{"_id":"5ecac2258ebc3e907149c36b","slug":"3000-thousand-workers-gathered-at-amjhara-borders-lalitpur-news-jhs1674796134","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमझरा बार्डर पर तीन हजार से अधिक प्रवासी आए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमझरा बार्डर पर तीन हजार से अधिक प्रवासी आए
विज्ञापन
अमझरा गौशाला में धूप में खड़े प्रवासी मजदूर
- फोटो : LALITPUR
डोंगराखुर्द। जिले के अमझरा घाटी बार्डर पर मध्य प्रदेश की सीमा से आ रहे मजदूरों की भीड़ थमने का नाम नहीं ले रही है। रविवार को सुबह से तीन हजार से अधिक मजदूरों की भीड़ इकट्ठी हो गई। अब इन्हें गृह जनपद भिजवाने की तैयारी है।
लॉकडाउन लागू हुए दो माह का समय बीतने वाला है, लेकिन प्रवासी मजदूरों अभी भी अन्य प्रदेशों की सीमाओं पर फंसे हुए हैं। अपने गांव लौटने के लिए मजबूर श्रमिक ट्रेनों, ट्रकों, बसों, टैक्सियों और अन्य साधनों का सहारा ले रहे हैं। यातायात के साधन नहीं मिल पाने के कारण मजदूर जत्थों में पैदल ही अपने गंतव्य की ओर जा रहे हैं।
जिला प्रशासन ने शनिवार को अमझरा घाटी स्थित गोशाला में ठहरे अन्य प्रांतों से आए दो हजार से अधिक मजदूरों को अमरपुर मंडी भेजकर वहां से श्रमिक ट्रेनों और बसों से गृह जनपद के लिए रवाना किया। इस पर प्रशासन ने थोड़ी राहत की सांस ली थी, लेकिन रविवार की सुबह फिर से करीब तीन हजार मजदूरों ने अमझरा घाटी बार्डर पर दस्तक दे दी है। औद्योगिक गतिविधियों और निर्माण कार्यों में अपनी भूमिका अदा करने वाले प्रवासी मजदूरों की पीड़ा किसी से छुपी नहीं है। लॉकडाउन के दौरान सबसे बडी कीमत प्रवासी मजदूरों को ही चुकानी पड़ी है। लॉकडाउन के कारण निर्माण कार्य एवं उद्योग धंधे बंद हो जाने से रोजगार खत्म हो गया। इससे मजदूरों के पास पैसा भी खत्म हो जाने के कारण अब अपने गांव लौटने को मजबूर हैं। वाहन चालकों ने भी मजदूरों की मजबूरी का खूब फायदा उठाया और मनमाना किराया वसूला। ठूंस- ठूंस कर मजदूरों को बैठाया, जिसमें मजदूरों को सांस लेना मुश्किल हो गया।
विज्ञापन
अन्य प्रदेशों से चलकर अमझरा घाटी वार्डर पर आ रहे मजदूरों को अमझरा घाटी स्थित गोशाला में आसरा दिया जा रहा है। यहां पर प्रशासन और समाजसेवियों द्वारा पेयजल, भोजन एवं फल आदि का वितरण किया जा रहा है। यहां से मजदूरों को ललितपुर स्थित अमरपुर मंडी भेजा जा रहा है, जहां से स्पेशल श्रमिक ट्रेनों व बसों से मजदूरों को उनके गृह जनपद भिजवाया जा रहा है।
प्रवासी मजदूरों को पचास बसों में भोजन पानी कराकर सुरक्षित बैठाकर पहुंचाया गया है। कैंपस लगभग खाली हो गया है। बसें भी पर्याप्त हैं। किसी को आने-जाने में असुविधा नहीं हो रही है।
- फूल सिंह पुलिस क्षेत्राधिकारी पाली
विज्ञापन
लॉकडाउन लागू हुए दो माह का समय बीतने वाला है, लेकिन प्रवासी मजदूरों अभी भी अन्य प्रदेशों की सीमाओं पर फंसे हुए हैं। अपने गांव लौटने के लिए मजबूर श्रमिक ट्रेनों, ट्रकों, बसों, टैक्सियों और अन्य साधनों का सहारा ले रहे हैं। यातायात के साधन नहीं मिल पाने के कारण मजदूर जत्थों में पैदल ही अपने गंतव्य की ओर जा रहे हैं।
विज्ञापन
जिला प्रशासन ने शनिवार को अमझरा घाटी स्थित गोशाला में ठहरे अन्य प्रांतों से आए दो हजार से अधिक मजदूरों को अमरपुर मंडी भेजकर वहां से श्रमिक ट्रेनों और बसों से गृह जनपद के लिए रवाना किया। इस पर प्रशासन ने थोड़ी राहत की सांस ली थी, लेकिन रविवार की सुबह फिर से करीब तीन हजार मजदूरों ने अमझरा घाटी बार्डर पर दस्तक दे दी है। औद्योगिक गतिविधियों और निर्माण कार्यों में अपनी भूमिका अदा करने वाले प्रवासी मजदूरों की पीड़ा किसी से छुपी नहीं है। लॉकडाउन के दौरान सबसे बडी कीमत प्रवासी मजदूरों को ही चुकानी पड़ी है। लॉकडाउन के कारण निर्माण कार्य एवं उद्योग धंधे बंद हो जाने से रोजगार खत्म हो गया। इससे मजदूरों के पास पैसा भी खत्म हो जाने के कारण अब अपने गांव लौटने को मजबूर हैं। वाहन चालकों ने भी मजदूरों की मजबूरी का खूब फायदा उठाया और मनमाना किराया वसूला। ठूंस- ठूंस कर मजदूरों को बैठाया, जिसमें मजदूरों को सांस लेना मुश्किल हो गया।
विज्ञापन
अन्य प्रदेशों से चलकर अमझरा घाटी वार्डर पर आ रहे मजदूरों को अमझरा घाटी स्थित गोशाला में आसरा दिया जा रहा है। यहां पर प्रशासन और समाजसेवियों द्वारा पेयजल, भोजन एवं फल आदि का वितरण किया जा रहा है। यहां से मजदूरों को ललितपुर स्थित अमरपुर मंडी भेजा जा रहा है, जहां से स्पेशल श्रमिक ट्रेनों व बसों से मजदूरों को उनके गृह जनपद भिजवाया जा रहा है।
प्रवासी मजदूरों को पचास बसों में भोजन पानी कराकर सुरक्षित बैठाकर पहुंचाया गया है। कैंपस लगभग खाली हो गया है। बसें भी पर्याप्त हैं। किसी को आने-जाने में असुविधा नहीं हो रही है।
- फूल सिंह पुलिस क्षेत्राधिकारी पाली

अमझरा गौशाला में प्रवासी मजदूरों की लगी भीड़- फोटो : LALITPUR