फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   गुणात्मक शिक्षा की छमाही परीक्षा में योगी सरकार फेल

गुणात्मक शिक्षा की छमाही परीक्षा में योगी सरकार फेल

Wed, 20 Sep 2017 01:12 AM IST
Updated Wed, 20 Sep 2017 01:12 AM IST
विज्ञापन
गुणात्मक शिक्षा की छमाही परीक्षा में योगी सरकार फेल
सिर्फ कागजों पर चलती रही छह माह की सरकार
विज्ञापन

ललितपुर। प्रदेश में सरकार बनने के बाद योगी सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों की शैक्षिक गुणवत्ता को सुधारने के लिए बड़े-बड़े वादे किए गए थे। पूरे छह माह का समय बीत गया है, लेकिन सरकार अभी तक जिले में अपनी किसी नीति व योजना को अमलीजामा नहीं पहना पाई है। इसके साथ ही पूर्व में चल रही योजनाओं को भी पूरा नहीं किया जा सका है। सरकार पूरी तरह से शिक्षामित्रों के बीच उलझकर रह गई है और योजनाओं के शुरू कराने के नाम पर केवल कागजी घोड़ा दौड़ाए जा रहे हैं।
सूबे की सत्ता संभालने के तुरंत बाद ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिषदीय स्कूलों के बच्चों को नए रंग की यूनिफार्म उपलब्ध कराने का फरमान जारी किया था और यह वादा किया था कि आगामी 15 जुलाई तक प्रदेश के शत-प्रतिशत बच्चों को नई व गुणवत्ता पूर्ण यूनिफार्म मिल जाएगी, लेकिन दो माह अतिरिक्त बीतने के बाद भी तक यूनिफार्म वितरण का काम पूर्ण नहीं हो चुका है और बच्चों को बिना फिटिंग की रेडिमेट यूनिफार्म बांटी जा रही है। इसके अलावा मार्च माह में होने वाला पुस्तकों के प्रकाशन का टेंडर प्रदेश स्तर से ही चार माह बाद जून माह में हुआ था, इसका अलाम यह रहा है आगले माह से परिषदीय विद्यालयों की छमाही परीक्षा शुरु होने वाली हैं, लेकिन अभी तक सभी बच्चों के हाथों में पुस्तकें नहीं पहुंच पाई है। बिना पुस्तकों के ही उन्हें परीक्षा देनी होगी। इसके अलावा अभी तक बच्चों को नि:शुल्क स्कूली बैग मिलना शुरु भी नहीं हो सका है। वहीं योगी सरकार ने इस साल से परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को मुफ्त में जूता-मोजा उपलब्ध कराने की भी घोषणा की थी, लेकिन नवीन सत्र शुरु हुए छह माह बीतने वाले है अभी तक जूता-मोजा वितरण योजना केवल कागजों पर ही दौड़ रही है। यह बाद पूरा होना तो दूर शुरु भी नहीं हो सका कि योगी सरकार ने बच्चों को मुफ्त में एक-एक स्वेटर मुहैया कराने की भी घोषणा कर दी है। सरकार की वर्तमान कछुआ गति को देखकर ऐसा लगता है कि स्वेटर का इंतजार करने में बच्चे जाड़ा भी बिता देगें।
विज्ञापन

==========
शिक्षामित्रों का मामला बना ब्रेकर
योगी सरकार को अपनी योजनाओं व नीतियों को अमलीजामा पहनाने में जो देरी हो रही है, उसमें शिक्षामित्रों का मामला सरकार के लिए ढाल का काम भी कर रहा है। सरकार के पास बहाना भी है कि शिक्षामित्रों द्वारा किया गया विरोध गुणात्मक शिक्षा की गति में ब्रेकर बनकर सामने आई है। शिक्षामित्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कई स्कूलों में ताला बंदी रही तो कई विद्यालयों में शैक्षिक कार्य पूरी तरह से ठप रहा, इससे बच्चों की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है। वहीं योगी सरकार अभी तक अपने वादों के अनुुसर शिक्षामित्रों को 10 हजार और अनुदेशकों को 17 हजार रुपए के मानदेय का लाभ नहीं पहुंचा सकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

=========
नहीं हो सकी नई भर्तियां, एबीआरसी चयन भी अधूरा
जहां शासनादेश के अनुसार एबीआरसी(सह-समन्वयकों) का कार्यकाल पूरा होने से पहले नवीन चयन प्रक्रिया पूर्ण हो जानी चाहिए एक दिन भी एबीआरसी के बगैर न बीते, ऐसे में योगी सरकार में एक-दो दिन नहीं बल्कि पूरे चार माह बीतने वाले है, अभी तक एबीआरसी चयन प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकी है। इससे शैक्षिक स्तर में सुधार नहीं आ पा रहा है और मूल कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। वहीं अभी तक नवीन शिक्षकों की कोई भर्ती भी नहीं निकाली गई है, जनपद के अनेकों विद्यालय एकल है या फिर बच्चों के सापेक्ष शिक्षकों की संख्या कम है। इसके अलावा अभी तक हाउस होल्ड सर्वे के तहत चिह्नित किए गए आउट ऑफ स्कूल बच्चों को विशेष प्रशिक्षण का कार्य भी शुरु नहीं हो सकता है। बच्चों को रेडियो कार्यक्रम के तहत चलाया जाने वाले ऽआओ अंग्रेजी सीखेंऽ कार्यक्रम भी भगवान भरौसे ही चल रहा है, विभाग द्वारा इसकी कोई मॉनिटरिंग नहीं की जा रही है। इसके अलावा भी सरकार ने विद्यालयों में चल रही शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए एक ही परिसर में संचालित हो रहे दो या उससे अधिक विद्यालयों को समायोजित कराने की नीति बनाते हुए सभी जनपदों से ऐसे विद्यालयों की सूचना भी मांगी थी, लेकिन सूचना भेजने के बाद मामला अभी ठंडा पड़ा हुआ है। इसी तरह परिषदीय विद्यालयों में बिजली की व्यवस्था कराने के लिए बिना बिजली वाले विद्यालयों की सूचना मांगी थी, इसमें में अभी कुछ नहीं हो सकता है। जनपद के आधे से अधिक विद्यालयों में बिजली की उचित व्यवस्था नहीं है, यही हाल प्रदेश के समस्त जनपदों का है। वहीं बिना एलपीजी वाले विद्यालयों की सूची भी शासन रखकर बैठ गया है।
==========
योग और शारीरिक शिक्षा अनिवार्यता की निकली हवा
सरकार ने समस्त विद्यालयों में योग और शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य करने की धोषणा की थी। इस योजना की भी हवा निकल गई है। वर्तमान में विद्यालयों में योगा और शरीरिक शिक्षा के शिक्षको की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बच्चों को योगा कौन कराए और शरीरिक शिक्षा का ज्ञान दे यह सबसे बड़ी समस्या है। पूर्व सरकार ने शरीरिक शिक्षा के लिए शिक्षकों की भर्ती निकाली थी, लेकिन सरकार परिवर्तन होने के बाद भर्ती प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया था, जो दोबारा गति नहीं पकड़ पाई है।

========
मेधावी छात्र-छात्राओं को योजना का इंतजार
पूर्व समाजवादी सरकार के कार्यकाल में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में अच्छे नंबर पाकर उत्तीर्ण करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को पूर्व में नि:शुल्क लैपटॉप, साइकिल, कन्या विद्याधन आदि योजनाओं से लाभांवित किया गया है, लेकिन इस वर्ष रहे मेधावी छात्र-छात्राओं को किसी योजना से लाभांवित नहीं किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed