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पहल: खेती में वैज्ञानिक तरीके आजमाएंगे कृषक
Updated Sun, 23 Jul 2017 01:30 AM IST
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खेती में वैज्ञानिक तरीके आजमाएंगे किसान
ललितपुर।
खेती में वैज्ञानिक तरीके अपनाने के लिए कृषकों को जागरूक किया जा रहा है। इसका जिम्मा कृषि विज्ञान केंद्र ने अपने कंधों पर ले लिया है। शुरुआती दौर में जिले के छह गांवों में इसकी पहल प्रारंभ हो गई है।
बुंदेलखंड में कृषकों की माली हालत बेहद खराब है। इसका कारण है कम पानी वाली फसल को करने से किसान कतराते हैं। ऐसा ही हाल वैज्ञानिक पद्धति को अपनाने के मामले में है। अधिकांश कृषक न तो मृदा परीक्षण कराते हैं और न ही फसलों की बुवाई में बदलाव करते हैं। इससे मृदा का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। इसका विपरीत प्रभाव फसल की पैदावार पर पड़ रहा है। इसे ध्यान में रखकर कृषि विज्ञान केंद्र ने जिले के ग्राम लड़वारी, वस्तगुवां, बम्होरीखड़ेत, जीरोन, ऐरावनी, नयागांव को गोद लिया है। केंद्र ने इन गांवों में करीब सौ कृषकों को दलहन व तिलहन का उत्तम किस्म का बीज नि:शुल्क बुवाई के लिए उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा केंद्र के वैज्ञानिक फसलों को रोगों से बचाने की जानकारी भी देते हैं। केंद्र के सह निदेशक एकेएस चौहान ने बताया कि सौ कृषकों को तिल और करीब 125 कृषकों को उड़द का नि:शुल्क बीज वितरित किया गया है। मिट्टी में सल्फर और बोरोन की कमी देखी जा रही है। इसकी पूर्ति के लिए जानकारी दी जाती है। सल्फर की कमी को जिप्सम डालकर पूरा किया जा सकता है।
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ललितपुर।
खेती में वैज्ञानिक तरीके अपनाने के लिए कृषकों को जागरूक किया जा रहा है। इसका जिम्मा कृषि विज्ञान केंद्र ने अपने कंधों पर ले लिया है। शुरुआती दौर में जिले के छह गांवों में इसकी पहल प्रारंभ हो गई है।
बुंदेलखंड में कृषकों की माली हालत बेहद खराब है। इसका कारण है कम पानी वाली फसल को करने से किसान कतराते हैं। ऐसा ही हाल वैज्ञानिक पद्धति को अपनाने के मामले में है। अधिकांश कृषक न तो मृदा परीक्षण कराते हैं और न ही फसलों की बुवाई में बदलाव करते हैं। इससे मृदा का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। इसका विपरीत प्रभाव फसल की पैदावार पर पड़ रहा है। इसे ध्यान में रखकर कृषि विज्ञान केंद्र ने जिले के ग्राम लड़वारी, वस्तगुवां, बम्होरीखड़ेत, जीरोन, ऐरावनी, नयागांव को गोद लिया है। केंद्र ने इन गांवों में करीब सौ कृषकों को दलहन व तिलहन का उत्तम किस्म का बीज नि:शुल्क बुवाई के लिए उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा केंद्र के वैज्ञानिक फसलों को रोगों से बचाने की जानकारी भी देते हैं। केंद्र के सह निदेशक एकेएस चौहान ने बताया कि सौ कृषकों को तिल और करीब 125 कृषकों को उड़द का नि:शुल्क बीज वितरित किया गया है। मिट्टी में सल्फर और बोरोन की कमी देखी जा रही है। इसकी पूर्ति के लिए जानकारी दी जाती है। सल्फर की कमी को जिप्सम डालकर पूरा किया जा सकता है।
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