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बारिश थमने से फसलों में लग रहा पीला मोजेक
Updated Sat, 19 Aug 2017 08:43 PM IST
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बारिश थमने से फसलों में लग रहा पीला मोजेक
डोगराखुर्द (ललितपुर)।
बारिश थमने से नाराहट के आसपास के क्षेत्र में बोई गई खरीफ फसल को पीला मोजेक और माहू ने अपनी चपेट में ले लिया है। विशेषकर उड़द, मूंग, सोयाबीन व तिलहन की फसल पीला मोजेक और माहू नामक रोग से फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान होने की उम्मीद जताई जा रही है। पिछले चार सालों से जिले के कृषक ओलावृष्टि, अतिवृष्टि और सूखा की मार झेलते चले आ रहे हैं, जिससे किसान धीरे-धीरे बर्बादी पर पहुंच गया है। किसानों को खरीफ फसल की अच्छी होने से उम्मीद थीं, लेकिन बारिश नहीं होने से फसलों को रोगों ने घेर लिया है। फसलों में पीला मोजेक और माहू इल्ली तमाम प्रकार रोग लग गए हैं। फसलों में लगा फूल फलिया धूप पड़ने पौधों में ही चिपक गई, जिससे किसानों को इस रोग चलते फसलों में किसानों को नुकसान की चिंता सताने लगी है और अगर बारिश नहीं होती तो आगामी रबी की बुवाई होने की भी संभावना नहीं दिखाई दे रही है क्योंकि बारिश न होने से कुआं तालाब बांधों भी पानी नहीं है, किसानों के चेहरों पर मयूसी छाई हुई है, इसी वजह से पूर्व में कई किसानों ने तो जानें भी गवाने पड़ीं। नाराहट क्षेत्र ड़ोगराखुर्द, दिगवार, पटना, गुरयाना, गुढा, खिरिया, चांदोरा, बरेजा, बारचौन, बमराना आदि दर्जनों गांवों की फसलों में रोग असर दिखाई देना लगा है। यह रोग फसलों के लिए काफी नुकसान दायक है। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से फसलों में लगे रोगों की सर्वे कराकर फसल बीमा राहत राशि दिलाने की मांग की है।
फसलों पर करें छिड़काव
मोजेक रोग के लक्षण जैसे ही पौधों में दिखाई दें, उन पौधों को उखाड़कर मिट्टी में दबा दें। जिससे रोग अन्य पौधों में न फैले। उन्होंने डाइमेथोएट 30 ईसी या मिथाइल ओडेमिटान 25 प्रतिशत ईसी एक लीटर मात्रा में लेकर उसे पांच सौ लीटर पानी में घोल दें। इससे एक हेक्टेयर खेत में छिड़काव किया जा सकता है। इसी दवा से माहू को भी नियंत्रित किया जा सकता है।
बृजेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी ललितपुर।
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डोगराखुर्द (ललितपुर)।
बारिश थमने से नाराहट के आसपास के क्षेत्र में बोई गई खरीफ फसल को पीला मोजेक और माहू ने अपनी चपेट में ले लिया है। विशेषकर उड़द, मूंग, सोयाबीन व तिलहन की फसल पीला मोजेक और माहू नामक रोग से फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान होने की उम्मीद जताई जा रही है। पिछले चार सालों से जिले के कृषक ओलावृष्टि, अतिवृष्टि और सूखा की मार झेलते चले आ रहे हैं, जिससे किसान धीरे-धीरे बर्बादी पर पहुंच गया है। किसानों को खरीफ फसल की अच्छी होने से उम्मीद थीं, लेकिन बारिश नहीं होने से फसलों को रोगों ने घेर लिया है। फसलों में पीला मोजेक और माहू इल्ली तमाम प्रकार रोग लग गए हैं। फसलों में लगा फूल फलिया धूप पड़ने पौधों में ही चिपक गई, जिससे किसानों को इस रोग चलते फसलों में किसानों को नुकसान की चिंता सताने लगी है और अगर बारिश नहीं होती तो आगामी रबी की बुवाई होने की भी संभावना नहीं दिखाई दे रही है क्योंकि बारिश न होने से कुआं तालाब बांधों भी पानी नहीं है, किसानों के चेहरों पर मयूसी छाई हुई है, इसी वजह से पूर्व में कई किसानों ने तो जानें भी गवाने पड़ीं। नाराहट क्षेत्र ड़ोगराखुर्द, दिगवार, पटना, गुरयाना, गुढा, खिरिया, चांदोरा, बरेजा, बारचौन, बमराना आदि दर्जनों गांवों की फसलों में रोग असर दिखाई देना लगा है। यह रोग फसलों के लिए काफी नुकसान दायक है। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से फसलों में लगे रोगों की सर्वे कराकर फसल बीमा राहत राशि दिलाने की मांग की है।
फसलों पर करें छिड़काव
मोजेक रोग के लक्षण जैसे ही पौधों में दिखाई दें, उन पौधों को उखाड़कर मिट्टी में दबा दें। जिससे रोग अन्य पौधों में न फैले। उन्होंने डाइमेथोएट 30 ईसी या मिथाइल ओडेमिटान 25 प्रतिशत ईसी एक लीटर मात्रा में लेकर उसे पांच सौ लीटर पानी में घोल दें। इससे एक हेक्टेयर खेत में छिड़काव किया जा सकता है। इसी दवा से माहू को भी नियंत्रित किया जा सकता है।
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बृजेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी ललितपुर।