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Lalitpur News: वाहनों की धुलाई में प्रतिदिन बर्बाद हो रहा 28 हजार लीटर पानी
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। एक ओर जहां कई मोहल्ले पेयजल संकट से जूझ रहे हैं, वहीं वाहनों की धुलाई में 28 हजार लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। धुलाई सेंटरों पर पैसा कमाने के चक्कर में लोगों के हिस्से का पानी नालियों में बह रहा है। हद तो तब हो गई, जब जिम्मेदार गर्मियों की किल्लत को देखकर भी इन पर अंकुश नहीं लगा रहे हैं।
शहर में लगभग तीन दर्जन धुलाई सेंटर हैं। कई गलियों में भी वाहनों की धुलाई की जाती है। विभाग के पास इनका रिकार्ड भी नहीं है। प्रत्येक सेंटर पर प्रतिदिन औसतन 30 से 35 वाहनों की धुलाई की जा रही है। दो पहिया वाहनों की धुलाई में लगभग 20-30 लीटर पानी खर्च हो रहा है तो चार पहिया और अन्य वाहनों की धुलाई में 100-125 लीटर पानी बहाया जा रहा है। इस तरह सभी धुलाई सेंटरों पर प्रतिदिन लगभग 28 हजार लीटर पानी का उपयोग किया जा रहा है। गर्मी से गिरते भूगर्भ जलस्तर से हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार इसे नजरअंदाज कर रहे हैं।
केवल पांच सेंटर हैं पंजीकृत
वाहनों की धुलाई के लिए 36 से अधिक सर्विस सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। सभी को पानी के लिए जल संस्थान से व्यावसायिक कनेक्शन लेना चाहिए, लेकिन इनमें केवल पांच सर्विस सेंटर संचालकों ने कनेक्शन लिया है।
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नियंत्रण के लिए नहीं है कोई नियम
धुलाई केंद्रों का आंकड़ा न तो नगरपालिका के पास है और न ही जल संस्थान के पास। जल संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि धुलाई केंद्रों के लिए कोई नियमावली नहीं बनी है। इन्हें नगर पालिका की ओर से लाइसेंस दिया जाता है। वहीं, पालिका का कहना है कि जल संस्थान ही कनेक्शन देता है। उनके पास रिकार्ड होना चाहिए।
सर्विस सेंटर की जांच कराई जाएगी। घरेलू कनेक्शन के पानी का व्यावसायिक उपयोग करने पर कार्रवाई की जाएगी। - शिवराज सिंह, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान
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ललितपुर। एक ओर जहां कई मोहल्ले पेयजल संकट से जूझ रहे हैं, वहीं वाहनों की धुलाई में 28 हजार लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। धुलाई सेंटरों पर पैसा कमाने के चक्कर में लोगों के हिस्से का पानी नालियों में बह रहा है। हद तो तब हो गई, जब जिम्मेदार गर्मियों की किल्लत को देखकर भी इन पर अंकुश नहीं लगा रहे हैं।
शहर में लगभग तीन दर्जन धुलाई सेंटर हैं। कई गलियों में भी वाहनों की धुलाई की जाती है। विभाग के पास इनका रिकार्ड भी नहीं है। प्रत्येक सेंटर पर प्रतिदिन औसतन 30 से 35 वाहनों की धुलाई की जा रही है। दो पहिया वाहनों की धुलाई में लगभग 20-30 लीटर पानी खर्च हो रहा है तो चार पहिया और अन्य वाहनों की धुलाई में 100-125 लीटर पानी बहाया जा रहा है। इस तरह सभी धुलाई सेंटरों पर प्रतिदिन लगभग 28 हजार लीटर पानी का उपयोग किया जा रहा है। गर्मी से गिरते भूगर्भ जलस्तर से हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार इसे नजरअंदाज कर रहे हैं।
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केवल पांच सेंटर हैं पंजीकृत
वाहनों की धुलाई के लिए 36 से अधिक सर्विस सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। सभी को पानी के लिए जल संस्थान से व्यावसायिक कनेक्शन लेना चाहिए, लेकिन इनमें केवल पांच सर्विस सेंटर संचालकों ने कनेक्शन लिया है।
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नियंत्रण के लिए नहीं है कोई नियम
धुलाई केंद्रों का आंकड़ा न तो नगरपालिका के पास है और न ही जल संस्थान के पास। जल संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि धुलाई केंद्रों के लिए कोई नियमावली नहीं बनी है। इन्हें नगर पालिका की ओर से लाइसेंस दिया जाता है। वहीं, पालिका का कहना है कि जल संस्थान ही कनेक्शन देता है। उनके पास रिकार्ड होना चाहिए।
सर्विस सेंटर की जांच कराई जाएगी। घरेलू कनेक्शन के पानी का व्यावसायिक उपयोग करने पर कार्रवाई की जाएगी। - शिवराज सिंह, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान