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शरीर को स्वस्थ रखने को आसन व प्राणायाम जरुरी
Updated Thu, 21 Jun 2018 02:27 AM IST
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शरीर को स्वस्थ रखने को आसन व प्राणायाम जरुरी
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस आज, गोष्ठी में बताए योग के लाभ
तुवन मंदिर प्रांगण में आज योग को जुटेंगे सैकड़ों लोग
अमर उजाला ब्यूूरो
ललितपुर। अंतराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर प्रभावना जन कल्याण परिषद एवं पतंजलि महिला योग समिति के संयुक्त तत्वावधान में एक वैचारिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता करते हुए पतंजलि योग महिला समिति की जिला प्रभारी प्रीति जैन ने कहा कि योग हमें जीवन जीने की कला को सिखाता है। योग करना आज प्रत्येक मनुष्य की आवश्यकता बन चुकी है।
वर्तमान समय में व्यक्ति रोगों से इतना ग्रसित हो गया है कि उसे अपने जीवन को सुरक्षित रखने के लिए योग करना आवश्यक हो है। योग करने से पुराने से पुराने रोगों को मजबूरन ही दूर होना पड़ता है। योग ही हमें स्वस्थ रखता है। प्रभावना जन कल्याण परिषद के मानद निदेशक डा. सुनील जैन संचय ने कहा कि योग हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। अपने रोजमर्रा के दिन को सुचारु रुप से चलाने, तन-मन को स्फूर्तिवान बनाने के लिए योग की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। योग द्वारा व्यक्ति अपने मन व आत्मा को अनुशासित करता है। पतंजलि योग महिला समिति की सदस्य विद्या श्रीवास्तव ने कहा कि योग साधारण लोगों के साथ-साथ खिलाड़ियों के लिए भी आवश्यक होता है।
कल्पना समैया ने कहा कि योग मेरे जीवन जीने का एक तरीका है। योग से हमारा शरीर स्वस्थ रहता है व हमारे शरीर को मजबूती भी मिलती है। केवल शरीर के क्रियाकलापों और श्वांस लेने के सही तरीकों का नियमित अभ्यास करने की आवश्यकता है। पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी अरविंद कुमार जैन ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की भारत की प्राचीन परंपरा को महापुरुषों ने ही पूरी दुनिया में पहुंचाया है। स्वामी विवेकानंद ने पश्चिमी देशों में लोगों को योग से परिचित कराया था तो योग के जनक अयंगर ने योग की कलाओं व आसन का उपहार दुनिया को दिया है। इक्कीसवीं सदी में पतंजलि योगपीठ के प्रमुख बाबा रामदेव ने सम्पूर्ण विश्व में योग की पताका पूरे विश्व में फहराकर भारत देश का मान बढाया है। शिक्षक पुष्पेंद्र जैन ने कहा कि योग में निरोग रहने का संदेश समाहित है। 21जून को योग दिवस के रूप में संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा मान्यता देने के बाद योग साधकों का कारवां निरंतर बढता जा रहा है। हजारों वर्षों से मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाला योग हमारी जीवनशैली में चेतना ,संयम और नियम को दिशा दे रहा है। पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया था। इसमें दिल्ली के राजपथ पर 84 देशों के लोग शामिल हुए थे। यह चौथा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी पूरे विश्व में मनाया जा रहा है। सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक वालकृष्ण नामदेव ने कहा कि जिस प्रकार भोजन में सभी रस जरुरी होते हैं वैसे ही शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आसन व प्राणायाम आवश्यक हैं। इस मौके पर चेतन गुप्ता, मनविंदर कौर, विद्या श्रीवास्तव मौजूद रहे।
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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस आज, गोष्ठी में बताए योग के लाभ
तुवन मंदिर प्रांगण में आज योग को जुटेंगे सैकड़ों लोग
अमर उजाला ब्यूूरो
ललितपुर। अंतराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर प्रभावना जन कल्याण परिषद एवं पतंजलि महिला योग समिति के संयुक्त तत्वावधान में एक वैचारिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता करते हुए पतंजलि योग महिला समिति की जिला प्रभारी प्रीति जैन ने कहा कि योग हमें जीवन जीने की कला को सिखाता है। योग करना आज प्रत्येक मनुष्य की आवश्यकता बन चुकी है।
वर्तमान समय में व्यक्ति रोगों से इतना ग्रसित हो गया है कि उसे अपने जीवन को सुरक्षित रखने के लिए योग करना आवश्यक हो है। योग करने से पुराने से पुराने रोगों को मजबूरन ही दूर होना पड़ता है। योग ही हमें स्वस्थ रखता है। प्रभावना जन कल्याण परिषद के मानद निदेशक डा. सुनील जैन संचय ने कहा कि योग हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। अपने रोजमर्रा के दिन को सुचारु रुप से चलाने, तन-मन को स्फूर्तिवान बनाने के लिए योग की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। योग द्वारा व्यक्ति अपने मन व आत्मा को अनुशासित करता है। पतंजलि योग महिला समिति की सदस्य विद्या श्रीवास्तव ने कहा कि योग साधारण लोगों के साथ-साथ खिलाड़ियों के लिए भी आवश्यक होता है।
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कल्पना समैया ने कहा कि योग मेरे जीवन जीने का एक तरीका है। योग से हमारा शरीर स्वस्थ रहता है व हमारे शरीर को मजबूती भी मिलती है। केवल शरीर के क्रियाकलापों और श्वांस लेने के सही तरीकों का नियमित अभ्यास करने की आवश्यकता है। पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी अरविंद कुमार जैन ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की भारत की प्राचीन परंपरा को महापुरुषों ने ही पूरी दुनिया में पहुंचाया है। स्वामी विवेकानंद ने पश्चिमी देशों में लोगों को योग से परिचित कराया था तो योग के जनक अयंगर ने योग की कलाओं व आसन का उपहार दुनिया को दिया है। इक्कीसवीं सदी में पतंजलि योगपीठ के प्रमुख बाबा रामदेव ने सम्पूर्ण विश्व में योग की पताका पूरे विश्व में फहराकर भारत देश का मान बढाया है। शिक्षक पुष्पेंद्र जैन ने कहा कि योग में निरोग रहने का संदेश समाहित है। 21जून को योग दिवस के रूप में संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा मान्यता देने के बाद योग साधकों का कारवां निरंतर बढता जा रहा है। हजारों वर्षों से मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाला योग हमारी जीवनशैली में चेतना ,संयम और नियम को दिशा दे रहा है। पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया था। इसमें दिल्ली के राजपथ पर 84 देशों के लोग शामिल हुए थे। यह चौथा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी पूरे विश्व में मनाया जा रहा है। सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक वालकृष्ण नामदेव ने कहा कि जिस प्रकार भोजन में सभी रस जरुरी होते हैं वैसे ही शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आसन व प्राणायाम आवश्यक हैं। इस मौके पर चेतन गुप्ता, मनविंदर कौर, विद्या श्रीवास्तव मौजूद रहे।
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