महरौनी पेज सिलावन

Jhansi Bureau Updated Thu, 07 Dec 2017 01:58 AM IST
चुनौतीभरा होगा नये अध्यक्ष का कार्यकाल
सिलावन। निकाय चुनाव के परिणाम घोषित हो चुके हैं। नवनिर्वाचित अध्यक्ष कृष्णा सिंह को चुनौतियों से जूझना होगा। कस्बा महरौनी में कई समस्याएं वर्षों से अपना मुंह बाएं खड़ी हैं। चाहे वह नगर की सुंदरता में बाधक अतिक्रमण हो, नगर का हृदयस्थली कहे जाने नयनसुख तालाब हो या फिर स्थायी बस स्टैंड और गोशाला का निर्माण कराना हो। नगर पंचायत सीमांकन भी एक प्रमुख समस्या बनकर उभर रही हैं। इसके अलावा सरकारी योजनाओं का पारदर्शी तरीके से क्रियान्वयन कराना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
यूं तो नवनिर्वाचित अध्यक्ष कृष्णा सिंह के पास अपार अनुभव है। पूर्व में ब्लाक प्रमुख के पद पर आसीन रहने के बाद वर्ष 2012 से 2017 तक नगर पंचायत अध्यक्ष के पद को सुशोभित करते हुए महरौनी के विकास में अपना योगदान दिया। महरौनी की जनता ने उन्हें एक बार फिर से नगर पंचायत का अध्यक्ष चुना है, लेकिन नगर के मुख्य बाजार में बढ़ता अतिक्रमण, नयनसुख तालाब का अपेक्षित कायाकल्प नहीं होना, स्थायी बस स्टैंड की कमी, नगर की सीमा का विस्तार में हो रही देरी, अन्ना पशुओं की समस्या सहित कई ऐसी समस्या हैं, जो नए अध्यक्ष की कार्य कुशलता की परीक्षा लेगी।
नगर की हृदय स्थली कहे जाने वाले नयनसुख तालाब को सुधारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं। तालाब से उठ रहीं दुर्गंध से आसपास रहने वाले लोगों का रहना तो दूभर कर ही रही हैं साथ इससे कस्बे का स्वरूप भी बिगड़ता जा रहा हैं। ऐसे में नवनिर्वाचित अध्यक्ष के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह तालाब की गंदगी साफ करवाकर उसके पुराने स्वरूप को वापस लाकर तालाब को आकर्षण का केंद्र बनाए और नागरिकों की उम्मीदों पर खरा उतरे, लेकिन उनके लिए यह किसी चुनौती से कम नहीं हैं। कस्बे के मुख्य बाजार में फैले अतिक्रमण को हटाना प्रशासन के लिए चुनौती है। कई प्रयासों के बाद यहां के प्रशासनिक अधिकारी न तो अतिक्रमण को हटवा सके हैं और न ही नगर पंचायत ने इस अतिक्रमण को खत्म करने के लिए कोई ठोस कार्रवाई की है। इसकी वजह भी नए अध्यक्ष सहित नागरिकों को पता है कि क्यों यहां का अतिक्रमण नहीं हट सका है। उनके लिए यह चुनौती से कम नहीं है। यही अतिक्रमण कस्बे की सुंदरता में दाग का काम कर रहा है। अतिक्रमण के चलते वाहन चालकों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना हर पल जाम की स्थिति बनती हैं।
कस्बे में बस स्टैंड नहीं होने से यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं। बस चालक कहीं पर भी बस खड़ी कर देते हैं, इससे राह चालकों के साथ यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। नवनिर्वाचित अध्यक्ष के गत कार्यकाल के दौरान भी नागरिकों ने स्थायी बस स्टैंड की मांग को जोर शोर से उठाया था। इस बार नागरिकों को उम्मीद है कि इन पांच वर्षों में निश्चित ही स्थायी बस स्टैंड कस्बे को मिल जाएगा। नगर पंचायत महरौनी का सीमा विस्तार का मामला भी नवनिर्वाचित अध्यक्ष के लिए कठिन चुनौती पेश करेगा। जैसे जैसे समय बढ़ता गया। नगर की आबादी भी बढ़ती गई इससे नगर में कई मोहल्लों का जन्म हुआ, लेकिन नगर पंचायत की सीमा का विस्तार नहीं होनें से इन मोहल्लों में निवास करने वाले नागरिक नगर पंचायत की ओर से मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहते हैं। इस बार लोगों ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष को नगर पंचायत सीमा के विस्तार के लिए अपना बहुमत दिया है।

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