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नगर पालिका परिषद में निर्दलीयों का रहा दबदबा
Updated Sun, 29 Oct 2017 02:10 AM IST
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निर्दलीय बना था ललितपुर का पहला पालिका अध्यक्ष
सोशलिस्ट व कांग्रेसियों का भी रहा दबदबा
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
पहली नगर पालिका परिषद में ललितपुर की जनता ने निर्दलीय अध्यक्ष को मौका दिया था। इसके बाद सोशलिस्टों का दबदबा रहा, फिर कांग्रेसियों को अध्यक्ष बनने का मौका मिला। शुरूआती कई अध्यक्षों को तो पार्षदों के अविश्वास प्रस्ताव का भी सामना करना पड़ा, जिससे वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए।
शिवदयाल तिवारी पहली नगर पालिका परिषद के गठन के बाद वर्ष 1941 में अध्यक्ष चुने गए थे। उस दौरान शहर की आबादी करीब तैंतीस हजार के आसपास थी। पालिका के ग्यारह वार्डों में चुनाव हुआ था और दो पार्षद डा. नैनन व नन्हू कोरी नामित किए गए थे। पहले चुने हुए पार्षद अपना अध्यक्ष चुन लेते थे। इस तरह उन्हें पालिका में दो बार अध्यक्ष बनाए गए। इस दौरान उनकी कार्यप्रणाली काफी चर्चा में रही। इसके चलते पालिका में तीन संशोधन हुए। पहला वाकया तब सामने आया जब उनके समय में एक पार्षद का इस्तीफा हो गया था। पार्षद का आरोप था कि उसने इस्तीफा दिया ही नहीं है। नियमानुसार पार्षदों का इस्तीफा अध्यक्ष के माध्यम से स्वीकार किया जाता था। उनके कार्यकाल में एक पार्षद के इस्तीफे को लेकर इतना विवाद बढ़ा कि इसके पश्चात सरकार ने पार्षदों के इस्तीफे सीधे लेना शुरू कर दिए। इसी तरह मंडलायुक्त को पालिका में हस्तक्षेप करना का अधिकार था। उस दौरान पार्षदों ने उनके खिलाफ कई शिकायतें की थी। अध्यक्ष शिवदयाल तिवारी ने एसडीएम सहित डीएम को जांच करने से रोक दिया था। इसके बाद डीएम के पत्र को शासन ने संज्ञान में लेते हुए नगर पालिका परिषद के अधिनियम में संशोधन किया। इसमें कमिश्नर को अपने अधिकार जिलाधिकारी, एसडीएम को हस्तांतरित करने अनुमति प्रदान कर दी गई। एक और मामला काफी विवादित हुआ। इसमें अविश्वास प्रस्ताव की बैठक की अध्यक्षता करने का अधिकार पालिका अध्यक्ष के पास था। जिस समय उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया तो उन्होंने अध्यक्षता करते हुए अविश्वास प्रस्ताव की हवा निकाल दी। पार्षदों ने इसका विरोध किया तो इसमें संशोधन करते हुए ज्यूडिशियल आफीसर को अध्यक्षता करने का अधिकार दे दिया गया। पालिका अध्यक्ष से हटकर भी उनकी पहचान पहलवान के रूप में थी। वर्ष 1927 में उन्होंने कानपुर में यूपी फेम नट पंजाबी कुश्ती का खिताब जीता था। उन्होंने जिले में पहलवानों की लंबी फौज तैयार कर ली थी। उनका अट्ठाइस अगस्त वर्ष 1965 को देहावसान हो गया था।
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ये हैं सोशलिस्ट अध्यक्ष
डा. शादीलाल दुबे, हरिहरनारायण चौबे, डा. सतीश सुड़ेले, सुभाष जायसवाल, गुलाम मुहम्मद गामा।
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ये हैं कांग्रेसी
बृजनंदन किलेदार, बृजनंदन शर्मा, अशोक पटैरिया, जीवनधर लाल जैन
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अध्यक्ष कब से कब तक
शिवदयाल तिवारी नवंबर 1941 दिसंबर 1942
पुरूषोत्तम नारायण चौबे दिसंबर 1942 नवंबर 1947
बद्री नारायण चौबे नवंबर 1947 मार्च 1948
बृजनंदन किलेदार मार्च 1948 अगस्त 1950
हरदेव चौबे अगस्त 1950 जून 1951
शिवदयाल तिवारी जून 1951 जुलाई 1952
बद्रीनारायण चौबे जुलाई 1952 नवंबर 1953
बृजनंदन शर्मा नवंबर 1953 नवंबर 1957
डा. शादीलाल दुबे नवंबर 1957 दिसंबर 1958
मुहम्मद इस्माईल अप्रैल 1964 अगस्त 1964
कुंदनलाल सर्राफ अगस्त 1964 दिसंबर 1964
डा. शादीलाल दुबे दिसंबर 1964 मई 1966
राय सहाब रामदास राय मई 1966 नवंबर वर्ष 1967
गोकुल प्रसाद नवंबर 1967 मार्च 1968
हरिहर नारायण चौबे मार्च 1968 जून 1976
कुंदनलाल सर्राफ जुलाई 1977 अगस्त वर्ष 1977
डा. शादीलाल दुबे नवंबर 1988 जुलाई 1991
अशोक कुमार पटैरिया जुलाई 1991 अगस्त 1991
जीवनधर लाल जैन अगस्त 1991 फरवरी 1992
अशोक कुमार पटैरिया फरवरी 1992 दिसंबर 1993
गुलाम मुहम्मद गामा दिसंबर 1993
नीलम सिंह वर्मा दिसंबर 1995 दिसंबर 2000
डा. सतीश कुमार सुड़ेले दिसंबर 2000 ा दिसंबर 2005
संयुक्ता समद्दार प्रशासक दिसंबर 2005 मार्च 2006
एसएन दुबे प्रशासक अप्रैल 2006 नवंबर 2006
रमेश खटीक नवंबर 2006 दिसंबर 2011
अवनींद्र कुमार प्रशासक दिसंबर 2011 जुलाई 2012
सुभाष जायसवाल जुलाई 2012 अगस्त 2017 ग