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मौसम के बदले मिजाज से कृषक हैरान

Thu, 14 Dec 2017 01:13 AM IST
Updated Thu, 14 Dec 2017 01:13 AM IST
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मौसम के बदले मिजाज से कृषक हैरान
किसानों को ठिठुरन भरी सर्दी का इंतजार
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ललितपुर।
दिसंबर माह में कड़ाके की सर्दी नहीं पड़ने से कृषक चिंतित हैं, उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि मौसम के इस मिजाज के पीछे कारण क्या है? कृषकों का कहना है कि सर्दी कम पड़ने से जहां चना की फसल में इल्ली लग रही है तो वहीं, गेहूं की फसल की वृद्धि भी थम सी गई है। हालांकि, जिला कृषि अधिकारी का कहना है कि बीस तारीख से तापमान में गिरावट आने संभावना हैं।
गत वर्ष के मुकाबले इस बार जिले में औसत से लगभग 40 प्रतिशत कम बारिश हुई है, इसका असर सर्दी पर साफ देखा जा रहा है। गत वर्ष दिसंबर माह में कड़कड़ाती सर्दी पड़ने लगी थी जो इस समय गायब है। वर्तमान में दिसंबर का आधा महीना बीतने को है, लेकिन सर्दी अभी तक पूरे जोश पर नहीं पहुंच पाई है। दोपहर में कड़क धूप होने के चलते खेत की मिट्टी तेजी से सूख रही है। इससे फसल में बार-बार सिंचाई की आवश्यकता पड़ रही है। वहीं, चना की फसल में इल्ली का प्रकोप देखा जा रहा है। हालांकि, महरौनी व गौना क्षेत्र में चना व मटर की फसल कहीं-कहीं ठीक हालत में भी है। जिला कृषि अधिकारी एसएन चौधरी ने कई गांवों में फसल का जायजा लिया है।
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कृषकों की समस्या पर गंभीर नहीं अफसर
विकासखंड बिरधा क्षेत्र के कई गांवों में चना फसल में इल्ली देखी जा रही है। इसे विभागीय अफसर गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, जिससे कृषकों की समस्याएं कम होने की जगह बढ़ रही हैं।
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राजपाल
नगराध्यक्ष, भाकियू

इस समय चना में इल्ली का प्रकोप देखा जा रहा है। वहीं, अमरपुर माइनर से जुड़े कई गांवों में सिंचाई नहीं हो पाई है। यही स्थिति दैलवारा माइनर से जुड़े बख्तर गांव की है। रसोई माइनर के कृषक भी सिंचाई के लिए परेशान हैं। विभागीय अधिकारी सिंचाई में बिजली की समस्या बता रहे हैं।
केहर सिंह बुंदेला
प्रांतीय उपाध्यक्ष
भारतीय किसान संघ

कम हो सकती गेहूं की पैदावार
पृथ्वी का औसत तापमान लगभग 15 डिग्री सेल्सियस रहता था, जिसमें लगभग एक डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी हो गई है। इस वजह से सर्दी वाले दिनों की संख्या में कमी आई गई है। वहीं, गर्मी वाले दिनों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो गई है। इसका विपरीत असर सबसे ज्यादा रबी की फसलों पर पड़ रहा है। गेहूं की फसल की पैदावार के लिए दिसंबर माह में कम तापमान की आवश्यकता होती है जो अभी तापमान नहीं मिल पा रहा है, जिससे गेहूं की पैदावार कम होने की संभावना है। चना व मटर में इल्ली लगने के पीछे बढ़ा हुआ तापमान होना है। इसके अलावा प्रवासी पक्षियों के प्रजनन पर भी प्रभाव पड़ेगा।

डा. राजीव निरंजन
पर्यावरणविद

गेहूं की फसल हो रही प्रभावित
इस समय सर्दी कम पड़ रही है। इसका विपरीत प्रभाव गेहूं की फसल पर देखा जा रहा है। खेतों में खड़ी फसल की वृद्धि अचानक रुक गई है। वहीं, सिंचाई के दिन भी बढ़ गए हैं। जहां 21 व 45 दिन में सिंचाई होती थी अब उससे पहले कृषकों को सिंचाई करनी पड़ रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बीस दिसंबर के बाद तापमान में गिरावट आने की संभावना जताई जा रही है।
एसएन चौधरी
जिला कृषि अधिकारी
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