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रामलीला: नगर से निकली भव्य रामबारात
Updated Sat, 23 Sep 2017 01:43 AM IST
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रामलीला: नगर से निकली भव्य रामबारात
ललितपुर।
रामलीला आयोजन में रामविवाह से पूर्व शहर में भव्य रामबारात निकाली गई, बारात का जगह-जगह स्वागत किया गया। तोपों से फूलों की बारिश की गई, तो उज्जैन के कलाकारों ने नाचगाने का करतब दिखाया। श्रद्धालु झूमते नाचते चल रहे थे। रामबारात में शहर के आमलोगों के साथ ही मंत्री विधायक भी बाराती बनकर नाचे।
श्रीनृसिंह रामलीला समिति के तत्वावधान में रामलीला मंचन के दौरान होने वाले रामविवाह से पूर्व शहर में भव्य रामबारात निकाली गई। इसमें भगवान राम, लक्ष्मण और अन्य बारातियों के साथ जनकपुरी रवाना हुए। रामबारात में शहर के आम लोगों ने बाराती बनकर हिस्सा लिया। रामबारात में उज्जैन की तोप से भगवान राम के ऊपर फूल बरसाए गए। उज्जैन के कलाकार रामधुन पर नृृत्य करते हुए चल रहे थे। पूरा शहर धर्ममय प्रतीत हो रहा था। राम-लक्ष्मण के रथों के पीछे भरत और शत्रुघ्न बग्घी में सवार होकर चल रहे थे, जबकि उनके रथों के पीछे गुरुओं का रथ भी चल रहा था। रथों के आगे बैंड बाजों की धुनों पर बाराती बने शहरवासी के साथ राज्यमंत्री मनोहरलाल पंथ, सदर विधायक रामरतन कुशवाहा, सांसद प्रतिनिधि प्रदीप चौबे, कैलाश यादव, अध्यक्ष भवानी सिंह यादव, अखिलेश पाठक, स्वामी प्रसाद यादव, अजय तोमर, पंकज रैकवार, दिनेश श्रीवास्तव, गोपाल कृष्णपाल, आशीष श्रीवास्तव समेत सैकड़ों लोग धार्मिक गीतों पर नाचते झूमते हुए चल रहे थे।
परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मंचन हुआ
ललितपुर। श्रीनृसिंह रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित रामलीला मंचन के दौरान चतुर्थ दिवस की रामलीला में धनुष यज्ञ, रावण-वाणासुर संवाद, परशुराम-लक्ष्मण संवाद की लीला का मंचन किया गया। सर्वप्रथम कोरस गीतों के उपरांत लीला मंचन के प्रथम दृृश्य में विश्वामित्र को जनकपुर में राजकुमारी सीता के स्वयंवर का समाचार प्राप्त हुआ। राजा जनक ने शर्त रखी कि शिव धनुष को उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाने वाले के साथ ही सीता का विवाह किया जाएगा। राम ने धनुष को उठाने के लिए कोई उत्सुकता नहीं दिखाई, केवल अपने गुरु का आदेश पाने पर ही उन्होंने शिव धनुष का उठाकर उसकी प्रत्यंचा तोड़ दी और सीता के साथ विवाह के बाद राम अयोध्या लौटे और उनका जीवन सुखपूर्वक व्यतीत होने लगा। इस मौके पर संरक्षक भगवत नारायण अग्रवाल, कैलाश सिंह यादव, अध्यक्ष भवानी सिंह यादव, द्वारिका प्रसाद निरंजन, भरत पुरोहित उपस्थित रहे।
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ललितपुर।
रामलीला आयोजन में रामविवाह से पूर्व शहर में भव्य रामबारात निकाली गई, बारात का जगह-जगह स्वागत किया गया। तोपों से फूलों की बारिश की गई, तो उज्जैन के कलाकारों ने नाचगाने का करतब दिखाया। श्रद्धालु झूमते नाचते चल रहे थे। रामबारात में शहर के आमलोगों के साथ ही मंत्री विधायक भी बाराती बनकर नाचे।
श्रीनृसिंह रामलीला समिति के तत्वावधान में रामलीला मंचन के दौरान होने वाले रामविवाह से पूर्व शहर में भव्य रामबारात निकाली गई। इसमें भगवान राम, लक्ष्मण और अन्य बारातियों के साथ जनकपुरी रवाना हुए। रामबारात में शहर के आम लोगों ने बाराती बनकर हिस्सा लिया। रामबारात में उज्जैन की तोप से भगवान राम के ऊपर फूल बरसाए गए। उज्जैन के कलाकार रामधुन पर नृृत्य करते हुए चल रहे थे। पूरा शहर धर्ममय प्रतीत हो रहा था। राम-लक्ष्मण के रथों के पीछे भरत और शत्रुघ्न बग्घी में सवार होकर चल रहे थे, जबकि उनके रथों के पीछे गुरुओं का रथ भी चल रहा था। रथों के आगे बैंड बाजों की धुनों पर बाराती बने शहरवासी के साथ राज्यमंत्री मनोहरलाल पंथ, सदर विधायक रामरतन कुशवाहा, सांसद प्रतिनिधि प्रदीप चौबे, कैलाश यादव, अध्यक्ष भवानी सिंह यादव, अखिलेश पाठक, स्वामी प्रसाद यादव, अजय तोमर, पंकज रैकवार, दिनेश श्रीवास्तव, गोपाल कृष्णपाल, आशीष श्रीवास्तव समेत सैकड़ों लोग धार्मिक गीतों पर नाचते झूमते हुए चल रहे थे।
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परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मंचन हुआ
ललितपुर। श्रीनृसिंह रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित रामलीला मंचन के दौरान चतुर्थ दिवस की रामलीला में धनुष यज्ञ, रावण-वाणासुर संवाद, परशुराम-लक्ष्मण संवाद की लीला का मंचन किया गया। सर्वप्रथम कोरस गीतों के उपरांत लीला मंचन के प्रथम दृृश्य में विश्वामित्र को जनकपुर में राजकुमारी सीता के स्वयंवर का समाचार प्राप्त हुआ। राजा जनक ने शर्त रखी कि शिव धनुष को उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाने वाले के साथ ही सीता का विवाह किया जाएगा। राम ने धनुष को उठाने के लिए कोई उत्सुकता नहीं दिखाई, केवल अपने गुरु का आदेश पाने पर ही उन्होंने शिव धनुष का उठाकर उसकी प्रत्यंचा तोड़ दी और सीता के साथ विवाह के बाद राम अयोध्या लौटे और उनका जीवन सुखपूर्वक व्यतीत होने लगा। इस मौके पर संरक्षक भगवत नारायण अग्रवाल, कैलाश सिंह यादव, अध्यक्ष भवानी सिंह यादव, द्वारिका प्रसाद निरंजन, भरत पुरोहित उपस्थित रहे।
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