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कचहरी परिसर में सफाई नहीं, पेयजल, शौचालय भी नहीं
Updated Thu, 31 May 2018 02:16 AM IST
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कचहरी परिसर में सफाई नहीं, पेयजल, शौचालय भी नहीं
हैंडपंप खराब, प्याऊ खोले नहीं, अधिवक्ता, वादकारी परेशान
चैंबरों में कहीं शौचालय अधूरे, कहीं बंद, तो कहीं निजी उपयोग
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
प्रधानमंत्री द्वारा भले ही स्वच्छता अभियान पूरे देश में चलाया जा रहा हो और जिसे साकार करने के लिए खुद डीएम द्वारा जनपद में बीड़ा उठाकर सड़कों पर उतरकर झाड़ू लगाई जा रही हो, लेकिन डीएम कार्यालय के अंतर्गत चंद कदमों की दूरी पर ही कानून की पाठशाला कचहरी परिसर में ही जगह-जगह गंदगी फैली है, जहां महीनों से सफाई नहीं की गई है। हैंडपंपों खराब हैं तो इस बार पेयजल के लिए नगर पालिका या अन्य कोई सामाजिक संगठन भी यहां प्याऊ खुलवाने के लिए आगे नहीं आया है। वहीं अधिवक्ता चैंबरों में कहीं शौचालय अधूरे हैं तो कहीं बंद चल रहे हैं तो कहीं निजी उपयोग किया जा रहा है।
जनपद में स्वच्छता अभियान के अंतर्गत जहां नगर पालिका द्वारा हर गली और मुहल्लों में कूड़ों करकट के साथ ही रात्रि में भी सफाई कराई जा रही है और डीएम द्वारा भी खुद कई बार सुबह-सुबह सड़कों पर झाड़ू लेकर सफाई की गई है और शहरवासियों को भी सफाई के लिए प्रेरित किया गया। लेकिन जिलाधिकारी कार्यालय के अंतर्गत कचहरी प्रांगण में अधिवक्ताओं के लिए खोले गए ए, बी और सी अधिवक्ता चैंबर्स में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। लगता है यहां खासतौर पर तीसरी और चौथी मंजिल पर महीनों से सफाई नहीं हुई है। ए ब्लॉक के चैंबर्स के अधिवक्ताओं की सुविधा के लिए चौथी मंजिल पर बनाए गए शौचालय अब भी अधूरे पड़े हुए हैं, जिसका उपयोग यहां सिर्फ कूड़ा करकट फेंकने के लिए किया जा रहा है। इसी चैंबर्स में ग्राउंड फ्लोर से लेकर चौथी मंजिल तक हर ओर कूड़े का ढेर और जगह-जगह पानी की पीक से दीवारें रंगी हुई हैं। इसी प्रकार बी ब्लॉक में भी जगह-जगह गंदगी फैली हुई है। यहां तक कि यहां अधिवक्ताओं की सुविधा के लिए बनाए गए शौचालय का निजी उपयोग होने से अधिवक्ताओं को परेशान घूमना पड़ रहा है। यहां तक यहां आने वाले वादकारियों को खासकर महिलाओं के लिए शौचालय सुविधा नहीं होने से अधिक परेशान होना पड़ता है और ऐसे में कई बार महिलाओं को शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है। यही हाल सी ब्लॉक का भी है, जहां अधिवक्ताओं के लिए चैंबर्स के लिए शौचालय भी बनवाए गए हैं, लेकिन यहां शौचालयों में महीनों से सफाई भी नहीं की गई है, साथ ही यहां के शौचालयों में ताला भी जड़े हुए हैं। अधिवक्ता चैंबर्स के बाहर नालियों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिसकी महीनों से सफाई नहीं होना बताया जा रहा है।
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सफाई नहीं, शौचालय, पेयजल के बिना बढ़ी परेशानी
कचहरी परिसर में नियमित सफाई व्यवस्था नहीं होने से गंदगी फैलती जा रही है। अधिवक्ताओं को कई बार खुद ही अपने चैंबर्स व बस्तों पर सफाई करानी होती है। गंदगी फैलने से बीमारियों को खतरा बढ़ता जा रहा है। यहां शौचालय भी अधूरे पड़े हैं और पेयजल के लिए इस बार न तो नगर पालिका ही आगे आई है और न ही कोई सामाजिक संगठन, जिससे यहां अधिवक्ताओं और वादकारियों को अधिक परेशान होना पड़ रहा है।
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पवन तिवारी, अधिवक्ता।
कचरा फैलने से बीमारियों का खतरा
अधिवक्ता चैंबर्स परिसर में और चैंबर्स के बाहर अधिवक्ताओं के बस्तों के आसपास नालियों को खूब गंदगी फैल रही है। जिससे यहां अधिवक्ताओं और वादकारियों को बीमारी का खतरा बढ़ता रहा है। सफाई के नाम पर सिर्फ छलावा किया है। पेयजल और शौचालय सुविधा नहीं होने से महिला वादकारियों को सबसे अधिक परेशान होना पड़ता है।
त्रिलोकी नाथ कटारे, अधिवक्ता।
कलक्ट्रेट कार्यालय वसूलता 400 रुपये, सफाई नहीं
सभी अधिवक्ता चैंबर्स और कहचरी परिसर कलक्ट्रेट डीएम कार्यालय के अंतर्गत आता है। कलक्ट्रेट डीएम कार्यालय 400 रुपये प्रति चैंबर्स वार्षिक शुल्क वसूलता है। लेकिन साफ-सफाई, पयेजल, शौचालय का कोई स्थायी समाधान नहीं है। इसके लिए कई बार जिलाधिकारी को पत्र लिखकर नियमित सफाई की मांग की गई है।
कांशीराम कुशवाहा, अध्यक्ष, शंभूदयाल शर्मा, महामंत्री जिला बार ऐसासिऐशन।
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हैंडपंप खराब, प्याऊ खोले नहीं, अधिवक्ता, वादकारी परेशान
चैंबरों में कहीं शौचालय अधूरे, कहीं बंद, तो कहीं निजी उपयोग
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
प्रधानमंत्री द्वारा भले ही स्वच्छता अभियान पूरे देश में चलाया जा रहा हो और जिसे साकार करने के लिए खुद डीएम द्वारा जनपद में बीड़ा उठाकर सड़कों पर उतरकर झाड़ू लगाई जा रही हो, लेकिन डीएम कार्यालय के अंतर्गत चंद कदमों की दूरी पर ही कानून की पाठशाला कचहरी परिसर में ही जगह-जगह गंदगी फैली है, जहां महीनों से सफाई नहीं की गई है। हैंडपंपों खराब हैं तो इस बार पेयजल के लिए नगर पालिका या अन्य कोई सामाजिक संगठन भी यहां प्याऊ खुलवाने के लिए आगे नहीं आया है। वहीं अधिवक्ता चैंबरों में कहीं शौचालय अधूरे हैं तो कहीं बंद चल रहे हैं तो कहीं निजी उपयोग किया जा रहा है।
जनपद में स्वच्छता अभियान के अंतर्गत जहां नगर पालिका द्वारा हर गली और मुहल्लों में कूड़ों करकट के साथ ही रात्रि में भी सफाई कराई जा रही है और डीएम द्वारा भी खुद कई बार सुबह-सुबह सड़कों पर झाड़ू लेकर सफाई की गई है और शहरवासियों को भी सफाई के लिए प्रेरित किया गया। लेकिन जिलाधिकारी कार्यालय के अंतर्गत कचहरी प्रांगण में अधिवक्ताओं के लिए खोले गए ए, बी और सी अधिवक्ता चैंबर्स में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। लगता है यहां खासतौर पर तीसरी और चौथी मंजिल पर महीनों से सफाई नहीं हुई है। ए ब्लॉक के चैंबर्स के अधिवक्ताओं की सुविधा के लिए चौथी मंजिल पर बनाए गए शौचालय अब भी अधूरे पड़े हुए हैं, जिसका उपयोग यहां सिर्फ कूड़ा करकट फेंकने के लिए किया जा रहा है। इसी चैंबर्स में ग्राउंड फ्लोर से लेकर चौथी मंजिल तक हर ओर कूड़े का ढेर और जगह-जगह पानी की पीक से दीवारें रंगी हुई हैं। इसी प्रकार बी ब्लॉक में भी जगह-जगह गंदगी फैली हुई है। यहां तक कि यहां अधिवक्ताओं की सुविधा के लिए बनाए गए शौचालय का निजी उपयोग होने से अधिवक्ताओं को परेशान घूमना पड़ रहा है। यहां तक यहां आने वाले वादकारियों को खासकर महिलाओं के लिए शौचालय सुविधा नहीं होने से अधिक परेशान होना पड़ता है और ऐसे में कई बार महिलाओं को शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है। यही हाल सी ब्लॉक का भी है, जहां अधिवक्ताओं के लिए चैंबर्स के लिए शौचालय भी बनवाए गए हैं, लेकिन यहां शौचालयों में महीनों से सफाई भी नहीं की गई है, साथ ही यहां के शौचालयों में ताला भी जड़े हुए हैं। अधिवक्ता चैंबर्स के बाहर नालियों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिसकी महीनों से सफाई नहीं होना बताया जा रहा है।
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सफाई नहीं, शौचालय, पेयजल के बिना बढ़ी परेशानी
कचहरी परिसर में नियमित सफाई व्यवस्था नहीं होने से गंदगी फैलती जा रही है। अधिवक्ताओं को कई बार खुद ही अपने चैंबर्स व बस्तों पर सफाई करानी होती है। गंदगी फैलने से बीमारियों को खतरा बढ़ता जा रहा है। यहां शौचालय भी अधूरे पड़े हैं और पेयजल के लिए इस बार न तो नगर पालिका ही आगे आई है और न ही कोई सामाजिक संगठन, जिससे यहां अधिवक्ताओं और वादकारियों को अधिक परेशान होना पड़ रहा है।
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पवन तिवारी, अधिवक्ता।
कचरा फैलने से बीमारियों का खतरा
अधिवक्ता चैंबर्स परिसर में और चैंबर्स के बाहर अधिवक्ताओं के बस्तों के आसपास नालियों को खूब गंदगी फैल रही है। जिससे यहां अधिवक्ताओं और वादकारियों को बीमारी का खतरा बढ़ता रहा है। सफाई के नाम पर सिर्फ छलावा किया है। पेयजल और शौचालय सुविधा नहीं होने से महिला वादकारियों को सबसे अधिक परेशान होना पड़ता है।
त्रिलोकी नाथ कटारे, अधिवक्ता।
कलक्ट्रेट कार्यालय वसूलता 400 रुपये, सफाई नहीं
सभी अधिवक्ता चैंबर्स और कहचरी परिसर कलक्ट्रेट डीएम कार्यालय के अंतर्गत आता है। कलक्ट्रेट डीएम कार्यालय 400 रुपये प्रति चैंबर्स वार्षिक शुल्क वसूलता है। लेकिन साफ-सफाई, पयेजल, शौचालय का कोई स्थायी समाधान नहीं है। इसके लिए कई बार जिलाधिकारी को पत्र लिखकर नियमित सफाई की मांग की गई है।
कांशीराम कुशवाहा, अध्यक्ष, शंभूदयाल शर्मा, महामंत्री जिला बार ऐसासिऐशन।