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जिले की सड़कों पर रात बिताते 20,000 अन्ना पशु
Updated Mon, 24 Sep 2018 01:24 AM IST
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जिले की सड़कों पर रात बिताते करीब 20,000 अन्ना पशु
सत्ताइस हजार पशुओं को ठहरने का हो चुका इंतजाम
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। आधा दर्जन से ज्यादा आश्रय स्थलों का निर्माण होने के बाद भी जिले को अन्ना पशुओं से छुटकारा नहीं मिल पाया है। आज भी लगभग 20 हजार अन्ना पशु चारागाह के अभाव में सड़कों पर रात बिताते हैं जो सड़क दुर्घटना को बढ़ावा दे रहे हैं। वहीं, किसानों के लिए फसल बचाना चुनौतीपूर्ण कार्य हो गया है।
बुंदेलखंड में अन्ना पशुओं के विचरण की समस्या किसी से छिपी नहीं है। वर्षों से इसके निदान के लिए उपाय किए जा रहे हैं जो अभी तक नाकाफी साबित हुए हैं। ललितपुर जिले में अन्ना पशुओं की समस्या कुछ ज्यादा ही है। यहां जब खेतों में फसल खड़ी हो जाती है तो किसान इन्हें खदेड़कर शहर की ओर कर देते हैं। वहीं, नगर पालिका परिषद इन्हें शहर से बाहर करते हैं। इस तरह पशुओं को यहां से वहां भगाया जा रहा है। अंत में थकहार पशु सड़क या उसके किनारे बैठ जाते हैं। यही नहीं, बड़ी संख्या में पशु हाइवे पर भी बैठ जाते हैं। इससे वाहन दुर्घटनाओं को बढ़ावा मिल रहा है। योगी सरकार ने इस ओर ध्यान देते हुए जगह-जगह चारागाह स्थल बनवाए हैं। शहर के निकटवर्ती ग्राम कल्यानपुरा में स्थानीय लोगों के सहयोग से 41 लाख रुपये की लागत से आदर्श आश्रय स्थल का निर्माण कराया। पांच हजार क्षमता वाले आश्रय स्थल में फिलहाल करीब 593 पशुओं को रखा गया है। वहीं, अन्य सात जगहों पर चारागाह बनाए जा रहे हैं। यही नहीं, पांच हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल के 109 एवं पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल के दो सौ इक्कीस चारागाह स्थलों का चिहांकन किया जा चुका है। इनमें से अड़तालीस स्थलों पर मनरेगा द्वारा ट्रेंच खुदाई का कार्य किया जा रहा है। इन सबके बाद भी लगभग बीस हजार पशुओं के ठहरने का इंतजाम अभी नहीं हो सका है। इससे किसानों की परेशानी पूरी समाप्त नहीं हुई है, उन्हें खेतों में खड़ी फसल को बचाने के लिए रात-दिन जागना पड़ता है। इसके अलावा हाइवे पर वाहन दुर्घटनाएं कम नहीं हो रही हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में 27, 100 गोवंश को संरक्षित करने की व्यवस्था हो सकी है। आने वाले समय में और भी आश्रय स्थल बनेंगे तो अन्ना पशुओं की समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
ये हैं आठ चारागाह स्थल
ग्राम कल्यानपुरा में 150 एकड़ में पांच हजार गोवंश की क्षमता वाले आश्रय स्थल का निर्माण किया गया है। वहीं, दूधई डुगरिया में चार हजार क्षमता का स्थल, पुलवारा दुधवा में 15 सौ क्षमता का स्थल, कारीपहाड़ी में तीन हजार क्षमता का स्थल, डगडगी में भी तीन हजार क्षमता का स्थल व अमौरा में छह सौ क्षमता का स्थल बनाया गया है। इसके अलावा अमझरा, निवारी पाली में पांच-पांच हजार क्षमता के चारागाह विकसित किए जा रहे हैं।
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आश्रय स्थल पर एक नजर
ग्राम कल्यानपुरा स्थित आश्रय स्थल में प्राकृतिक गर्भाधान के लिए दो थारपारकर सांड़ भी रखे गए हैं। गोवंश आश्रय स्थल पर उद्यान विभाग से करौंदा के 4500 पौधे, नीबू के 5000 पौधे, आंवला के 1500 पौधे, आम के 50 पौधे रोपित किए जा चुके हैं। वहीं, चारागाह की जमीन पर 15 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ज्वार चारा का बीज बोया गया है। भारतीय चारागाह एवं चारा विकास संस्थान झांसी से चारागाह के लिए दीनानाथ घास बीज 100 किलोग्राम, गिनी घास बीज 40 किलोग्राम एवं ब्रैकेरिया घास का 50 किलोग्राम बीज की बुवाई हुई है।
जिन चारागाहों पर गोवंश शेड पूर्ण हो चुके हैं, उनमें मनरेगा से चरही व चरनी बनवाने के लिए कहा गया है। वहीं, एसडीएम मड़ावरा ने ग्राम अगौड़ी में और एसडीएम पाली द्वारा ग्राम डोगराकलां में चारागाह के लिए भूमि चिह्नित की गई है। जिन पर कार्य शुरू कराने के निर्देश डीएम द्वारा दिए गए हैं।
- डॉ. एसके शाक्य, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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सत्ताइस हजार पशुओं को ठहरने का हो चुका इंतजाम
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। आधा दर्जन से ज्यादा आश्रय स्थलों का निर्माण होने के बाद भी जिले को अन्ना पशुओं से छुटकारा नहीं मिल पाया है। आज भी लगभग 20 हजार अन्ना पशु चारागाह के अभाव में सड़कों पर रात बिताते हैं जो सड़क दुर्घटना को बढ़ावा दे रहे हैं। वहीं, किसानों के लिए फसल बचाना चुनौतीपूर्ण कार्य हो गया है।
बुंदेलखंड में अन्ना पशुओं के विचरण की समस्या किसी से छिपी नहीं है। वर्षों से इसके निदान के लिए उपाय किए जा रहे हैं जो अभी तक नाकाफी साबित हुए हैं। ललितपुर जिले में अन्ना पशुओं की समस्या कुछ ज्यादा ही है। यहां जब खेतों में फसल खड़ी हो जाती है तो किसान इन्हें खदेड़कर शहर की ओर कर देते हैं। वहीं, नगर पालिका परिषद इन्हें शहर से बाहर करते हैं। इस तरह पशुओं को यहां से वहां भगाया जा रहा है। अंत में थकहार पशु सड़क या उसके किनारे बैठ जाते हैं। यही नहीं, बड़ी संख्या में पशु हाइवे पर भी बैठ जाते हैं। इससे वाहन दुर्घटनाओं को बढ़ावा मिल रहा है। योगी सरकार ने इस ओर ध्यान देते हुए जगह-जगह चारागाह स्थल बनवाए हैं। शहर के निकटवर्ती ग्राम कल्यानपुरा में स्थानीय लोगों के सहयोग से 41 लाख रुपये की लागत से आदर्श आश्रय स्थल का निर्माण कराया। पांच हजार क्षमता वाले आश्रय स्थल में फिलहाल करीब 593 पशुओं को रखा गया है। वहीं, अन्य सात जगहों पर चारागाह बनाए जा रहे हैं। यही नहीं, पांच हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल के 109 एवं पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल के दो सौ इक्कीस चारागाह स्थलों का चिहांकन किया जा चुका है। इनमें से अड़तालीस स्थलों पर मनरेगा द्वारा ट्रेंच खुदाई का कार्य किया जा रहा है। इन सबके बाद भी लगभग बीस हजार पशुओं के ठहरने का इंतजाम अभी नहीं हो सका है। इससे किसानों की परेशानी पूरी समाप्त नहीं हुई है, उन्हें खेतों में खड़ी फसल को बचाने के लिए रात-दिन जागना पड़ता है। इसके अलावा हाइवे पर वाहन दुर्घटनाएं कम नहीं हो रही हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में 27, 100 गोवंश को संरक्षित करने की व्यवस्था हो सकी है। आने वाले समय में और भी आश्रय स्थल बनेंगे तो अन्ना पशुओं की समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
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ये हैं आठ चारागाह स्थल
ग्राम कल्यानपुरा में 150 एकड़ में पांच हजार गोवंश की क्षमता वाले आश्रय स्थल का निर्माण किया गया है। वहीं, दूधई डुगरिया में चार हजार क्षमता का स्थल, पुलवारा दुधवा में 15 सौ क्षमता का स्थल, कारीपहाड़ी में तीन हजार क्षमता का स्थल, डगडगी में भी तीन हजार क्षमता का स्थल व अमौरा में छह सौ क्षमता का स्थल बनाया गया है। इसके अलावा अमझरा, निवारी पाली में पांच-पांच हजार क्षमता के चारागाह विकसित किए जा रहे हैं।
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आश्रय स्थल पर एक नजर
ग्राम कल्यानपुरा स्थित आश्रय स्थल में प्राकृतिक गर्भाधान के लिए दो थारपारकर सांड़ भी रखे गए हैं। गोवंश आश्रय स्थल पर उद्यान विभाग से करौंदा के 4500 पौधे, नीबू के 5000 पौधे, आंवला के 1500 पौधे, आम के 50 पौधे रोपित किए जा चुके हैं। वहीं, चारागाह की जमीन पर 15 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ज्वार चारा का बीज बोया गया है। भारतीय चारागाह एवं चारा विकास संस्थान झांसी से चारागाह के लिए दीनानाथ घास बीज 100 किलोग्राम, गिनी घास बीज 40 किलोग्राम एवं ब्रैकेरिया घास का 50 किलोग्राम बीज की बुवाई हुई है।
जिन चारागाहों पर गोवंश शेड पूर्ण हो चुके हैं, उनमें मनरेगा से चरही व चरनी बनवाने के लिए कहा गया है। वहीं, एसडीएम मड़ावरा ने ग्राम अगौड़ी में और एसडीएम पाली द्वारा ग्राम डोगराकलां में चारागाह के लिए भूमि चिह्नित की गई है। जिन पर कार्य शुरू कराने के निर्देश डीएम द्वारा दिए गए हैं।
- डॉ. एसके शाक्य, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी