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350 हैंडपंप खराब पड़े, पानी की समस्या से जूझ रहे लोग
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ललितपुर। नगर पालिका परिषद में विकास कार्य ही नहीं शहरवासी पेयजल समस्या से भी जूझ रहे हैं। नगर के 26 वार्डों में पेयजल सुविधा को लगभग डेढ़ हजार हैंडपंप लगे हैं, इनमें 350 हैंडपंप खराब पड़े हैं। इसकी विभाग को जानकारी तक नहीं है। विभागीय दस्तावेजों में मात्र 70 हैंडपंप खराब हैं, जबकि धरातल पर हकीकत कुछ और है। अब तो इन हैंडपंपों की मरम्मत हो भी कैसे, जब मरम्मत का टेंडर ही आचार संहिता के फेर में फंस गया हो, ऐसे में शहर के लोगों को दो माह और हैंडपंप ठीक होने के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
शहर में अब तक कई वार्डों पेयजल की सुविधा को पाइपलाइन नहीं डल पाई है। इनमें नेहरूनगर का कुछ क्षेत्र, जुगपुरा, घुसयाना, पिसनारी आदि समेत कई क्षेत्रों में नहीं है। इसके अलावा पठापुरा, विष्णुपुरा, भदैंया, खिरका, सुरईघाट, नेहरूनगर आदि क्षेत्रों में जलापूर्ति बाधित बनी रहती है। ऐसे में यहां पर हैंडपंप ही पेयजल की सुविधा के लिए इकलौता साधन है। नगर पालिका के 26 वार्ड में पेयजल की सुविधा के लिए लगभग डेढ़ हजार से अधिक हैंडपंप लगाए गए हैं। इनमें जिन वार्डों में पाइप लाइन नहीं है, वहां पर लगभग 60 से 90 हैंडपंप तक लगे हैं। अन्य वार्डों में 40 से अधिक हैंडपंप लगे हैं।
इससे मोहल्लावासियों को पानी जुटाने की सुविधा हो रही है। लेकिन वर्तमान में हैंडपंपों की मरम्मत को लेकर जिम्मेदार उदासीन बने हुए हैं। पालिका के 26 वार्डों में खराब पड़े हैंडपंपों की छह माह से मरम्मत नहीं हो पाई है। इससे खराब हैंडपंप की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वर्तमान में लगभग 350 हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। इससे मोहल्लावासियों को पेयजल का संकट हो रहा है। सिद्धनपुरा में पानी की अधिक समस्या हो रही है। यही हाल नेहरूनगर का हैं, जहां पर आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में नहीं होती है। हैंडपंपों से पानी की पूर्ति हो रही है। वर्तमान में हैंडपंप खराब होने से पानी की किल्लत हो रही है।
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हद तो तब हो गई जब विभागीय आंकडों में महज 70 हैंडपंपों के खराब हैं। जबकि धरातल पर स्थिति कुछ और ही बनी हुई है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिह्न लग रहे हैं। यही हाल रहा तो वार्ड के लोग को अधिक परेशानी हो जाएगी। पेयजल का भीषण संकट हो जाएगा। अब तो मरम्मत हो भी कैसे, विकास कार्यों के निर्माण के टेंडर के साथ ही हैंडपंप मरम्मत का टेंडर भी आचार संहिता लागू होने से थम गया है। अब नगर के लोग को हैंडपंप के सुधार के लिए दो माह और इंतजार करना होगा।
शहर में हैंडपंपों की मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही थी, इसी दौरान आचार संहिता लागू हो गई। अब आचार संहिता हटने के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
निहाल चंद्र, अधिशासी अधिकारी
नगर पालिका परिषद
नगर में लगभग 350 से अधिक हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। सभासद कई बार प्रार्थनापत्र दे चुके, लेकिन सुधार नहीं हो सका है। पेयजल की समस्या बनी हुई है।
मोदी पंकज जैन, वरिष्ठ सभासद
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शहर में अब तक कई वार्डों पेयजल की सुविधा को पाइपलाइन नहीं डल पाई है। इनमें नेहरूनगर का कुछ क्षेत्र, जुगपुरा, घुसयाना, पिसनारी आदि समेत कई क्षेत्रों में नहीं है। इसके अलावा पठापुरा, विष्णुपुरा, भदैंया, खिरका, सुरईघाट, नेहरूनगर आदि क्षेत्रों में जलापूर्ति बाधित बनी रहती है। ऐसे में यहां पर हैंडपंप ही पेयजल की सुविधा के लिए इकलौता साधन है। नगर पालिका के 26 वार्ड में पेयजल की सुविधा के लिए लगभग डेढ़ हजार से अधिक हैंडपंप लगाए गए हैं। इनमें जिन वार्डों में पाइप लाइन नहीं है, वहां पर लगभग 60 से 90 हैंडपंप तक लगे हैं। अन्य वार्डों में 40 से अधिक हैंडपंप लगे हैं।
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इससे मोहल्लावासियों को पानी जुटाने की सुविधा हो रही है। लेकिन वर्तमान में हैंडपंपों की मरम्मत को लेकर जिम्मेदार उदासीन बने हुए हैं। पालिका के 26 वार्डों में खराब पड़े हैंडपंपों की छह माह से मरम्मत नहीं हो पाई है। इससे खराब हैंडपंप की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वर्तमान में लगभग 350 हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। इससे मोहल्लावासियों को पेयजल का संकट हो रहा है। सिद्धनपुरा में पानी की अधिक समस्या हो रही है। यही हाल नेहरूनगर का हैं, जहां पर आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में नहीं होती है। हैंडपंपों से पानी की पूर्ति हो रही है। वर्तमान में हैंडपंप खराब होने से पानी की किल्लत हो रही है।
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हद तो तब हो गई जब विभागीय आंकडों में महज 70 हैंडपंपों के खराब हैं। जबकि धरातल पर स्थिति कुछ और ही बनी हुई है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिह्न लग रहे हैं। यही हाल रहा तो वार्ड के लोग को अधिक परेशानी हो जाएगी। पेयजल का भीषण संकट हो जाएगा। अब तो मरम्मत हो भी कैसे, विकास कार्यों के निर्माण के टेंडर के साथ ही हैंडपंप मरम्मत का टेंडर भी आचार संहिता लागू होने से थम गया है। अब नगर के लोग को हैंडपंप के सुधार के लिए दो माह और इंतजार करना होगा।
शहर में हैंडपंपों की मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही थी, इसी दौरान आचार संहिता लागू हो गई। अब आचार संहिता हटने के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
निहाल चंद्र, अधिशासी अधिकारी
नगर पालिका परिषद
नगर में लगभग 350 से अधिक हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। सभासद कई बार प्रार्थनापत्र दे चुके, लेकिन सुधार नहीं हो सका है। पेयजल की समस्या बनी हुई है।
मोदी पंकज जैन, वरिष्ठ सभासद