनात किए हैं। जिला चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक ने भी एक चिकित्सक नियुक्त किया है।
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शासन को लिखा पत्र
रिक्त पदों को भरने को भरने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
डॉ. आरके सोनी, जिला कुष्ठ रोग अधिकारी
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ललितपुर।
कुष्ठ रोग महकमा लंबे समय से कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। विभाग में जहां 20 कर्मचारी होना चाहिए, वहां केवल तीन कर्मचारी ही तैनात हैं। इससे विभाग के कामकाज की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
जिले को कुष्ठ रोग से छुटकारा दिलाने के उद्देश्य से विभाग काम कर रहा है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में जिले में 75 रोगी चिह्नित हुए हैं। लेकिन, इसके पर्यवेक्षण में कर्मचारियों की कमी खल रही है। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में स्वीकृत 15 के मुकाबले एक पद एनएमए (नॉन मेडिकल असिस्टेंट) का भरा हुआ है। एनएमएस (नॉन मेडिकल सुपरवाइजर) के स्वीकृत चार में से दो पद भरे हैं। स्वीकृत स्वास्थ्य शिक्षक का भी पद खाली चल रहा है। जिले में सात जगहों पर उपचार किया जा रहा है। इसमें विकास खंडों में स्थित सीएससी, पीएससी व जिला अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा उपचार किया जा रहा है।
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यहां हैं तीन कर्मी तैनात
जनपद के कुष्ठ रोग विभाग में कुल 20 पद सृजित हैं जिसके सापेक्ष तीन कर्मचारी ही तैनात हैं। जिनमें दो एनएमएस (नॉन मेडीकल सुपरवाइजर) जिला कुष्ठ रोग कार्यालय में तैनात हैं। तो वही एक एनएमए ( नॉन मेडीकल असिस्टेंट) है जो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिरधा में तैनात हैं। वहीं, व्यवस्था बनाने के लिए पीएससी पर तैनात चिकित्सकों को इसका प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तालबेहट, बार, महरौनी, मड़ावरा केंद्रों पर तैनात किया गया है। इसी तरह दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिरधा व जखौरा के अधीक्षकों नेे कुष्ठ रोग के इलाज के लिए चिकित्सक तैनात किए हैं। जिला चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक ने भी एक चिकित्सक नियुक्त किया है।
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शासन को लिखा पत्र
रिक्त पदों को भरने को भरने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
डॉ. आरके सोनी, जिला कुष्ठ रोग अधिकारी