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बाजार में रौनक नहीं आने से दुकानदारों में बेचैनी
Updated Wed, 28 Feb 2018 03:36 AM IST
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होली पर बाजार बेरौनक, दुकानदारों में बेचैनी
ललितपुर। होली के त्योहार पर भले ही रंग, अबीर-गुलाल व पिचकारी की दुकानें सज गई हों, लेकिन अभी बाजार में रौनक नहीं आई है। दुकानदारी की धीमी शुरुआत से दुकानदारों में बेचैनी देखी जा रही है। हालांकि, उन्हें एक दो दिन में बाजार के गति पकड़ने की उम्मीद है।
घंटाघर सहित विभिन्न बाजारों में रंग, अबीर-गुलाल एवं पिचकारियों की दुकानें लगने लगीं हैं। रासायनिक रंगों की भी बाजार में भरमार है। कई स्थानों पर हर्बल रंगों की पैकिंग में रसायनिक रंग भी दिखाई दे रहे हैं। कुछ लोग इससे जागरूक होकर हर्बल रंगों की मांग भी कर रहे हैं। बाजारों में अभी भीड़ नजर नहीं आ रही है। अबीर गुलाल की दुकानों पर इक्का दुक्का लोग ही दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, किराने की दुुकानों पर मेवा की बिक्री भी ठीकठाक ही देखी जा रही है। घरों में पर्व के आते ही पकवान बनाने का काम शुरू हो जाता है। चिप्स व पापड़ भी बनाए जाते हैं, इससे बाजार में मेवा व किराने की मांग बढ़ी है। युवाओं में भी होली के प्रति उत्साह देखने को मिल रहा है।
ऐसे बनाए जाते थे हर्बल रंग
पीला रंग बनाने के लिए मुल्तानी मिट्टी में हल्दी या कसूरी हल्दी मिलाई जाती है। इसमें सुगंध लाने के लिए गेंदे के फूल पीसकर मिलाया जाता है। लाल रंग के लिए अनार के छिलके गुलाब के फूल की पंखुड़ियां आटे में मिलाकर बनाई जाती हैं। इसमें लाल चंदन का भी उपयोग होता है। काले रंग के लिए काले अंगूर के बीज, तो जामुनी रंग चुकंदर पीसकर बनाया जाता है।
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फूलों की होली के लद गए दिन
बीते वर्षों में फूलों से होली खेली जाती थी, लेकिन चकाचौंध के दौर में फूलों की जगह अबीर व रासायनिक रंगों ने ले ली है। इसका विपरीत असर त्योहार पर पड़ा है। रासायनिक रंगों से शरीर पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव से तमाम लोग होली खेलने से परहेज करने लगे हैं।
सोशल साइट्स पर चढ़ा होली का रंग
होली का रंग सोशल साइट्स पर चढ़ गया है। वाट्सऐप एवं फेसबुक पर होली से संबंधित मेसेज छाने लगे हैं। होली से पहले ही सोशल साइट्स और मेसेज पर बधाइयों का दौर शुरू हो गया है। वहीं, युवाओं ने होली पर धमाल मचाने के लिए होली के गीतों को गुनगुनाने लगे हैं। सोशल साइट्स और मेसेज भी इससे अछूते नहीं हैं। फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्स एप समेत कई सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी लोग एक दूसरे को बधाई संदेश भेज रहे हैं।
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ललितपुर। होली के त्योहार पर भले ही रंग, अबीर-गुलाल व पिचकारी की दुकानें सज गई हों, लेकिन अभी बाजार में रौनक नहीं आई है। दुकानदारी की धीमी शुरुआत से दुकानदारों में बेचैनी देखी जा रही है। हालांकि, उन्हें एक दो दिन में बाजार के गति पकड़ने की उम्मीद है।
घंटाघर सहित विभिन्न बाजारों में रंग, अबीर-गुलाल एवं पिचकारियों की दुकानें लगने लगीं हैं। रासायनिक रंगों की भी बाजार में भरमार है। कई स्थानों पर हर्बल रंगों की पैकिंग में रसायनिक रंग भी दिखाई दे रहे हैं। कुछ लोग इससे जागरूक होकर हर्बल रंगों की मांग भी कर रहे हैं। बाजारों में अभी भीड़ नजर नहीं आ रही है। अबीर गुलाल की दुकानों पर इक्का दुक्का लोग ही दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, किराने की दुुकानों पर मेवा की बिक्री भी ठीकठाक ही देखी जा रही है। घरों में पर्व के आते ही पकवान बनाने का काम शुरू हो जाता है। चिप्स व पापड़ भी बनाए जाते हैं, इससे बाजार में मेवा व किराने की मांग बढ़ी है। युवाओं में भी होली के प्रति उत्साह देखने को मिल रहा है।
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ऐसे बनाए जाते थे हर्बल रंग
पीला रंग बनाने के लिए मुल्तानी मिट्टी में हल्दी या कसूरी हल्दी मिलाई जाती है। इसमें सुगंध लाने के लिए गेंदे के फूल पीसकर मिलाया जाता है। लाल रंग के लिए अनार के छिलके गुलाब के फूल की पंखुड़ियां आटे में मिलाकर बनाई जाती हैं। इसमें लाल चंदन का भी उपयोग होता है। काले रंग के लिए काले अंगूर के बीज, तो जामुनी रंग चुकंदर पीसकर बनाया जाता है।
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फूलों की होली के लद गए दिन
बीते वर्षों में फूलों से होली खेली जाती थी, लेकिन चकाचौंध के दौर में फूलों की जगह अबीर व रासायनिक रंगों ने ले ली है। इसका विपरीत असर त्योहार पर पड़ा है। रासायनिक रंगों से शरीर पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव से तमाम लोग होली खेलने से परहेज करने लगे हैं।
सोशल साइट्स पर चढ़ा होली का रंग
होली का रंग सोशल साइट्स पर चढ़ गया है। वाट्सऐप एवं फेसबुक पर होली से संबंधित मेसेज छाने लगे हैं। होली से पहले ही सोशल साइट्स और मेसेज पर बधाइयों का दौर शुरू हो गया है। वहीं, युवाओं ने होली पर धमाल मचाने के लिए होली के गीतों को गुनगुनाने लगे हैं। सोशल साइट्स और मेसेज भी इससे अछूते नहीं हैं। फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्स एप समेत कई सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी लोग एक दूसरे को बधाई संदेश भेज रहे हैं।