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रेलवे कोई दानी आर्गेनाईजेशन नहीं
Updated Sat, 17 Feb 2018 01:28 AM IST
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रेलवे कोई दानी आर्गेनाईजेशन नहीं
ललितपुर। रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए रेलवे द्वारा जहां करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं रेलवे के आलाधिकारियों द्वारा ललितपुर रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं को खास तवज्जो नहीं दी जा रही है। यह बात शुक्रवार को मंडल रेल प्रबंधक के निरीक्षण के दौरान सामने आई, जब उन्होंने टिकट विंडो बढ़ाने के सवाल पर कहा कि रेलवे कोई दानी आर्गनाइजेशन नहीं है। नई टिकट विंडों खोलने के लिए हर विंडो पर 360 टिकट बिकना चाहिए। अभी काफी कम टिकट बिक रहे हैं। लगभग हर माह या फिर एक माह में दो बार निरीक्षण के बाद भी एक वर्ष से अधिक समय से दो पहिया वाहन स्टैंड की समस्या की ओर रेलवे का कोई ध्यान नहीं है और न ही आला अधिकारी निरीक्षण में ही इस समस्या की ओर ही कोई ध्यान देते हैं। इससे लोकल यात्रियों को बिना ठेका वाले वाहन स्टैंड से वाहन चोरी के साथ ही वाहनों से पेट्रोल चोरी की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है।
रेलवे स्टेशन पर 20 फरवरी को इलाहाबाद जोन के जीएम एमसी चौहान का निरीक्षण होना प्रस्तावित है, इसके चलते अधिकारियों द्वारा रेलवे स्टेशन पर दिखने वाली हर कमियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है और मंडलीय अधिकारियों द्वारा भी महीने में दो-दो दौरे हो रहे हैं। इसी के चलते शुक्रवार को मंडल रेल प्रबंधक एके मिश्रा ने ललितपुर और आसपास की सभी स्टेशनों का निरीक्षण किया। सबसे पहले उन्होंने बबीना से लेकर आगासौद रेलवे स्टेशन तक विंडो इंस्पेक्शन किया और आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इसके बाद दोपहर करीब पौने दो बजे वह विशेष ट्रेन से ललितपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले आरपीएफ थाने के पीछे स्थित टिकट घर का निरीक्षण किया। जहां उन्होंने एटीवीएम मशीनों के संचालन की व्यवस्था परखी और एटीवीएम से यात्रियों को मिलने वाली टिकट की जानकारी ली। फिर उन्होंने टिकट विंडो का भी निरीक्षण किया। जहां मीडिया कर्मियों द्वारा टिकट विंडो बंद रहने के बारे में बताते हुए टिकट विंडो बढ़ाने के बारे में पूछा, जिस पर डीआरएम ने बेबाकी के साथ कहा कि रेलवे कोई दानी आर्गनाईजेशन नहीं है। एक टिकट विंडो पर कम से कम 360 टिकट बिकने चाहिए, इसके बाद ही नई विंडो खोली जा सकती है। यहां संचालित एक विंडो पर इससे काफी कम टिकट बिक रहे हैं। इसके बाद वह टिकट घर के दूसरे गेट से बाहर निकलते हुए बाहर पहुंचेे, जहां एक डस्टबिन में रखे कचरे में आगे लगी पाई, इस पर उन्होंने अधिकारियों को आग नहीं लगाने के निर्देश दिए। इसके बाद उनकी नजर आरक्षण कार्यालय में पीछे के गेट पर पड़ गई, जो खुला हुआ पाया, तो उन्होंने पुराने निर्देशों का हवाला याद दिलाते हुए गेट बंद करने को कहा। उन्होंने आरपीएफ थाना परिसर में बैरक की व्यवस्थाएं परखीं। रेलवे स्टेशन के मुख्य गेट के पास स्थित स्टेट बैंक का एटीएम बंद पाया, जो हमेशा बंद ही मिलने की बात बताई, इस पर उन्होंने दूसरी बैंक संस्था से बात करने के निर्देश दिए। फिर वह जीआरपी थाने के आगे रेलवे क्वार्टर की ओर बढ़ गए, जहां नालियों में आईओडब्ल्यू कार्यालय में पड़े बेकार कबाड़ को हटाने के निर्देश दिए। रेलवे क्वार्टरों से निकली नालियों में फैली गंदगी देख उन्होंने अधिकारियों को सफाई के निर्देश दिए, लेकिन कुछ ही देर बाद जब आम लोगों द्वारा नालियों में फैली गंदगी की शिकायत की गई तो वह भड़क गए और लोगों को अपना कचरा खुद साफ करने की नसीहत देते नजर आए। उन्होंने टीआरडी कार्यालय, विद्युत कर्षण केंद्र आदि जगह जाकर व्यवस्थाएं देेखीं। उन्होंने प्लेटफार्म नंबर एक पर बैठे कुछ यात्रियों को भी संदेह से देखते हुए उनकी टिकट चैक करवाई, हालांकि यात्रियों के पास टिकट पाई गईं। इस पर वह आगे बढ़ गए।
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मूूलभूत समस्याओं की ओर गंभीर नहीं रेलवे अधिकारी
ललितपुर रेलवे स्टेशन को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जा रहा है, इस पर रेलवे करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है, इसके तहत गत दिनों ललितपुर स्टेशन को वाईफाई सुविधा भी मुहैया करा दी गई है, कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाईस भी मुहैया कराई गई हैं। लेकिन, यात्रियों के लिए मूल-भूत सुविधाओं की ओर रेलवे के मंडलीय आला अधिकारियों द्वारा कोई खास तवज्जो नहीं दी जा रही है। लगभग एक वर्ष से अधिक समय से यहां लोकल यात्रियों के साथ ही रेलवे कर्मचारियों को भी बिना ठेका वाले वाहन स्टैंड होने से वाहन सुरक्षित नहीं हैं। यहां कई बार वाहनों की चोरी हो चुकी हैं, यहां आए दिन वाहनों से पेट्रोल चोरी होना आम बात है। इस ओर मंडलीय अधिकारियों द्वारा शहर के कई संगठनों द्वारा बार-बार शिकायत के बाद भी वाहन स्टैंड का नियमित संचालन शुरू नहीं हो सका है। स्टेशन के मुख्य गेट पर लगाई गई रेलिंग की ऊंचाई काफी अधिक है, इससे यात्रियों को सामान निकालने में भारी परेशानी उठानी होती है, जबकि दो रेलिंग के बीच काफी कम गैप होने के कारण यात्रियों को रेलिंग में से निकलने में भी असुविधा होती है। इसके साथ ही रेलवे स्टेशन के बाहर कहीं भी किसी रेलवे कार्यालय तक जाने के लिए कोई निर्धारित दिशा संकेतक या फिर उन कार्यालयों के नाम लिखे बड़े बैनर या बोर्ड नहीं लगाए गए हैं, इससे यात्रियों को उस कार्यालय तक ही जाने में असुविधा होती है। स्थानीय व टीकमगढ़ के विभिन्न संगठनों द्वारा झांसी-खजुराहो पैसेंजर ट्रेन के डबल फेरे की मांग भी लगातार की जा रही है, लेकिन मंडलीय अधिकारी यहां लोगों की इन बातों को तवज्जो देने में भी गंभीर ही नहीं है।
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ललितपुर। रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए रेलवे द्वारा जहां करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं रेलवे के आलाधिकारियों द्वारा ललितपुर रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं को खास तवज्जो नहीं दी जा रही है। यह बात शुक्रवार को मंडल रेल प्रबंधक के निरीक्षण के दौरान सामने आई, जब उन्होंने टिकट विंडो बढ़ाने के सवाल पर कहा कि रेलवे कोई दानी आर्गनाइजेशन नहीं है। नई टिकट विंडों खोलने के लिए हर विंडो पर 360 टिकट बिकना चाहिए। अभी काफी कम टिकट बिक रहे हैं। लगभग हर माह या फिर एक माह में दो बार निरीक्षण के बाद भी एक वर्ष से अधिक समय से दो पहिया वाहन स्टैंड की समस्या की ओर रेलवे का कोई ध्यान नहीं है और न ही आला अधिकारी निरीक्षण में ही इस समस्या की ओर ही कोई ध्यान देते हैं। इससे लोकल यात्रियों को बिना ठेका वाले वाहन स्टैंड से वाहन चोरी के साथ ही वाहनों से पेट्रोल चोरी की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है।
रेलवे स्टेशन पर 20 फरवरी को इलाहाबाद जोन के जीएम एमसी चौहान का निरीक्षण होना प्रस्तावित है, इसके चलते अधिकारियों द्वारा रेलवे स्टेशन पर दिखने वाली हर कमियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है और मंडलीय अधिकारियों द्वारा भी महीने में दो-दो दौरे हो रहे हैं। इसी के चलते शुक्रवार को मंडल रेल प्रबंधक एके मिश्रा ने ललितपुर और आसपास की सभी स्टेशनों का निरीक्षण किया। सबसे पहले उन्होंने बबीना से लेकर आगासौद रेलवे स्टेशन तक विंडो इंस्पेक्शन किया और आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इसके बाद दोपहर करीब पौने दो बजे वह विशेष ट्रेन से ललितपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले आरपीएफ थाने के पीछे स्थित टिकट घर का निरीक्षण किया। जहां उन्होंने एटीवीएम मशीनों के संचालन की व्यवस्था परखी और एटीवीएम से यात्रियों को मिलने वाली टिकट की जानकारी ली। फिर उन्होंने टिकट विंडो का भी निरीक्षण किया। जहां मीडिया कर्मियों द्वारा टिकट विंडो बंद रहने के बारे में बताते हुए टिकट विंडो बढ़ाने के बारे में पूछा, जिस पर डीआरएम ने बेबाकी के साथ कहा कि रेलवे कोई दानी आर्गनाईजेशन नहीं है। एक टिकट विंडो पर कम से कम 360 टिकट बिकने चाहिए, इसके बाद ही नई विंडो खोली जा सकती है। यहां संचालित एक विंडो पर इससे काफी कम टिकट बिक रहे हैं। इसके बाद वह टिकट घर के दूसरे गेट से बाहर निकलते हुए बाहर पहुंचेे, जहां एक डस्टबिन में रखे कचरे में आगे लगी पाई, इस पर उन्होंने अधिकारियों को आग नहीं लगाने के निर्देश दिए। इसके बाद उनकी नजर आरक्षण कार्यालय में पीछे के गेट पर पड़ गई, जो खुला हुआ पाया, तो उन्होंने पुराने निर्देशों का हवाला याद दिलाते हुए गेट बंद करने को कहा। उन्होंने आरपीएफ थाना परिसर में बैरक की व्यवस्थाएं परखीं। रेलवे स्टेशन के मुख्य गेट के पास स्थित स्टेट बैंक का एटीएम बंद पाया, जो हमेशा बंद ही मिलने की बात बताई, इस पर उन्होंने दूसरी बैंक संस्था से बात करने के निर्देश दिए। फिर वह जीआरपी थाने के आगे रेलवे क्वार्टर की ओर बढ़ गए, जहां नालियों में आईओडब्ल्यू कार्यालय में पड़े बेकार कबाड़ को हटाने के निर्देश दिए। रेलवे क्वार्टरों से निकली नालियों में फैली गंदगी देख उन्होंने अधिकारियों को सफाई के निर्देश दिए, लेकिन कुछ ही देर बाद जब आम लोगों द्वारा नालियों में फैली गंदगी की शिकायत की गई तो वह भड़क गए और लोगों को अपना कचरा खुद साफ करने की नसीहत देते नजर आए। उन्होंने टीआरडी कार्यालय, विद्युत कर्षण केंद्र आदि जगह जाकर व्यवस्थाएं देेखीं। उन्होंने प्लेटफार्म नंबर एक पर बैठे कुछ यात्रियों को भी संदेह से देखते हुए उनकी टिकट चैक करवाई, हालांकि यात्रियों के पास टिकट पाई गईं। इस पर वह आगे बढ़ गए।
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मूूलभूत समस्याओं की ओर गंभीर नहीं रेलवे अधिकारी
ललितपुर रेलवे स्टेशन को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जा रहा है, इस पर रेलवे करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है, इसके तहत गत दिनों ललितपुर स्टेशन को वाईफाई सुविधा भी मुहैया करा दी गई है, कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाईस भी मुहैया कराई गई हैं। लेकिन, यात्रियों के लिए मूल-भूत सुविधाओं की ओर रेलवे के मंडलीय आला अधिकारियों द्वारा कोई खास तवज्जो नहीं दी जा रही है। लगभग एक वर्ष से अधिक समय से यहां लोकल यात्रियों के साथ ही रेलवे कर्मचारियों को भी बिना ठेका वाले वाहन स्टैंड होने से वाहन सुरक्षित नहीं हैं। यहां कई बार वाहनों की चोरी हो चुकी हैं, यहां आए दिन वाहनों से पेट्रोल चोरी होना आम बात है। इस ओर मंडलीय अधिकारियों द्वारा शहर के कई संगठनों द्वारा बार-बार शिकायत के बाद भी वाहन स्टैंड का नियमित संचालन शुरू नहीं हो सका है। स्टेशन के मुख्य गेट पर लगाई गई रेलिंग की ऊंचाई काफी अधिक है, इससे यात्रियों को सामान निकालने में भारी परेशानी उठानी होती है, जबकि दो रेलिंग के बीच काफी कम गैप होने के कारण यात्रियों को रेलिंग में से निकलने में भी असुविधा होती है। इसके साथ ही रेलवे स्टेशन के बाहर कहीं भी किसी रेलवे कार्यालय तक जाने के लिए कोई निर्धारित दिशा संकेतक या फिर उन कार्यालयों के नाम लिखे बड़े बैनर या बोर्ड नहीं लगाए गए हैं, इससे यात्रियों को उस कार्यालय तक ही जाने में असुविधा होती है। स्थानीय व टीकमगढ़ के विभिन्न संगठनों द्वारा झांसी-खजुराहो पैसेंजर ट्रेन के डबल फेरे की मांग भी लगातार की जा रही है, लेकिन मंडलीय अधिकारी यहां लोगों की इन बातों को तवज्जो देने में भी गंभीर ही नहीं है।
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